Sunday, December 27, 2020

बाहर इतने लोग क्यों आये हैं ? भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई जयंती पर विशेष (डॉ. सर्वप्रिया सांगवान की फ़ेसबुक वाल से)

बाहर इतने लोग क्यों आये हैं ?  

अरे, आपको देश का सबसे बड़ा सम्मान देने, भारत रत्न। 

ज़रा पर्दा हटाना तो, देखना चाहता हूँ.… हम्म… काफी लोग हैं।

इन सबको मैं जानता हूँ। बस, कई सालों से देखा नहीं था यहाँ। यहाँ आना भी क्यों चाहिए था इन्हें। ये कोई शिकायत नहीं है। सबकी अपनी दुनिया है। एक बड़ी और एक छोटी सी। बड़ी सबके साथ सबके सामने। एक अपनी छोटी सी अपने साथ सिर्फ अपने सामने। उनकी दुनिया का कैनवास बड़ा है। मैं भी अपनी छोटी दुनिया में जी रहा हूँ। बड़ी दुनिया में बहुत लम्बा जिया। आज छोटी दुनिया में सिर्फ बड़ी दुनिया में बिताया हर पल रिवाइंड करता हूँ।

आप खुश नहीं हैं क्या, सब आपको इतना बड़ा सम्मान देने आये हैं।

खुश? आज उम्र के इस पड़ाव पर ख़ुशी या गम क्या मायने रखते हैं। सब वैसा ही घट रहा है जैसे हमेशा घटता आया है। सिर्फ चेहरे ही तो अलग हैं। मुझे पता नहीं कि मैंने क्या अलग किया। अलग किया भी तो क्या पाया। अंत ही तो है जो अंतिम सत्य है। स्थायी है। अटल है। सभी को वही मिलता है। मेरी बातें सुन कर तुम निराश ना होना। मैं बोलता नहीं हूँ अब। ये उम्र मुझे शांत कर गयी है। मैं खूब चिल्लाया हूँ, मैंने खूब जोश भरा है लोगों में। तब मेरा रोल वही था। मैंने अपना रोल अदा किया। अब ये ज़बान की शान्ति नहीं है, ये मन की शान्ति है। बोल-बोल कर क्या पाया मैंने। किसकी ज़िन्दगी बदल पाया। शायद सिर्फ अपनी। कई बार सोचता हूँ कि अगर ज़िन्दगी में ये ना करता तो क्या करता। जब सोचता हूँ कि कुछ और करता तो मन खिन्न सा हो जाता है। काश कुछ और भी कर के देख सकता। लेकिन थोड़ी ही देर में विरक्ति सुन्न पड़े शरीर में खून की तरह दौड़ जाती है।

सब परिवार वाले खुश हैं देखिये

हाँ, अब यही मेरी विरासत है इनके लिए। कुछ दिन बाद मुझे नहीं पता होगा कि मुझे क्या मिला, क्या खोया, क्या रह गया। मैं जानता हूँ कि इन दिनों मैं अपने आस-पास के लोगों को पहचान नहीं पाता। लेकिन ये हालत अभी नहीं हुई। ज़िन्दगी भर इन लोगों को देख कर यही सोचता रहा कि क्या इन्हें पहचान पाया हूँ। मैंने इन्हें कितना झूठा पाया, मैंने इन्हें कितना छुपाते पाया। आज ये सोचना मुश्किल सा हो रहा है कि ये मेरे लिए आये हैं। कहीं ये भी किसी राजनीति का हिस्सा तो नहीं। शायद ज़्यादा सोच रहा हूँ। किसी मकसद से आये हों, क्या फर्क पड़ता है मुझे। मेरा नाम अमर भी हो गया तो मुझे क्या पता चलेगा मरने के बाद। मैंने देखा है कि जब परिवार में कोई बहुत बूढ़ा हो जाता है तो परिवार वाले उसका जीवन-काज मनाते हैं। लोगों को बुलाते हैं, खाना खिलाते हैं ताकि बूढ़ा इंसान मरने से पहले देख ले अपने मरने का समारोह। आज वैसा ही कुछ लग रहा है।

समझ नहीं आ रहा कि क्या चुभ रहा है आपको?

