Thursday, April 16, 2020

ख़ामोशी


बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह जाती है ख़ामोशी

कभी ज़ख्म में मलहम तो

कभी नमक सा काम कर जाती है ख़ामोशी

कभी गुस्से का इज़हार तो

कभी प्यार का एतबार बता जाती है ख़ामोशी

कभी रिश्तों में मिठास तो

कभी कड़वाहट का एहसास करा जाती हैं ख़ामोशी

कभी दिल में सुकून तो

कभी तड़प सी जगा जाती हैं ख़ामोशी

कभी दोस्ती में प्यार तो

कभी तकरार करा जाती हैं ख़ामोशी

कभी जीवन में शांति तो

कभी अशांति पैदा कर जाती हैं ख़ामोशी

बिना शब्दों के कितना कुछ कर जाती है ख़ामोशी।


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