Tuesday, October 6, 2020

जब जिला विद्यालय निरीक्षक, पहुंचे बिल्हौर इण्टर कॉलेज , बिल्हौर

पिछले मंगलवार को तहसील दिवस में प्रतिभाग करने के साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षक श्री सतीश कुमार तिवारी  बिल्हौर इण्टर कॉलेज, बिल्हौर पहुँचे। पुनरावृत्तिक आर्थिक घपलों के दोषी परन्तु डीआईओएस महोदय की अनुकम्पा से प्रधानाचार्य बने हुए श्री प्रेमचन्द्र त्रिपाठी द्वारा वित्तविहीन शिक्षकों के विरूद्ध झूठी शिकायतें की गई जिस पर डीआईओएस एक शिक्षक पर नाराज हुए तथा संस्था प्रबन्धक महोदय से शिक्षक द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई न करवाने का आरोप लगाते हुए दूरभाष पर वार्ता की। संस्था प्रबन्धक ने डीआईओएस से अनुरोध किया कि आप पक्षपाती रवैया न रखते हुए पूर्वाग्रहों को छोड़ कर समस्त वित्तविहीन शिक्षको द्वारा किये जा रहे ऑनलाइन शिक्षण का अवलोकन करें तथा तुलनात्मक रूप से (अर्कमण्य, झूठे एवं वित्तीय अनियमितताओं के सिद्धदोष) प्रधानाचार्य द्वारा व्यक्तिगत रूप से ऑनलाइन शिक्षण में क्या किया जा रहा है, वह भी देख लें आपको हकीकत का पता चल जायेगा।


जिला विद्यालय निरीक्षक महोदय द्वारा वित्तविहीन प्रकोष्ठ के शिक्षकों द्वारा अपनाई गई ऑनलाइन शिक्षण प्रणाली का अनुश्रवण एवं वीडियोज शूट करने वाली लैब आदि का अवलोकन कर अत्यन्त प्रसन्नता व्यक्त की गई तथा अत्यअल्प मानदेय पर कार्यरत वित्तविहीन शिक्षकों के ऑनलाइन शिक्षण कार्य की सराहना की गई। वहीं वित्तपोषित व्यवस्था द्वारा कोई ऑनलाइन शिक्षण में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं दिखाया जा सका, स्वयं प्रधानाचार्य श्री प्रेमचन्द्र त्रिपाठी जो कि प्रवक्ता नागरिक शास्त्र हैं और विषय सम्बन्धी अध्यापन का कोई कार्य नहीं कर रहे है, का खुलासा भी हो गया।



जिला विद्यालय निरीक्षक श्री सतीश कमार तिवारी द्वारा वित्तविहीन प्रकोष्ठ द्वारा ऑनलाइन टीचिंग के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए वित्तपोषित व्यवस्था के उपलब्ध शिक्षक श्री सुशील त्रिपाठी एवं श्री अक्षय कुमार को टॉपिक्स दे कर जल्द से जल्द वीडियो बना कर अवलोकित कराने हेतु निर्देश दिये गये हैं।



संस्था प्रबन्धक ने समस्त घटनाक्रम के विषय में हमे बताया है कि "जिला विद्यालय निरीक्षक श्री सतीश कुमार तिवारी द्वारा निष्पक्षता से ऑनलाइन टीचिंग का निरीक्षण करने एवं वित्तविहीन अध्यापको के कार्य की सराहना हेतु उन्हें धन्यवाद देता हूँ औरआशा व्यक्त करता हूँ कि यदि डीआईओएस महोदय सभी प्रकरणो में इसी प्रकार का निष्पक्ष रवैया अख्तियार कर लेगें तो अर्कमण्य, झूठे और आर्थिक घपलों के अभ्यस्त प्रधानाचार्य के पद पर बने रह पाने का मामला स्वतः ही समाप्त हो जायेगा और शासन/प्रशासन स्तर पर शिकायतें करने की जहमत नहीं उठानी पडेगी।"


 


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