ये सब ठीक है अपनी जगह। ये सम्मान वगैरह। लेकिन मैं इनसे कैसे कहूँ कि मेरे कुछ पछतावे दूर कर दें। मैं इनसे कैसे कहूँ कि अंत में छोटी दुनिया में आना है, अपने साथ पछतावों का पुलिंदा ना लेकर आना। इस कमरे में मौसम नहीं बदलता। इस कमरे में कोई साथी नहीं आता। आखिर में बस तुम होगे और तुम्हारा अक्स जो अंदर बैठा है। उसी से घंटों बातें होंगी। दोनों में से किसी को नींद नहीं आएगी। उस चरम सीमा पर पहुँच जाओगे जहाँ से फिर सब भूलने लगोगे। जैसे गर्मी अपने चरम पर पहुँचती है और बारिश हो जाती है। मैं फिर शून्य हो जाता हूँ। मैं जानता हूँ, मैं फिर शून्य होने वाला हूँ। सिफर से सिफर तक पहुँचने के लिए इतनी जद्दोजहद करते हैं हम। देखो, अब भी एक पल विरक्त होता हूँ और एक पल कुछ चाहने लगता हूँ। अब मुझे सच में सिर्फ विरक्त अंत चाहिए, और कुछ नहीं।


Friday, December 18, 2020

यूपी बोर्ड डेटाबेस लीक मामले पर एफआईआर में विलंब को लेकर डीजीपी को तलब

अपने बयानों और खोजी कार्यों से चर्चित रहने वाले चर्चित आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश बोर्ड के 10वीं तथा 12वीं कक्षा के छात्रों के डेटाबेस के निजी व्यक्ति को लीक होने तथा इसे अन्य व्यक्तियों को सार्वजनिक रूप से बेचे जाने के मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने पर गंभीर आपत्ति प्रकट की है | 

डीजीपी एच सी अवस्थी तथा अन्य को भेजे अपने पत्र में अमिताभ ने कहा कि उन्होंने 14 दिसंबर 2020 को एसएसपी कानपुर नगर को उत्तर प्रदेश के 10वीं तथा 12वीं की परीक्षा के छात्रों का डाटाबेस लीक होने तथा थाना रायपुरवा, कानपुर नगर स्थित इंडीस कंपनी के लोगों द्वारा इसे बेचे जाने की शिकायत की थी | उन्होंने बताया था कि कंपनी द्वारा 1 पिनकोड का डाटाबेस रु० 1000 में, 1 शहर का डेटाबेस रु० 3500 में तथा पूरा डाटाबेस रु० 6500 में बेचा जा रहा हैं. कंपनी के लोगों के अनुसार उनके पास उत्तर प्रदेश में वर्ष 2020 में 10वीं के 3,46,505 तथा 12वीं के 2,27,984 छात्रों के डेटाबेस है. इस डेटाबेस में छात्रों के नाम, पिता का नाम, ईमेल तथा मोबाइल नंबर भी शामिल हैं | 

अमिताभ ने कहा कि 10वीं तथा 12वीं की परीक्षा में बैठे स्टूडेंट्स का डाटाबेस प्राप्त किया जाना प्रथमद्रष्टया आपराधिक कृत्य जान पड़ता है क्योंकि यह डेटाबेस पूरी तरह संबंधित परीक्षा बोर्ड का स्वत्वाधिकार है | उन्होंने कहा कि इस तथ्य से सूचित होने के बाद भी आज तक इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज नहीं किया गया है, जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है | उन्होंने इस संबंध में एसएसपी/डीआईजी सहित सभी पुलिस अफसरों से बात की किन्तु सभी लोग अभी तक जाँच किये जाने की बात कर रहे हैं |

अमिताभ ने कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जाँच की जानी चाहिए थी क्योंकि एफआईआर में विलंब होने पर अभियुक्तगण को इसका निश्चित लाभ मिलेगा , अतः अमिताभ ने डीजीपी से मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्यवाही कराये जाने मांग की है | 

