
डॉ. पूनम शर्मा, एक ऐसी नारी जो कभी न हारी,
एक ऐसी नारी जो दुष्टों पर भारी,
है जितनी मार्डन उतनी ही संस्कारी।
दुर्गा मां सी छवि इनकी,
काली माता सी अवतारी।
क्षमा कर देगी हर गलती तुम्हारी,
बर्दाश्त नहीं इन्हें झूठ, पाप और अत्याचारी।
है हर युवा नारी की सखी,
सब बुजुर्गो की दुलारी।
मान कर भगवान अपने माता-पिता को,
उनकी हर एक बात स्वीकारी।
है लक्ष्मी मां सा रूप इनका,
सरस्वती मां सी ज्ञानकारी।

दिल में इनके रहम और प्रेम,
और मस्तिष्क पर सबकी जिम्मेदारी।
पावं चले तो केवल सत्य की राह पर,
हाथ उठे तो किया दान दिल खोलकर,
कानो से जब भी सुना तो दुसरे का दुख सुना, खोली जो आंखे तो पूरे जग को रोशन कर दिया ।
निस्वार्थ होकर सारे समाज का भला किया।
होठ हिले तो "देवी मैेया" का नाम लिया।
अंधकार से हमें बचाती
ईश्वर का एहसास कराती।
" डॉ पूनम शर्मा" एक
ऐसी नारी जो कभी ना हारी ।
प्रस्तूत हैं डा•पूनम शर्मा के साथ वार्तालाप के कुछ महत्वपूर्ण अंश:
●डा•पूनम शर्मा का बचपन, शिक्षा और परिवार:
अपने पिता श्री जगदीश राज शर्मा को वह अपने भगवान का दिया हुआ सबसे महत्वपूर्ण तोहफा समझतीं है। उनके पिता न केवल उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है बल्कि सबसे बडे समर्थक भी हैं। पूनम जी के जीवन में उनके पापा की भगवान् के समान भावनाएं है जैसे अटूट प्रेम, विश्वास और श्रद्धा हैं।अपनी माँ सुशील शर्मा की लाडली हैं। इनके माता-पिता इन्हें अपना बेटा ही समझते हैं।

यह हर लड़की का सपना है कि उसकी शादी एक ऐसे आदमी से हो जो उसकी भावनाओं को समझे, उसकी देखभाल करे और उसके सपनों को प्राथमिकता के रूप में ले। पूनम जी ने कहा कि वह दुनिया के सबसे अच्छे पति श्री राजेश कुमार शर्मा जी को पाकर खुद को बेहद खुशकिस्मत समझती हैं, जिन्होंने उनके व्यक्तिगत रूप से या पेशेवर रूप से किए गए हर फैसले में हमेशा साथ दिया।उसे अपने पति पर बहुत गर्व है और वह चाहती है कि हर पुनर्जन्म में देवी

उन्हे पति के रूप मे सदैव श्री राजेश जी का ही साथ मिले। पूनम जी को तीन बहुत ही समझदार और सबसे प्यारे बच्चे रुद्राक्ष,आराध्या और कान्हा हैं जिन्हे देवी माँ का आशीर्वाद प्राप्त है।
वह अपने ससुर श्री राधाकृष्ण जी और सास श्रीमती पुष्पा देवी को दिल से बहुत सम्मान और प्रेम करती है। और उन दोनों के सहयोग के लिए उन्हे सदैव तहेदिल से धन्यवाद करती हैं।
शिक्षा: डा• पूनम शर्मा ने सदैव हर प्रकार की चुनौतियों को स्वीकार किया और किसी भी परिस्थिति को अपनी शिक्षा एवं समाज सेवा में बाँधा नहीं बनने दिया,उन्होंने एम•ए,बी.एड, समाज विज्ञान में पी.एच.डी की उच्च शिक्षा प्राप्त की हैं ।
●डा•पूनम शर्मा का लाकडाउन समय:

•डॉ पुनम शर्मा समाज हित के लिए कार्य करती है।इसीलिए नियमों को कभी भी अनदेखी नहीं करती और ना दुसरो को करने देती है। लाकडाउन का पूरा पालन कर रही हैं।
•गरीबों को राशन बांट रही हैं ।
•समाजिक स्तर पर लोगों को हर संभव सहयोग देने मे जुटी हुई हैं।
●डा•पूनम शर्मा के सिद्धांत:
डा•पूनम शर्मा कहती हैं कि उनके जीवन का एक मात्र सिद्धांत हैं "जियो और जीने दो" फिर चाहे वो इनसान हो या कोई भी जानवर रूप हो, सभी को चैन से जीने का अधिकार हैं। और उन्होंने अपने जीवन मे यह संकल्प लिया है कि वह हमेशा सही के साथ देगी चाहे कितनी भी बड़ी चुनौती या रुकावट क्यों न हो वो आजीवन निडरता से सत्य के साथ बेखौफ़ खड़ी रहेंगी।
●डा•पूनम शर्मा का सबसे खुशी भरा पल:

