लखनऊ से उदास और दुखी करने वाली सूचना यह है कि इस दौर के कुछ बेहतरीन संपादकों में से एक उदय सिन्हा जी का 8 अप्रैल की सुबह निधन हो गया।
उदय जी कुछ रोज पहले सांस लेने में तकलीफ के कारण लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। उनकी उम्र 62 साल थी।
वरिष्ठ पत्रकार श्री उदय सिन्हा जी को कुछ साल पहले न्यूरो की शिकायत हो गयी थी। पहले उन्हें चलने में दिक्कत आ रही थी। चलते समय पांव सही जगह नहीं पड़ते थे। एम्स में जांच कराने पर डॉक्टरों ने कहा कि उनके रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में पानी भर गया है।
वे एडमिट हुए और पानी निकाल दिया गया। फिर थोड़ा ठीक रहने लगे। बाद में फिर समस्या हुई तो जांच के बाद न्यूरो प्रॉब्लम बताया गया। उनके मस्तिष्क का ऑपरेशन करने की सलाह चिकित्सकों ने दी।
विगत दिसंबर माह में उनके मस्तिष्क का ऑपरेशन लखनऊ के निजी अस्पताल में हुआ। उसके बाद से उनकी तबियत अक्सर खराब रहने लगी। रविवार की शाम सांस लेने में ज्यादा दिक्कत होने पर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। पहले उन्हें ऑक्सीजन दिया गया, पर बाद में सांस लेने में कठिनाई होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।
दो दिनों के प्रयास के बाद भी उन्हें सामान्य हालत में नहीं लाया जा सका। उदय जी अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके दो बेटे हैं- अनुपम (हर्ष) और अभिषेक (यश)।
उदय सिन्हा के निधन की जानकारी मिलते ही उनके सभी जानने वाले स्तब्ध हैं। वरिष्ठ पत्रकार ओंकारेश्वर पांडेय कहते हैं- “श्री उदय सिन्हा मेरे बड़े भाई जैसे थे। वे हमारे समय की पत्रकारिता जगत का एक बड़ा नाम रहे हैं। श्री उदय सिन्हा ऐसे पहले हिंदी संपादक रहे हैं, जिनको अमरीकी राष्ट्रपति ने साक्षात्कार देने हेतु व्हाइट हाउस आमंत्रित किया था। वे दैनिक भास्कर, द पायनियर, सहारा समय, हरिभूमि और नॉर्थ ईस्ट टाइम जैसे अनेक हिंदी व अंग्रेजी अखबारों के संपादक तो रहे ही, टेलीविजन चैनल -चैनल वन के संपादक व एडवाइजर भी रहे हैं। उनका जाना एक बड़ा सदमा है। पत्रकारिता की कई पीढ़ियों को उदय जी ने पाला पोसा निखारा। श्रद्दांजलि!”
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