Wednesday, December 16, 2020

गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा: भारत का लक्ष्य भेदन शस्त्र

डॉo तपन पांडा, जो सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में एक प्रबंधन प्राध्यापक हैं और एमपर्सैंड ग्रुप के सलाहकार है , उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि - भारत की संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 4 (एसडीजी 4) को पूरा करने के लिए नए सिरे से ऊर्जा के साथ प्रयास करने की आवश्यकता है। ।

कम से कम अगले दशक तक इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक तंत्र, इन लक्ष्यों को लागू करने और तंत्र को विकसित करने में चुनौतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। भारत जैसे विविध देश में समाधानों को अनुकूल बनाने की आवश्यकता है, जो थोड़े समय के भीतर लागू हो और प्रत्येक नागरिक को आजीवन सीखने के अवसर प्रदान करे।

लिंग भेद , क्षेत्रीय और सामाजिक-आर्थिक समूहों में देखी जाने वाली विषमताओं को दूर करने के साथ उच्च शिक्षा के लिए समान पहुँच सुनिश्चित करना भी एक चुनौती है। उन्होंने कहा, "बड़े पैमाने पर बदलाव के साथ एक अरैखिक हस्तक्षेप ताकि आगामी दशक में मापने योग्य परिणामों के साथ संभव प्रभाव दिखाई दे सके - यह आगे का रास्ता हो सकता है," वे कहते हैं।

बेहतर बुनियादी ढाँचे, जनशक्ति और वितरण तंत्र के गुण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। “अक्सर संसाधन की कमी को चुनौती के रूप में उद्धृत किया जाता है और निजी भागीदारी इस क्षेत्र में कोई नहीं है। इसके अलावा, उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा नॉट-फॉर-प्रॉफिट टैग निजी या विदेशी निवेश को रोकने वाला एक प्रमुख कारण है। इसे बदलने और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को शिक्षा के सभी क्षेत्रों में अनुमति दी जानी चाहिए, ”वे कहते हैं।

एंटरप्राइज़ रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) सॉल्यूशंस, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) और डिलीवरी प्लेटफॉर्म सहित डिजिटल समाधानों ने छात्र-शिक्षक अनुभव के निर्माण में नवाचारों को लाया है। डॉ० पांडा कहते हैं, "डॉ० पांडा कहते हैं, "समय की माँग, इस तरह के समाधानों को बढ़ाने और उनकी पहुँच सभी भारतीय छात्रों के लिए सुलभ बनाने के लिए है।"

उद्योग-4.0 के रूप में नई क्रांति हमारे दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स के अनुप्रयोग और मशीन लर्निंग के उपयोग के साथ नए डिजिटल समाधान प्राकृतिक भाषाओं के प्रसंस्करण, छात्र समूहों के लिए अनुकूली सीखने की रणनीति बनाने और छात्र शिक्षक व्यवहार की भविष्यवाणी करने में वृद्धि कर सकते हैं।

अयोध्या फिल्म समारोह-2020 : डिजिटल प्‍लेटफार्म पर अयोध्‍या में सजेगा 'अवाम का सिनेमा'

* कोरोना वायरस संक्रमण के खतरों के बीच आनलाइन फ‍िल्‍म महोत्‍सव का आयोजन   

* दर्जनों देसी विदेशी फ‍िल्‍में और डाक्‍यूमेंट्री फ‍िल्‍मों का होगा आनलाइन फ्री प्रसारण

कन्नौज की निःशुल्क सरकारी स्वास्थ सेवाओं पर हो रही है अवैध वसूली ,अधिकारियों पर दबाव का माहौल और ट्रांसफर की धमकियाँ

 

सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश के जिला कन्नौज में 102, 108 यूनियन के जिला अध्यक्ष राहुल यादव, प्रदेश संगठन महामंत्री नीतीश कुमार यादव व प्रदेश मीडिया प्रभारी शरद यादव लगातार जिले में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

टीम के द्वारा मनमाने तरीके से ड्यूटी करने व ड्यूटी के समय शराब पीकर गाड़ी चलाने के लिए टीम को उत्साहित करते हैं।

