बनते हैं आचार्य , आचरण करते नहीं हैं
करते सत्याग्रह , आमरण करते नहीं हैं
है विदेश में पैसा , किसका कितना
जो दबा देश के अंदर आहरण करते नहीं हैं
संसद में बन जाए , चाहे नीति अनीति
किससे है नुकसान , आकलन करते नहीं हैं
सत्य और ईमान , आज है डरा हुआ
झूठे और मक्कार आज कल डरते नहीं हैं
तुम भी सुधरो तुम भी सुधरो तुम भी सुधरो
करके गंगा मैली , आचमन करते नहीं हैं
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