भारत विश्वगुरु बनने की प्रशस्त एवं परिकल्पित मार्ग में बड़ी आपदा के रूप में कोरोना वायरस संक्रमक आज के विश्व की विकसित एवं अल्पविकसित अर्थ व्यवस्था है | भारत की आर्थिक संरचना जिस तरह से विगत कई वर्षों से सुव्यवस्थित हो रही थी| जिससे प्रतीत हो रहा था कि आने वाले कल में भारत वैश्विक परिदृश्य में एक अहम भूमिका अदा कर सकता है | भारत की आर्थिक दशा एवं दिशा इस दीर्घकालीन उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु देश की मौजूदा सरकार एवं आर्थिक निर्माता एक व्यवस्थित कार्यक्रम द्वारा लक्ष्य की ओर बढ़ रहे थे और जिस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु कहीं कोई शंसय भी नहीं था | विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था में अमरीका , चीन , रूस तथा इंग्लैंड भी भारत की आर्थिक प्रगति के प्रति आश्वस्त थे | भारतीय अर्थ व्यवस्था तेजी से श्रेष्ठता की ओर कदम दर कदम मजबूती से अग्रसर हो रही थी |
जब भारत की अर्थ व्यवस्था कठोर निर्णय से कठिन परिवर्तन के दौर से गुजर रही थी उस ही समय चीन द्वारा संक्रमित कोरोना वायरस ने भारत की अर्थ व्यवस्था को अव्यवस्था की ओर धकेल दिया है जिससे भारत की अर्थ व्यवस्था लगभग 20 साल पीछे चली गई है | आर्थिक मामलों में जानकारों का कहना है कि भारत को पुन: आर्थिक प्रगति का रास्ता तय करने में काफी समय लग जाएगा | सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थ व्यवस्था को पटरी में लाने के लिए भी काफी कुछ करना होगा | लॉक डाउन से जो आर्थिक लॉक आउट जैसा माहौल बना इस माहौल को मेहनत , मशीन तथा मुनाफे में बदलने के लिए काफी मशक्कत करनी होगी और इसके बदलाव में देश के सभी आर्थिक यूनिटों , फैक्ट्रियों तथा संस्थाओं को अहम योगदान देंना होगा | इस समय सम्पूर्ण विश्व एक मुश्किल घड़ी में है ऐसे में सतर्कता एवं स्वच्छ नागरिक के रूप में देश समाज तथा परिवार को स्वस्थ , समृद्ध तथा सुरक्षित रखना होगा |
कोरोना संक्रमित भारतीय अर्थव्यवस्था तथा समस्त प्रकार के आर्थिक सिद्धांत पुन: परिभाषित हो कर एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने खड़े हैं | वर्तमान में उपभोग एवं उपयोग तो है मगर सिर्फ अतिआवश्यक वस्तुओं का ही जो कि राष्ट्रीय उत्पादन एवं आय के चक्रीय सिद्धान्त के विपरीत है जिसके कारण अर्थ व्यवस्था पंगुता की ओर चल रही है | भारतीय अर्थ व्यवस्था का आधार निचला उपभोगता एवं कुटीर उद्योग हैं | इसलिए इस दौर के अधिक समय तक होने से अर्थव्यवस्था में परिचालन क्षमता में काफी कमी होगी | क्योंकि न ही श्रम एवं श्रमिक की मांग है और न ही उत्पादन के घटक की जरूरत पड़ रही है | उत्पादन और विनियम चक्र पूरी तरह से ध्वस्त है , जिसका प्रभाव आने वाले दिनों में आम आदमी पर कहर बन बरसेगा | इस समय श्रम एवं आय के अवसर को संकुचित कर दिया गया है , जबकि व्यय में कई गुना वृद्धि हुई है | आम जनता की आय की कमी से सरकारी खजाने में भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जबकि सरकारी खर्चों में कई गुना वृद्धि हुई है , जिससे आने वाले दिनों में बजटीय घाटा होगा | इस समस्या उभरने हेतु हमें जितना जल्दी हो सके लॉक डाउन के विकल्पों के बारे मे सोचना होगा और अमल करना होगा |
कोरोना वायरस के संक्रमण के उपरांत सम्पूर्ण देश में जिस तरह आम जनता ने केंद्रीय सरकार तथा राज्य सरकारों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर इस मुश्किल घड़ी में एकता को एक निष्ठावान कर्तव्यनिष्ठ नागरिक होने का संदेश दिया है वह अत्यंत काबिले तारीफ है और इस तरह का व्यवहार नवजागरण "एक भारत श्रेष्ठ भारत" की अवधारणा को चरितार्थ करता है | कुछ अप्रिय घटनाओं को छोड़कर हर एक नागरिक अपने सामाजिक दायित्वों को बखूबी निर्वहन कर रहे हैं | हमें आशा है कि जल्द ही हम सब इस आर्थिक तथा सामाजिक मुश्किलों से विजय प्राप्त करेंगे |
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