निशुल्क सेवा के नाम पर अवैध वसूली मरीज व मरीज के परिजनों से करते हैं जिससे आकस्मिक सेवाएं प्रभावित होती हैं।

अधिकारियों द्वारा कार्यवाही किए जाने पर उन पर गलत तरह से भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उनका ट्रांसफर करवा देते हैं जिससे निशुल्क सेवाएं सामान्य जनमानस तक पैसा देकर पहुंच रही हैं , जो कि समस्त स्वास्थ्य विभाग के लिए निंदनीय है | जिला प्रशासन इनके आगे मौन है ।

इस तरह के दबंग व्यवहार से यह लोग अपने ईएमटी व पायलट से ₹500 प्रति महीना वसूलते हैं और प्रशासन मौन है। 

बड़ा प्रश्न, आखिर कब सुधरेगा माहौल, कब लगेगी अवैध वसूली पर लगाम ? आखिर क्यों दिया जा रहा है भ्रष्टाचार को बढावा ? ? 

सरकारी सेवा के मुनाफे का खेल



पी•एम• कन्नौज को सुधीर कुमार नामक कर्मचारी द्वारा लिखा पत्र दे रहा है भारी भ्रष्टाचार के संकेत


ई•एम•ई अनुराग मिश्रा के आचरण का विवरण देता कर्मचारियों द्वारा कन्नौज जिले के चिकित्सा अधिकारियों को पत्र

पूरी खबर से रूबरू होने के लिए वीडियो देखें 










यूपी बोर्ड के 10वीं, 12वीं के छात्रों के डेटाबेस लीक पर एफआईआर की मांग

चर्चित आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश बोर्ड के 10वीं तथा 12वीं कक्षा के छात्रों के डेटाबेस के निजी व्यक्ति को लीक होने तथा इसे अन्य व्यक्तियों को सार्वजनिक रूप से बेचे जाने के मामले में एफआईआर दर्ज किये जाने की मांग की है|

एसएसपी कानपुर नगर तथा अन्य को भेजी अपनी शिकायत में अमिताभ ने कहा कि उन्हें दी गयी सूचना के अनुसार थाना रायपुरवा, कानपुर नगर स्थित इंडीस कंपनी के लोगों द्वारा उत्तर प्रदेश के 10वीं तथा 12वीं की परीक्षा के छात्रों का डाटाबेस बेचा जा रहा है| सूचना अनुसार कंपनी द्वारा 1 पिनकोड का डाटाबेस रु० 1000 में, 1 शहर का डेटाबेस रु० 3500 में तथा पूरा डाटाबेस रु० 6500 में बेचा जा रहा हैं. कंपनी के लोगों के अनुसार उनके पास उत्तर प्रदेश में वर्ष 2020 में 10वीं के 3,46,505 तथा 12वीं के 2,27,984 छात्रों के डेटाबेस है|इस डेटाबेस में छात्रों के नाम, पिता का नाम, ईमेल तथा मोबाइल नंबर भी शामिल हैं|

अमिताभ ने कहा कि इस प्रकार 10वीं तथा 12वीं की परीक्षा में बैठे स्टूडेंट्स का डाटाबेस प्राप्त किया जाना प्रथमद्रष्टया आपराधिक कृत्य जान पड़ता है. यह डेटाबेस पूरी तरह संबंधित परीक्षा बोर्ड का स्वत्वाधिकार है तथा बोर्ड की यह जिम्मेदारी है कि उक्त डेटाबेस को सुरक्षित रखें एवं किसी भी स्थिति में इसे अनधिकृत रूप से निजी हाथों में नहीं जाने दें. इस प्रकार इस कंपनी के लोगों द्वारा यह डेटाबेस हासिल करना एक गंभीर आपराधिक कृत्य प्रतीत होता है. साथ ही यह छात्रों के व्यक्तिगत जीवन तथा निजता का उल्लंघन है|

अतः आई.पी.एस. अमिताभ ने मामले में एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्यवाही किये जाने मांग की है|


