लेखक : प्रताप फौजदार ( लाफ्टर चैलेंज विजेता एवं राष्ट्रीय कवि )
Saturday, January 30, 2021
फौलादी हैं , पंजाब की औलादें
बंगाल में चुनावी दंगल और किसान के मंगल
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- प्रो• गौतम हाल |
(राजनैतिक अस्थिरता, कमजोर विपक्ष क्या भाजपा ही विकल्प)
विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में तरंग गोष्ठी का आयोजन
नई दिल्ली, विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस के साथ अध्ययन एवं अनुसंधान पीठ भारत ने संयुक्त रूप से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय तरंग गोष्ठी का आयोजन किया। इस तरंग गोष्ठी में पूरी दुनिया से 1000 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की। उद्घाटन सत्र के विशेष अतिथि डॉ. महेश चंद शर्मा (पूर्व सांसद) तथा डॉ. रवींद्र कुमार शुक्ला (पूर्व शिक्षा मंत्री) थे। इसी सत्र में विश्व हिंदी सचिवालय के महासचिव प्रो. विनोद कुमार मिश्र ,भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, कुशामाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव भाई शर्मा, एंबेसडर अखिलेश मिश्रा ने अपने मूल्यवान विचार रखे।
इस संगोष्ठी में चार वैचारिक सत्र थे।द्वितीय सत्र "हिंदी मीडिया के वर्तमान सवाल" की अध्यक्षता हितेश शंकर द्वारा की गई। साथ ही प्रो. जी.बी.पांडे, प्रो.अम्बरीश सक्सेना, अरशद फरीदी, डॉ. संजीव भानावत और डॉ. राकेश कुमार दुबे ने भी इस सत्र में अपने विचार साझा किए।
तृतीय सत्र "हिंदी साहित्य और लोक साहित्य जीवन मूल्य और मानवीय चेतना" की अध्यक्षता प्रो.कुमुद शर्मा द्वारा की गई। डॉ. सूर्यप्रसाद दीक्षित, प्रो.शैलेंद्र शर्मा, डॉ. गिरिराज शरण अग्रवाल, प्रो. जे.बी.पांडेय और मॉरिशस से रोहिणी रामरूप ने अपनी वैचारिक भागीदारी दी ।चतुर्थ सत्र "सत्ता के गलियारों की हिंदी और हिंदी के गलियारों की सत्ता" की अध्यक्षता श्री लक्ष्मीनारायण भाला द्वारा की गई। डॉ. सूर्यकांत, प्रो. राजीव कुमार, डॉ. संदीप अवस्थी, प्रो. सुशीम दुबे, प्रो.रमा और डॉ. राकेश कुमार दुबे ने इसमें अपनी भागीदारी दी।
पांचवा सत्र "आधुनिक वैश्विक हिंदी समाज की विसंगतियाँ और समाधान के प्रश्न" की अध्यक्षता डॉ. गिरीश पंकज द्वारा निभाई गई। इस सत्र में डॉ. बालमुकुंद पांडेय, प्रो.जहाँआरा, दक्षिण अफ्रीका से प्रो.लोकेश महाराज तथा डॉ. हीरालाल सेवनाथ, पी.एस. थपलियाल और नीदरलैंड डॉ. पुष्पिता अवस्थी ने भी अपनी भागीदारी की।समापन सत्र 'हिंदी के नवोदित विमर्श :एक विहंगम अवलोकन 'के अध्यक्ष माननीय राज्यपाल श्री केसरीनाथ त्रिपाठी थे। इस सत्र में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के सचिव कुमाररत्नम, माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.के.जी.सुरेश, महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.गिरीश्वर मिश्र, ब्रिटेन के प्रवासी साहित्यकार तेजेंद्र शर्मा, जर्मनी से पूर्व प्रशासनिक अधिकारी कमल ताऊडी, एंबेसडर अखिलेश मिश्रा, हिंदी प्रचारिणी सभा मॉरीशस से धनराज शेम्बो, विश्व हिंदी सचिवालय के महासचिव प्रो.विनोद मिश्र ने अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
इस कार्यक्रम के सफल व महत्वपूर्णआयोजन के लिए उपस्थित विद्वानों और प्रतिभागियों के अतिरिक्त पूरी दुनिया से कार्यक्रम की मुख्य समन्वयक एवं संयोजिका डॉ. माला मिश्र को ढेरों बधाइयाँ मिलीं और भविष्य में निरंतर ऐसे बौद्धिक सार्थक प्रयास आयोजित करते रहने की शुभकामनाएँ भी दर्शकों एवं प्रतिभागियों के द्वारा दी गईं।
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