
Report by :केसर रानी परमीत कौर (जम्मू-कश्मीर)
क्या यह दिलचस्प नहीं है कि किसी विशेष गीत को सुनने से एक विशेष स्मृति वापस आ जाए या आपको खुशी या शांती महसूस हो ? अध्ययनों से पता चला है कि जब आप अपनी पसंद के अनुसार संगीत सुनते हैं, तो मस्तिष्क वास्तव में डोपामाइन नामक एक रसायन छोड़ता है, जो मूड पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
ऐसा ही सकारात्मक प्रभाव डालने वाली एक सुरीली आवाज ने संगीत की दुनिया में अपना कदम रखा है | वास्तव में जिसको सुनने के बाद दिल को एक अजीब सा सुकून मिलता हैं वो हैं कानपुर की प्रियम श्रीवास्तव
बचपन, बहनों संग प्यार, शिक्षा और संगीत में रूचि

प्रियम श्रीवास्तव ने खास बात-चीत में बताया कि हम तीन बहनें हैं जिनमें वह सबसे छोटी हैं। दोनो बड़ी बहने भी सफल संगीतकार हैं | बचपन से ही प्रेम से पली-बढ़ी "प्रियम" का घर संगीतकार बहनों का आशियाना हैं जिनकी सबसे पहली गुरु उनकी माँ उषा किरन जी थी। घर के चारों ओर संगीत,राग, हारमोनियम,सुर और गीतों के गुनगुनाने की आवाज़ रहती थी।
पापा श्री गोविंद श्रीवास्तव अपनी तीनों बेटियों को हमेशा अपना बेटा ही मानते थे | बेटा रत्ना श्रीवास्तव, बेटा हिना श्रीवास्तव और सबकी लाङली और पापा की बेटा प्रियम श्रीवास्तव ही कहतें थे। प्रियम श्रीवास्तव ने बताया कि वह अपनी बीएड, बीटीसी और विशारद की पढ़ाई पूरी कर चूंकी हैं और एक सफल गायक बनना चाहती हैं।
उपलब्धियां
छोटी सी उम्र में ही कई प्रतियोगिताएं जीती और कई ख़िताब हांसिल किए जिसमें की रेडियो सिटी सुपर सिंगर 9 की विजेता रही तो वहीं जुनून 2014 तथा अंतरागनी 2015 जिसमें देश भर से 19 लोगों की प्रतियोगिता में उत्तरप्रदेश से अकेली जगह बनाने वाली प्रियम द वॉइस (2016) का भी अहम हिस्सा रही हैं | इसके अलावा प्रियम बिग एफ एम 2016 के गोल्डेन वॉइस में टॉप 5 में रही हैं तथा राइज़िंग स्टार और इंडिया गॉट टैलेंट जैसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों का हिस्सा रही हैं |
प्रियम का लॉकडाउन
प्रियम रोज सुबह 5 बजे उठकर गायन का अभ्यास करती है। फिर एक प्रतिष्ठित विद्यालय के विद्यार्थियों को शिक्षिका के रूप में संगीत की ऑनलाइन शिक्षा देतीं हैं। प्रियम बताती हैं कि शाम की कसरत करना उनके लिए उतना ही आवश्यक है जितना कि सुबह उठ कर रियाज़ करना क्योंकि अच्छी आवाज़ के लिए अच्छा मन और तन दोनों जरूरी है| प्रियम आज कल होने वाले लाइव कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के साथ ही अपने पापा के सपनों को पूरा करने के लिए नये प्रोजेकट मे इन दिनों खासतौर पर खूब मेहनत भी कर रही हैं |
संगीत , शिक्षा और सानिध्य
संगीत की शिक्षा और ज्ञान सबसे पहले उन्हें अपनी माँ से मिला और संगीत की बारीकियों को समझने में अहम योगदान देने वाली अपने गुरू डॉ. शालिनी वेद और कविता सिंह का भरपूर आशीर्वाद प्रियम को मिला । उनकी दोनों बड़ी बहनें उन्हें न केवल संगीत की शिक्षा देती हैं बल्कि जीवन की कसौटी को जीने के साथ ही उनकी गलतियों को उनसे रूबरू भी करवाती आई हैं।
सुख दुख के पल
प्रियम के जीवन के कभी न भूलने वाले लम्हों में एक खास लम्हा वो था जब वह रेडियो सिटी सुपर सिंगर 9 मे चार लड़कों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बाद विजेता घोषित हुई थीं और इस दिन उन्होने "हंगामा हो गया" गीत को अपनी मधुर आवाज़ में गाकर विजेता की ट्राफी अपने नाम की थी |

प्रियम के जीवन के सबसे दुखद सुबह 23-नवंबर -2018 की थी , जब प्रियम ने अपने गुरु और अपने आदर्श, अपने पिता को खो दिया था। उसने साहस और शक्ति के साथ उस दर्दनाक पल का सामना किया। हर एक ऑडिशन में उसके अलावा उसके पापा उनके साथ जाते थे | पिता की ऊर्जा और आत्मविश्वास बेटी को भरपूर बढ़ावा देती थी शायद इसलिए पापा के निधन के बाद पहला ऑडिशन का सामना करना प्रियम के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन ऐसे समय में प्रियम ने बहुत मजबूती से सामना किया। प्रियम कहती हैं आज जो भी हूँ सब पापा के आशीर्वाद से हूँ , जिसके लिए वह सदैव अपने पापा को धन्यवाद करती हैं।

