“वर्तमान कोरोना संकट काल में साहित्य एवं संस्कृति के नए समीकरण बनते जा रहे हैं” । पं० दीन दयाल उपाध्याय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजाजीपुरम, लखनऊ के अंग्रेज़ी और हिन्दी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित वेबिनारके प्लेनरी व्याख्यान में ११ जून २०२० को लिटरेचर एंड कल्चर : ऑब्जरवेशन इन कोरोना टाइम्स विषय पर प्लेनरी वक्ता के रूप में बोलते हुए ये तर्क ,लखनऊ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर आर पी सिंह ने दिए । उन्हों विभिन्न साहित्यिक पाठों , शैलियों एवं रूपकों का विश्लेषण करते हुए इसे विस्तार प्रदान किया।उन्होंने अंग्रेजी साहित्य के उदय एवं विस्तार की चर्चा करते हुए इसके सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य के मूल में देश काल एवं परिस्थितियों की विभिन्न रूपों एवं पक्षों की भी चर्चा की। उन्होंनेबताया की अंग्रेजी भाषा में ४५० ईस्वी से लेकर आज के कोरोना काल तक कैसे कैसे नए नए प्रयोग होते रहे और इसकी शब्दावली एवं साहित्य पर कैसे कैसे प्रभाव पड़ते रहे। प्रोफेसर सिंह ने ये भी बताया की मीडिया किस प्रकार संस्कृति का निर्माण करती है। वर्तमान संकट के दौर ने क्रॉस सेक्शनल डायलाग को जन्म दिया है , जिनमे साहित्य पर समुदाय , विचारधारा , अर्थव्यवस्था , व्यक्तिगत अनुभवों ,यथा लाभ या क्षति तथा तत्सम्बन्धी मनःस्थिति के प्रभाव विभिन्न रूपों में दिखाई दे रहे हैं। सृजन के मूल केन्द्रक में मनुष्य चारों ओर फैले सामाजिक दबाव , व्यवहारवादी प्रकरणों धर्म एवं संस्कृति से लेकर मैत्री , प्रेम एवं यौन व्यव्हार एवं तत्सम्बन्धी समीकरणों से भी प्रभावित है। उन्होंने बताया की संस्कृति में इकोलॉजिकल फ़ैलेषी , कन्वर्जेन्स ऑफ़ कल्चर तथा सेल्फ रेफ़्रेन्स क्राइटेरिया दिखाई दे रहे हैं। ये काल आम आदमी को चिड़चिड़ा बना रहा है हम अपने मूल्यों एवं समीकरणों से ही दूसरे के बारे में मत बनाते हैं। आज की साइबर रियलिटी ने जहाँ देश प्रदेश की दूरियों को काम किया है , वहीँ एक दूसरा , यद्यपि कम चर्चित पक्ष ये भी है की इसने कहीं न कहीं एक वंचित वर्ग में असहजता की भी स्थिति भी ला दिया है।इस अवसर पर महाविद्यालयों के प्राध्यापक एवं देश विदेश के समस्त महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक, रिसर्च स्कॉलर एवं छात्र, लगभग १२०० प्रतिभागियों ने ज़ूम के द्वारा ऑनलाइन प्रतिभाग किया।
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