Friday, December 13, 2019

मिट्टी के दीये

1 - मिट्टी के दीये

 

कुम्हार   बना   मिट्टी   से,मिट्टी   के   दीये   बनाये।

अपने   आप    से   अपने   आप   को   बनाने   के  

हुनर   से   ' नीर '   का   मन   अचंबित   हो  जाये।।

 

जोड़ तोड़ करता जीवन को,फिर जीवन कैसे चलाये।

ईर्ष्या - द्वेष के धागों पर क्यों चतुराई के मोती चढ़ाये।।

 

जगमगाते दीयो ने कभी ना किसी से समझौता किया।

अपनी  रौशनी  से  दूर-दूर  तक  खूब  उजाला किया।।

 

अपने  जीवन  को  तू   कुम्हार  के  मन  सा  बना।

अपने  कर्म  से  जग  में  सुंदर  दीयो  सा  जगमगा।।

 

 

 

 

 

2 - अपने मुँह मियां मिट्ठू

 

 

कर  रहा  हर  वक्त  अपनी  वाहवाही,

कभी  किसी  की  सुनता  नही  भाई।

संपन्न  है  जो , खड़ा  है  उनके  पास,

कभी जरूरतमंद के काम आया क्या??

 

अपने  ही  मुँह  बनता  मिया  मिट्ठू,

करता हर वक्त मुर्गे की तरह कुकडु कु,

कभी जरूरतमंद की जरूरत में किसी 

के  काम  आया  क्या??

 

सुबह से शाम तक यूँही बकवास करता है,

कभी इधर,कभी उधर समय पास करता है।

कभी किसी की दर्द भरी बाते सुनकर,

किसी के सर को काँधे से लगाया क्या??

 

पैर  हमेशा  रहते  है  जिसके  जमीन  पर,

पता  नही  क्यों  हवा  में  उड़ता  रहता  है,

हमेशा  दिखाता  है  कितना  सहयोगी  है,

जरूरत पर किसी के कभी ना काम आया।।

 

 

 

 

3 - उम्मीदों का वृक्ष

 

 

उम्मीदों की चादर में कई सपने दफ्न हो गए।

जिन वृक्षो से की थी छाया की उम्मीदे,वो छाया 

पतझड़ आने पर खुद ही कहीं गायब हो गयी।।

 

जीवन के गुजरते पलो में अक्सर ऐसा हुआ।

शुखे मुरझाये वृक्षो से भी कई बार ठंडी हवाओं

का अनुभव हुआ , शायद गिर रहे थे जो पत्ते

उन्होंने कहीं अंदर तक अंतर्मन को कहीं छुआ।।

 

उम्मीदों की हरियाली को फिर जीवन मे लाना होगा।

भविष्य के वृक्ष के लिए एक पौधा लगाना होगा।।

जीवन ना जाने कब,कहाँ कैसे विश्राम लेने लगेगा।

कभी ना कभी तुझे किसी की छाया में सोना होगा।

बस उसी छाया के लिए कर्मरूपी वृक्ष लगाना होगा।।

 

 

नीरज त्यागी

Featured Post

सूर्य या चंद्र की खगोलीय घटना होने की संभावना

सुमित कुमार श्रीवास्तव  ( वैज्ञानिक अधिकारी) भारत वर्ष में उपच्छायी चंद्र ग्रहण दिनांक 5 मई 2023 को रात्रि में 8.45 से 1.02 बजे तक दिखाई दे...