आज का युग ICT(Information Communication Technology) का है;संवाद विषय बस्तु को सुगमता पूर्वक शीघ्रता के साथ भौगोलिक बाधा के बिना व्यक्ति से व्यक्ति ,समूह से समूह,देश से देश अथवा कहीं से कहीं को अनलाइन के द्वारा भेजा जा सकता है और वर्तमान इसे संभव कर रहा है ।कुछ मामलों में यह वरदान सिद्ध हुआ है,यथा रेल,हवाई आदि टिकट लेने में,और भी दैनिक अनगिनत कार्यों को पूर्ण करने में;शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश से लेकर परीक्षा परिणाम घोषित करने में अभूतपूर्व योगदान दे रहा है ।
आज कल शिक्षण कार्य भी अनलाइन विधा द्वारा जोरो में है;पाठयक्रम प्रस्तुत करने से पूर्ण करने का कार्य ऑनलाइन चल रहा है ।कितना क्रान्तिकारी परिवर्तन आया है ।
परन्तु इसके दूरगामी परिणाम के बारे में जरा सोचिए;मैं अपनी बात फेसबुक जो ICT का एक माध्यम है पर देता हूँ,पर कितने लोग इसे देखते पढते रहते हैं?हो सकता है कि बिषय बस्तु अच्छी न हो,पर यदि अच्छी भी हो तो यह निश्चित नही है कि लोग तत्काल देखते पढते होंगे;वे अपनी सुविधा और समय के अनुसार ही यह कार्य करते है। शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त माध्यम Webinar आया है जिसे वक्ता ने प्रस्तुत किया और श्रोता ने ग्रहण कर लिया;यह सब तकनीकी के माध्यम से संभव हो सका,परंतु कितना किया,कैसे किया,किया भी कि नहीं और इसका परिणाम कैसा रहा आदि प्रश्न मेरे मन को व्यग्र करते है ।
हो सकता है कि आने वाले दिनों में शिक्षा प्रणाली आन लाइन हो जाय और शिक्षक शिक्षार्थी इसी माध्यम के अभ्यस्त हो जायें;राजनीति की दिशा और दशा भी अनलाइन हो जायेगी जिसकी शुरुआत हो चुकी है;वीडियो के माध्यम से वक्ता द्वारा स्पीच और श्रोता द्वारा सुनने और देखने कार्य शुरू हो गया है,पर श्रोता कितना इसे गंभीरता पूर्वक लेता है?क्या वक्ता श्रोता से विना प्रत्यक्ष (Face to face )संवाद किये संतुष्ट रह पायेगा?
क्या प्रत्यक्ष संवाद के विना मूल्य स्थापित एवं संवर्धित हो पायेगा?गौतम बुद्ध ,जीसस और शंकराचार्य यदि प्रत्यक्ष संवाद नही किये होते क्या वे मूल्य जो वे समाज को देना चाहते थे,कर पाते? आप के विचार आमंत्रित है।
Thursday, June 11, 2020
ऑनलाइन संवाद के प्रत्यक्ष लाभ और दूरगामी परिणाम
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