जहाँ वो नंगे पैर अपने आशियाने की और भाग रहे थे वहाँ बाकि सब वायरस की राग गुनगुना रहे थे वो अपनी गरीबी के आलम में अंदर ही अंदर घुट गए वो पैसों से ही नहीं मदद से भी लुट गए |
अब मदद की बारी थी सबकी उम्मीदें जारी थी पूरा करने कोई तो आया जो भी उनका सपना था सबको समझ में आया फिल्मों का खलनायक सोनू सूद ही अपना था जहाँ सब मगरूर थे अपने कामों में वहाँ उसने कमान संभाली पहुँचाऊगा सबको घर मैं उनके उसने सबको जुबान ये दे डाली हर कोई परेशान था सबको अपने घर पहुंचना था बिना पैसे और साधन के एक डर भी खटकना था हर किसी ने संदेश भेजें उसने किसी की उम्मीद नहीं तोड़ी सबको घर पहुचाने की तसल्ली देकर एक नई उम्मीद जोड़ी करके बसों का इंतज़ाम पहुँचाकर सबको घर वो इंसानियत का वजूद बन गया देखो आज फिल्मों का खलनायक असल जिंदगी का हीरो बन गया।
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