शिक्षा न केवल मनुष्य को अन्य प्राणियों से अलग ही करती है बल्कि यह मनुष्य के सोचने की क्षमता का भी इस कदर विकास करती है ताकि वह स्वयं का, समाज का एवं संपूर्ण विश्व का विकास कर सके। भारत जैसे देश जो की अंग्रेजी दासता से काफी देर से मुक्त हुए; अपनी बड़ी आबादी की वजह से शिक्षा के क्षेत्र में सबसे ज्यादा विकास करने के लिए कार्यरत हैं क्योंकि सिर्फ शिक्षा ही भारत को विकासशील से विकसित बनने में सहायता कर सकता है। इसलिए यह जरूरी है की आधुनिक विश्व के बाजारीकरण एवं उपभोक्तावाद के बदलते आयाम में शिक्षा में भी बदलते अविष्कारों को सम्मलित किया जाए।
इसी क्रम में आज विश्वव्यापी COVID-19 महामारी के समय विश्व के अधिकांश देश जोकि लॉक डाउन से गुजर रहे हैं भारत भी इस से अछूता नहीं है और जिस प्रकार भारत ने इस समस्या से निपटने के प्रयास एवं उपाय किये हैं उसकी विश्व में सराहना हो रही है जिसमे से एक शिक्षा प्रबंधन भी है।
भारत के लगभग सभी स्कूलों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में इस समय नव अविष्कारों के प्रयोग के रूप में Work from Home के तहत शिक्षा में ICT की भूमिका को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है ताकि महामारी से शिक्षा को कोई नुकसान न पहुँच सके और इसी के साथ ही एक नयी परिचर्चा भी शुरू हुई है की भारत जैसे विकासशील देश में अब शिक्षा का भविष्य में क्या रूप होगा क्योंकि कहीं न कहीं विश्वव्यापी आर्थिक मंदी दस्तक देने वाली है और बाजारीकरण और उपभोक्तावाद के इस दौर में शिक्षा, छात्र एवं शिक्षक दोनों के लिए गुणवत्ता, रोजगार एवं अन्य मामलों में एक गंभीर चिंता का विषय बननेवाला है।
बहरहाल लॉक डाउन के इस समय में ICT एक सहायक के रूप में उभरा है जिससे हालाँकि क्लासरूम जैसी शिक्षा तो नहीं मिल पा रही है परन्तु उसकी भरपाई करने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। देखना यह है की शिक्षा में ICT के अत्यधिक अत्यधिक प्रयोग/योगदान कहीं पूंजीवादी मानसिकता को विकसित होने में मदद न कर दे क्योंकि भारत जैसे विशाल जनसँख्या वाले देश में जहाँ का अधिकांश गरीबी एवं गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहा है वह पूंजीवादी मानसिकता वाली शिक्षा व्यवस्था से कहीं बहार न हो जाए। अगर ऐसा होता है तो यह देश हित एवं देश के विकास के लिए उपयुक्त नहीं है।
क्लासरूम शिक्षण में ICT का उपयोग काफी हुआ है और यह सफल भी प्रतीत होता है क्योंकि इसके संतोषजनक परिणाम सामने आये हैं परन्तु जब ICT का प्रयोग एवं उपयोग Online Teaching Learning में हो रहा है तब इसमें फायदों के साथ साथ समस्याएं भी दिखती हैं।
ICT के प्रयोग से एक बात तो साफ़ है की इस से उपभोक्तावाद में परिवर्तन आना स्वाभाविक है जोकि फायदेमंद के साथ नुकसानदेह भी है। एक तरफ अब उपभोक्ता (छात्र एवं शिक्षक) में कॉपी-किताब से अलग होकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पर समझ, पहुँच एवं निर्भररता बढ़ेगी वहीँ दूसरी ओर फइंफ्रास्ट्रक्चर में कमी आने की संभावना दिखाई पड़ती है। गौरतलब है की अगर Online Teaching Learning होती है तो शिक्षकों एवं छात्रों को रोज रोज नए नए कपड़े बदल कर कॉलेज एवं क्लासरूम जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी, न तो सजने सँवरने की आवश्यकता होगी और न ही उसके लिए सैंदर्य प्रसाधनों को खरदीने की आवश्यकता होगी और शायद रोज नहाने की भी आवश्यकता न रहे क्योंकि इसमें Classroom Teaching की तरह face to face इंटरैक्शन अत्यधिक नहीं हैं। ICT के अंतर्गत Work from Home में एक खतरा अनुशाशित जीवन में कमी आने को लेकर भी है क्योंकि इसमें आप कब उठते हैं, कब नहाते हैं, कब पढ़ते हैं, कब पढ़ाते हैं इसमें काफी ढील दी गयी है यानी आपको इसमें एक Disciplined Life जीने की कोई आवश्यकता नही है। अब यह सकारात्मक प्रभाव है या नकारात्मक यह तो उपभोक्ता ही तय करेगा। लेकिन इस से शायद पर्यावरण को काफी फायदा होगा यानी की यह Environment फ्रेंडली होने के साथ साथ Sustainable Development के लिए भी काफी उपयुक्त है।
इसी तरह इसमें समय के बचत की भी बात की जा रही है क्योंकि छात्र कम समय में ज्यादा ज्ञान हासिल कर सकते हैं परन्तु क्या यह मुमकिन है? इतिहास गवाह है की बड़े बड़े दार्शनिकों एवं वैज्ञानिकों को भी ज्ञान प्राप्त करने में एक विशाल समय अंतराल लगा है एवं लगता है तो फिर यह कैसे संभव है की ICT से ज्ञान शीघ्र ही प्राप्त होगा. जहाँ तक मेरी समझ है एक और गंभीर समस्या Science एवं Commerce विषयों को लेकर भी है क्योंकि इनमे Practical और Field Study की आवश्यकता बहुत ज्यादा होती है क्योंकि बगैर एक्सपेरिमेंट के प्राप्त किया गया विज्ञान एवं ज्ञान साइंटिफिक नहीं होता।
मेरी समझ के अनुसार शिक्षा में ICT की अत्यधिक निर्भरता की एक गंभीर समस्या और भी है जो स्वयं ICT के अंतर्गत ही है। पूरे विश्व में ICT के बढ़ते प्रयोग एवं उपयोग में पूंजीवादी मानसिकता का ज़बरजस्त विकास हो रहा है क्योंकि विश्व के अधिकांश देश आज भी Operating System के रूप में Microsoft, Apple एवं Google जैसी कंपनियों पर ही निर्भर है और इनमे प्रयुक्त होने होने 2nd और 3rd party के Softwares/ Apps भी ज्यादातर इन्ही कंपनियों के हैं या फिर अन्य पूंजीवादी देशों या चाइना के हैं जो शुरुवात में ग्राहक एवं उपभोक्ता को मुफ्त सेवा का लालच देकर अपनी ओर आकर्षित करते हैं और जब आपकी निर्भरता बढ़ जाती है तो सेवा में बढ़ोतरी के रूप में आपको प्रोडक्ट खरीदने के लिए उकसाते हैं, अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो फिर आप अनचाहे Add के रूप में एक मानसिक प्रताड़ना का शिकार होने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इसी क्रम में एक और समस्या Security Breach को लेकर भी है जो हाल ही में Zoom App के रूप में पूरी दुनिआ के सामने आया है।
समस्याएं चाहे जो भी हों ऐसा लगता है की ICT का अत्यधिक प्रयोग/उपयोग एवं Work फ्रॉम Home को तरजीह देने से छात्रों एवं शिक्षकों के Smart होने में बढ़ोतरी होगी, समय एवं पैसे की बचत होगी, क्योंकि किसी शब्द को ढूंढने के लिए पुस्तक के पृष्ठ संख्या को उलटने की आवश्यकता नहीं रह जाएगी केवल Ctrl+F बटन से ही आपका काम हो जायेगा और अंततः बदलते परिवेश में स्मार्ट फ़ोन की तरह अब आपकी स्टडी और टीचिंग भी स्मार्ट हो जाएगी और शायद आप भी स्मार्ट हो जायेंगे, पर क्या वाकई? यह सोचने का विषय है।
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