माँ बनना देवी माँ की सबसे बडी देन हैं, यह खुशी शब्दो से बयान नहीं की जा सकती। वह उस अति सुखद पल को नहीं भूल सकती,जब उन्होंने पहली बार अपने बच्चे अपनी गोद में उठाया था।
●उदास पलों में खुद को कैसे संभालती हैं डा• पूनम शर्मा:
पूनम जी उदासी मे एकांत में रहकर, केवल खुदी के साथ ही समय व्यतीत करती हैं और अधिक निराशा महसूस होने पर अपने पिता जी के साथ सब दिल की बातें और अन्य परेशानियों को साझा करती हैं।उनके पापा उनकी हिम्मत,शक्ति और क्षमता का प्रतीक हैं।
●डा•पूनम शर्मा के लिए रिश्तों की अहमियत:
पूनम जी कहती हैं कि उनके जीवन में रिश्तों की विशेष अहमियत हैं।वह कहती हैं रिश्ते कच्ची डोर और कांच की तरह नाजुक होते हैं ।जरा सी चूक और ग़लतफहमी से टूट सकते हैं। इसलिए रिश्तों में कभी भी गलतफहमियों को जगह न दे और पूरे दिल से रिश्ते निभाती हैं।
●डा• पूनम शर्मा ने हमें बताया कि वह अपने जीवन मे सदैव संतुष्ट रहती है, देवी माँ इन्हें जिस भी हालात मे रखती है वह खुशी से रहती हैं। पूनम जी का सभी परिस्थितियों के प्रति बहुत सकारात्मक और आशावादी रवैया है। वह मानती है कि जीवन अपने आप में एक चुनौती है, हम सभी को हिम्मत रखने की जरूरत है, और कभी भी किसी को हमारे चरित्र को परिभाषित करने का हौसला नहीं देना चाहिए या कभी भी अपने आप को छोड़कर किसी और को अपनी खुशियों की डोर नहीं सौपनी चाहिए।

●क्यों और कैसे बनी आप राजनैतिक व्यक्ति:
मेरा राजनीति मे आना मेरे पिताजी का सपना था। उन्होंने मुझे प्रेरणा दी निस्वार्थ मन से समाज की सेवा करने और सबके हित के लिए समाज मे अपना योगदान देने के लिए। हर धर्म, हर जाती और हर क्षेत्र के लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए।
●क्यों और कैसे बनी आप समाज सेविका:
मैं किसी भी विकल्प से नहीं बल्कि अपने भाग्य से एक सामाजिक कार्यकर्ता बनी हूँ ।मैं देवी माँ की एक बहुविशेष एवं धन्य संतान हूं। भगवान ने मुझे समाज के कल्याण के लिए काम करने के लिए विशेष रूप से महिलाओं, अनाथ बच्चे और बूढ़े लोगों के लिए काम करने के लिए चुना है । मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता बनी क्योंकि मैं समाज सेवा को अपना कर्म और धर्म मानती हूँ। इसके अलावा कोई भी अन्य काम नहीं है जिसमें मैं सहज महसूस करती हूं।
●क्यों और कैसा हुआ "WE" फाउंडेशन का निर्माण:

मैंने समाज और समुदाय के कल्याण के लिए काम करने का सपना देखा, जिसे पूरा करने मे मेरी पूरी टीम और विशेषकर मेरे पापा ने बहुत सहयोग दिया।हम सबके हित,सुरक्षा और जीवन में सुधार के लिए काम करते है,चाहे उनकी जाति,पंथ या लिंग कुछ भी हो। यह संगठन उन महिलाओं के कल्याण के उद्देश्य से काम करता है, जो आशाहीन हैं और मदद की उम्मीद रखे हुए बच्चों और अनाथ बच्चों को सहयोग और समर्थन देता हैं जो अपनी जीवन मे बहुत कुछ हासिल करना चाहते हैं लेकिन उन्हें सही मार्गदर्शन और सहारे की आवश्यकता हैं।हमारा लक्ष्य बुजुर्ग और बेसहारा नागरिकों जिनके पास कोई आश्रय नहीं है, को हर तरह की मदद करेगा ताकि वह भी शांति और इज्जत से अपना जीवन व्यतीत कर सके। हमारा मतलब है हम सब। हम सभी के लिए काम करते हैं। हम सभी की सेवा करते हैं और हम एक ही टीम के रूप में काम करते हैं।
●मुझे "मेरी, मैं,मुझे,मेरा से मतलब नहीं, मुझे "हम" पर विश्वास हैं।मुझे केवल मेरी तरक्की, कामयाबी या ख़ुशी नहीं,मुझे सदैव हमारी खुशी चाहिए।
•इस संगठन में योगदान, तलाश, सीखने, समर्थन लेने और विचारों को साझा करने के लिए सभी का तहे दिल से स्वागत किया जाता है। स्लोगन ऑफ वी फाउंडेशन "हम सभी के साथ" हैं।
●कैसे बनी एक आम कन्या से देवी का स्वरूपः डा•पूनम शर्मा की उपलब्धि:


जब कन्या रूप से ही लोग इन्हे माँ कहने लगे। जब वह खेलते समय 13 साल की बच्ची थी, तो वह बेहोश हो गई और दो घंटे से अधिक समय तक उस अवस्था में रही। अपने होश में आने के बाद उसने कुछ पड़ोसियों के जीवन और मृत्यु के बारे में कुछ अनुमान लगाए थे। हालांकि, लोगों ने इसे अजीब तरह से स्थापित किया, लेकिन फिर उन्होंने मान लिया कि वह अपनी बचकानी मासूमियत के कारण यह सब बोल रही थी, लेकिन जैसे ही लोगों ने उसे रोका वह जो कुछ भी बोलती है वह वास्तव में कुछ अंतराल के बाद हुआ था और फिर उसने घोषणा की कि मैं एक दिव्य देवी से मिलने पवित्र भूमि से वापस आई हूं और देवी माँ ने मुझे अपनी शक्तियों के साथ आशीर्वाद दिया, इसलिए उस दिन से वह अपने साथ कुछ प्राकृतिक शक्तियों का भी अनुभव करती है जो उसका सबसे अच्छा आशीर्वाद है देवी से।और इसी विशेष ताक़त को वह अपने जीवन की सबसे बडी उपलब्धि मानतीं हैं।
●डा•पूनम शर्मा का सपना:
पूनम जी का सपना हैं कि वह इस दुनिया में मानवता की मिसाल बनकर रहना चाहती है और दुसरे मे भी मानवता और समाज सेवा जैसी भावनाओ को जिन्दा रखने मे तत्पर प्रयास करती रहती हैं। वह रक्त-दान करती रहती हैं और उनकी सोच हैं कि जब में इस दुनिया से जाऊँ तो शरीर के महत्वपूर्ण अंग जैसे आँखे,गुर्दे और दिल का दान अवश्य करूँगी। ताकि किसी मासूम के जीवन को खुशियों से भर सकूं।
●डा•पूनम शर्मा का समाज को संदेश-

पूनम जी कहती हैं कि मैं समाज से यह विनती करती हूँ कि कभी भी खुद को छोटा समझ कर हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। प्रतेक मनुष्य का समाज में अपना योगदान और महत्व हैं।बुरे वक्त से घबराकर हिम्मत नहीं हारनी चाहिए कयोंकि वक्त कितना भी बलवान क्यो न हो कभी भी थम या ठहर नहीं सकता। हर रात के ढलते ही एक नया सूरज जरूर उगता हैं।
डा•पूनम शर्मा के शब्द:
●खुली किताब सी जिन्दगीं,
खुद की हैं मैंने बनाई,
मेरे हुनर, प्रतिभा और भीतरी शक्ति की झलक मेरे पापा ने हैं मुझे दिखाई।
तैरह वर्ष की नन्ही कली थी मैं,
जब महा मायी ने मुझपे कृपा दिखाई।
बनाकर मुझे अपनी परछाई, लोगों पर दुआओ और रहमतो की खुशियाँ बरसाई।
●रात के घने अंधेरों में भी साथ ना छोड़ू, वो अक्स, वो साया हूँ मैं।
देवी माँ की कृपा से लाखों ज़िन्दगियाँ सवारू, ऐसी उम्मीद की किरण हूँ मैं।
पापा मेरे और मैं पापा की दुनिया हूँ,
बेटी नहीं उनका बेटा हूँ मैं ।
●मेरी क्षमता पर संदेह करने वाले सभी अब मेरी स्थिति को देखकर हैरान हैं, उनका मानना है कि मैं एक ऐसे पक्षी की तरह हूं, जिसके न पंख, न जान हैं, लेकिन अब मेरी उड़ान को सबसे वे ऊंचा मानते हैं वे,,,
शिक्षा लेकर डाक्टर बनी,आज एक माँ, पत्नी, बेटी और बहू हूँ मैं।
आज एक समाज सेविका, राजनीतिक व्यक्ति और जनहितैषी हूँ मैं ।
ईश्वर से प्रार्थना है कि पूरे समाज के बारे मे सोचने वाली,साथ ही समाज और जनहित के जीवन मे सुधार लाने का लगातार प्रयास करनें वाली निडर सेविका को लम्बी आयु, कामयाबी और ढेरों खुशियाँ दे। लेखिका परमीत कौर की ओर से डा•पूनम शर्मा जी को बहुत-बहुत प्रेम और शुभकामनायें ।