प्रेम बंधन है मन के रिश्तों का
प्रेम संगम है आत्माओं का,
प्रेम एहसास का मिलन भी है
हसरतों की ये अंजुमन भी है
एक ही राग एक सरगम है
प्यार तो दो सुरों का संगम है
हमनशीनों का हमनवाओं का
सिलसिला है ये बस वफाओं का
अजनबीयत में अपनेपन का सुरूर
दूर रहकर भी क़ुर्बतों का ग़ुरूर
इक सफर कर रहें हैं दो राही
मुश्किलें हैं तमाम अनचाही
इतना आसान रास्ता भी नही
और मंज़िल का कुछ पता भी नही
प्रेम विश्वास है इबादत है
रूठ जाना भी इसकी आदत है
प्यार है एक रंग लाखों हैं
आईना एक संग लाखों हैं
प्यार का रिश्ता इतना गहरा है
दिल तो क्या रूह तक ये उतरा है
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