हमेशा उनके पापा ने उन्हें कभी न हारना, खूब मेहनत करना और अपना सभी प्रदर्शनों में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का सबक सिखाया। पापा ने उनके जीवन के सभी क्षेत्रों में उनका समर्थन किया, चाहे वह आर्थिक, भावनात्मक या नैतिक समर्थन हो। प्रियम के पापा अपने बेटी जिन्हें वह अपना बेटा प्रियम कहते थे की काबिलियत पर इतना भरोसा करतें थे कि कई बार बिना उन्हें बताये ही उनकी वीडियो प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए भेज देते थे।
प्रियम की नज़र में क्या है रिश्तों की अहमियत

दोस्त बनाने के लिए जो गुण वह देखती है वो चेहरे की खुबसूरती या धन संपत्ति नहीं हैं बल्कि उनके विचार और भावनाओं का मिलना हैं और अपने जीवन साथी में चाहती हैं कि वह उनके घर को भी अपना घर मान कर न सिर्फ भावनात्मक रूप से जुड़ाव रखे बल्कि जीवन के हर कदम में सहायक भी हो। प्रियम धन,रूप या अन्य भौतिकतावादी चीजों को ज्यादा महत्व देने के बजाए प्रेम और अपनेपन की भावना को अधिक महत्व देती हैं।
प्रियम के सिद्धांत
वह मानतीं हैं कि जब वह किसी को संगीत की शिक्षा देती हैं तो वह अपने शिष्यों को उनकी कमियाँ साफ साफ बताती हैं ताकि उसे सुधार कर और बेहतर बनाया जा सके। प्रियम कहती हैं कामयाबी चाहें जितनी हासिल हो जाए पर संगीत साधकों और शिष्यों दोनों को ही कभी भी रियाज़ नहीं छोड़ना चाहिए।
उनका मानना है कि हार को कभी दिल से न लगाएं कयोंकि हर हार से व्यक्ति कुछ न कुछ अवश्य सीखता है। किसी भी क्षेत्र के व्यक्ति को मेहनत करना और लक्ष्य प्राप्ति का प्रयास तब तक करना चाहिए जब तक उसका जीवन है | ऊंचे मुकाम पर पहुँच जाने के बाद इंसान को अपने घर- परिवार को कभी भी नहीं भूलना चाहिए।
पश्चमी सभ्यता के इस दौर में हो रही अभद्रता को लेकर प्रियम ने कहा कि “हद में रहने वाले के सामने कोई अपनी हद पार नहीं करता।”
किस भगवान पर हैं प्रियम की आस्था
शिरड़ी के साई बाबा जी पर प्रियम का अटूट विश्वास हैं और हर शुभ अवसरों पर उन्हे याद करती हैं।
प्रियम का खाने की पसंद
खाने में अधिक चटपटी और मसालेदार चीजे पसंद करती है। आवाज़ को लेकर खाने पीने में कोई खास परहेज नहीं करती लेकिन हल्के गरम पानी में शहद एवं नीबू डालकर दिन मे एक बार लेना नहीं भूलती हैं प्रियम।
किस चीज़ से मिलती हैं प्रियम को खुशी


जब वह आश्चर्यजनक उपहार प्राप्त करती है तो प्रियम को अपार खुशी मिलती है। उन्हें तोहफे पसंद है। गिफ्ट की कीमत मायने नहीं रखती है लेकिन प्रियजनों द्वारा दिए गए उपहार खासकर दोनों बहनों के उपहार उन्हें बहुत खुशी देते हैं।
उदास पलों में खुद को कैसे संभालती हैं प्रियम
प्रियम ने कहा कि जब भी वह उदास महसूस करती है या अपने पापा को याद करती है, तो वह हमेशा प्रार्थना करती है और बहुत आशावादी मानसिकता रखती है, हमेशा सोचती है कि सब कुछ भगवान की इच्छा के अनुसार ही होता है और वही हमारा सबसे अच्छा निर्देशक है। ईश्वर में विश्वास रखें और सभी परिस्थितियों में ईश्वर में अपना विश्वास दिखाएं और हर अच्छे बुरे वक़्त मे भगवान् को धन्यवाद भी दें।
अपने युवा प्रशंसकों को प्रियम का संदेश


प्रियम अपने फैंस से कहना चाहती हैं कि आप सभी के जीवन में एक बैकअप प्लान होना चाहिए। यदि आप जिस कला के शौकीन हैं, वह आपको कोई परिणाम नहीं दे रही है तो एक और योजना बनाने की कोशिश करें, लेकिन आपको अपने लक्ष्यों को कड़ी मेहनत करने और अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए समय सीमा निर्धारित करने की आवश्यकता है। और अपने जुनून के साथ-साथ अपनी पढ़ाई को भी उतना ही महत्व दें।
बचपन से ही प्रियम ने अपने माँ-पापा और दोनों बड़ी बहनों से बहुत प्यार पाया है और अपने जीवन का छोटा सा किस्सा उन्होने साझा किया कि मेरी दोनों बहने मुझसे बड़ी है और जब मेरा जन्म होना था तब कुछ आसपास के लोगों और रिश्तेदारों ने उनके पापा से कहा के श्रीवास्तव जी आपकी तो पहले ही दो बेटियां हैं अगर तीसरी संतान भी लड़की हो गयी तो आप क्या करेंगे तो मेरे पापा ने कहा कि “ अगर मेरे घर फिर से लड़की का जन्म होता है तो वह अपना भाग्य भगवान से लिखवाकर लाऐगी जिसे कोई दूसरा नहीं बदल सकता। मेरी तीनो बेटियां दुनिया भर मे अपनी खुदकी पहचान बनाएगी और मेरा नाम रौशन करेंगी ” और उनके पापा की इस कथनी को आज श्रीवास्तव बहनों ने वास्तव में चिरतार्थ किया है। आज भी प्रियम पापा के इन्ही शब्दों को याद कर खुद को हौसला देती हैं।