बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह जाती है ख़ामोशी
कभी ज़ख्म में मलहम तो
कभी नमक सा काम कर जाती है ख़ामोशी
कभी गुस्से का इज़हार तो
कभी प्यार का एतबार बता जाती है ख़ामोशी
कभी रिश्तों में मिठास तो
कभी कड़वाहट का एहसास करा जाती हैं ख़ामोशी
कभी दिल में सुकून तो
कभी तड़प सी जगा जाती हैं ख़ामोशी
कभी दोस्ती में प्यार तो
कभी तकरार करा जाती हैं ख़ामोशी
कभी जीवन में शांति तो
कभी अशांति पैदा कर जाती हैं ख़ामोशी
बिना शब्दों के कितना कुछ कर जाती है ख़ामोशी।
Thursday, April 16, 2020
ख़ामोशी
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