Friday, April 10, 2020

सिली माचिस


 सिली माचिस पास हमारे,
 तम को दुर भगाए कैसे।
 गद्दारो की फौज खड़ी हैं,
 इसको अब समझाये कैसे।
 कुछ लोगों ने दीप जलाकर,
 राह तिमिर का रोका था। 
 उनपे भी जब पत्थर बरसे,
 नम आंखों को भाये कैसे।
 सिली माचिस पास हमारे,
 तम को दुर भगाये कैसे।


मोदी जी ने राह दिखाई,
मानवता को जगाये कैसे।
धर्मगुरु कुछ एक न सुनते,
धार्मिकता को भुलाये कैसे।
भुखे को रोटी बटवाकर,
हमनें कड़ीया तोड़ी थी।
कोरोना का कहर इधर हैं,
पार उधर हम जाये कैसे।
सिली माचिस पास हमारे,
तम को दुर भगाये कैसे।


न कर में त्रिशूल था कोई,
न था जुबा पे जयकार,
आपस में कोरोना बांटे,
जन्नत को हम जाये कैसे।
टिका-टोपी में हम उलझे
मानवता को निभाये कैसे।
चाईना से जो चला तिमिर हैं,
दीपक में लौ लाये कैसे।
सिली माचिस पास हमारे,
तम को दुर भगाये कैसे।


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