Friday, December 4, 2020

लखनऊ : विश्व दिव्यांग दिवस के उपलक्ष्य में सौभाग्य फाउंडेशन द्वारा नियोक्ताओं का सम्मान समारोह

विश्व दिव्यांग दिवस (3 दिसम्बर 2020), के अवसर पर सौभाग्य फाउंडेशन, (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना) के त्रिवेणी नगर आवासीय प्रशिक्षण केंद्र में दिव्यांगजनो को रोजगार के अवसर देने वाले नियोक्ताओं को सम्मानित करने के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया गया पिछले 10 दिनों से सौभाग्य फाउंडेशन द्वारा मेगा प्लेसमेंट ड्राइव चलाई जा रही थी, जिस के अंतर्गत विभिन्न नियोक्ताओं ने समस्त उत्तर प्रदेश में 125 से अधिक दिव्यांगजनो को रोजगार प्रदान कर दिया है और 150 से अधिक दिव्यांगजनो का चयन आगे आने वाली रोज़गार के अवसर के लिए निर्धारित किया है।

इस सम्मान समारोह की अतिथि श्री अमित कुमार मिश्रा जी, सीईओ कैंट और लियूटनेंट कर्नल संजीव उनियाल जी है । इस समाराहों में 20 से अधिक नियोक्ताओं को सम्मानित किया गया |

सम्मानित किये गए नियोक्ता 

विशाल मेगा मार्ट, रिलायंस ट्रेंड्स, नोवोटेल होटल, होटल लेमन ट्री, शॉपर्स स्टॉप, एस एस ग्रन्डयूर, जी वी के, स्टार्टक (एजिस बी. पी. ओ.), होटल हिल्टन गार्डन, डायल 112, रैडिसन ब्लू होटल, ऐ के इन्फ्रा, फूडीशेफ ग्रुप ऑफ कम्पनीज, धारा ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड, लार्ड ऑफ दी ड्रिंक्स आदि रहे |

डॉ राजेंद्र प्रसाद के जन्मदिवस को कृषि शिक्षा दिवस के रूप में मनाया गया |

 चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर में 3 दिसंबर 2020 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के जन्मदिवस को कृषि शिक्षा दिवस के रूप में मनाया गया। सर्वप्रथम कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। इस कार्यक्रम में निदेशक शोध डॉक्टर एच जी प्रकाश ने कहा कि हमें कृषि के क्षेत्र में अधिक प्रतिभाशाली छात्रों, सक्षम संकाय और अभिनव शोध कार्यकर्ताओं को कृषि शिक्षा की तरफ आकर्षित करना है। 

कृषि शिक्षा दिवस के अवसर पर देश में अंगीकृत की गई नई शिक्षा नीति 2020 छात्रों एवं किसानों को केंद्रित करके बनाई गई है । जिससे कृषि में उद्यमिता का विकास होगा और रोजगार की अपार संभावनाओं के साथ कृषकों की आय दोगुनी होने में मदद मिलेगी साथ ही कृषि शिक्षा को प्राथमिक स्तर से ही अनिवार्य करना चाहिए। जिससे छात्रों की कृषि शिक्षा और रुचिकर हो। 

 गोवा के 25 प्राथमिक स्कूलों में छात्र कृषि विषय को प्रयोग करके स्वयं सीखते हैं जो कि एक अनूठा उदाहरण है। इस अवसर पर निदेशक प्रसार डॉक्टर धूम सिंह ने कृषि शिक्षा जागरूकता विषय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी कृषि छात्र स्नातक अंतिम वर्ष में इंटर्नशिप करते हैं जिसमें वे प्रशिक्षण, ग्रामीण जागरूकता,उद्योग के अनुभव, अनुसंधान विशेषज्ञता और उद्यमिता कौशल हासिल करने के लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि जैव विविधता,उच्च उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा के प्रति छात्रों को आकर्षित करना है। जिससे वे स्वयं के  उद्यम स्थापित कर  आत्मनिर्भर बन सकें। इस अवसर पर अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉक्टर धर्मराज सिंह ने कृषि शिक्षा के महत्व एवं उपयोगिता विषय पर विस्तार से जानकारी दी।

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