Tuesday, February 9, 2021

हिंदी साहित्य भारती का वैश्विक अधिवेशन हरिद्वार में,35 से भी अधिक देशों व देशभर के साहित्यकार होंगे शामिल

 विश्व स्तर पर हिंदी भाषा के उत्थान के लिए कार्यरत संस्था हिंदी साहित्य भारती का वैश्विक अधिवेशन मई के प्रथम सप्ताह में हरिद्वार में आयोजित किया जाएगा इसमें 35 से भी अधिक देशों से हिंदी प्रेमी प्रतिनिधि सहित देशभर से साहित्यकार, लेखक व हिंदी सेवी शामिल होंगे। इस सम्मेलन में हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने व देश का बौद्धिक वातावरण बदलने जैसे अनेक विषयों पर चर्चा होगी।

इसी तारतम्य में शुक्रवार को हिंदी साहित्य भारती की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मॉरीशस, पोलैंड,स्वीटजरलैंड, दुबई, तंजानिया, कनाडा आदि देशों के अलावा देश के अनेक स्थानों से साहित्यकार ऑन लाइन शामिल हुए। बैठक को सम्बोधित करते हुए हिंदी साहित्य भारती के अध्यक्ष उत्तरप्रदेश सरकार के पूर्वमंत्री व वरिष्ठ साहित्यकार डा. रवीन्द्र शुक्ला ने कहा की साहित्य भारती का काम दुनिया के 35 से भी अधिक देशों में विस्तार कर चुका है। देश में भी 27 प्रदेशों में हमारी कार्यकारिणी का विधिवत गठन किया जा चुका है साथ ही जिलों जनपदों तक नेटवर्क खड़ा कर लिया गया है। श्री शुक्ल ने कहा की अब विदेशों में जिस  तेजी के साथ कार्य विस्तार हो रहा है उसके लिए यह आवश्यक हो गया है की हिंदी साहित्य भारती की वैदेशिक टीम स्वतंत्र रूप से काम करे। इसके लिए कई लोगों को जिम्मेदारियां दिए जाने की जानकारी भी शुक्ल ने बैठक में दी। उन्होंने बताया की श्री करुणाशंकर उपाध्याय अब अंतरराष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रभारी के रूप में काम देखेंगे इसी क्रम में श्री प्रवीण दुबे को मीडिया का काम दिया गया है।


श्री शुक्ल ने कहा की साहित्य भारती का यह मानना है की बिना  बौद्धिक वातावरण बदले देश का वातावरण नहीं बदला जा सकता इसी उद्देश्य को अंगीकार कर हम आगे बढ़ रहे हैं। समस्त विश्वविद्यालयों ,महाविद्यालयों के प्राध्यापकों का डाटा तैयार करें ,शोध निदेशकों , अनुवादकों समालोचकों को हिन्दी साहित्य भारती से जोड़ें, सब हमारे होंगे तो उद्देश्य की सफलता में आसानी होगी हम  सभी को इसी कार्य में जुटना है।


अपने सम्बोधन में श्री शुक्ल ने कहा की अतीत काल में स्वतंत्रता के पश्चात तमाम ऐसे गैंग बने जिन्होंने षड्यंत्रपूर्वक यह  तय किया की कौन साहित्यकार होगा कौन लेखक पत्रकार होगा राष्ट्रवादी साहित्यकार लेखक कूड़ेदान में डाल दिए गए।आज न तो श्रद्धानंद जी को कोई जानता है न सुब्रमण्यम भारती को ,हमने तय किया है ऐसे महान देशभक्त साहित्यकारों को दुनिया के सामने लाएंगे। हम देश का बौद्धिक वातावरण बदलकर व हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलवाकर ही दम लेंगे। उन्होंने बताया की हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने व हिंदी के उत्थान से जुड़े कई अन्य विषयों को लेकर राष्ट्रपति के नाम पत्रलेखन का अभियान साहित्य भारती ने शुरू किया है। 15 हजार से अधिक पत्र लिखवाने का हमने लक्ष्य लिया है इसमें देशवासियों ने बेहद रुचि दिखाई है। इसे देखते हुए ऐसा लगता है की पत्रलेखन की संख्या लक्ष्य से कहीं ज्यादा होगी हरिद्वार अधिवेशन के समय  देशभर से आये इन पत्रों को लेकर  साहित्यकार व अन्य हिंदीसेवी राष्ट्रपति को सौंपने जाएंगे। 

श्री शुक्ला ने कहा की हम सबके लिए यह गर्व का विषय है की अल्प समय मे ही साहित्य भारती का डंका पूरी दुनिया में बजने लगा है। हम सब एक पवित्र कार्य के लिए लगे हैं अतः ईश्वर हमारी मदद करेगा किसी भी बात की कमी हमे नहीं रहने वाली।

इससे पूर्व  डॉ कविता भट्ट के सरस्वती वंदना और श्री रवीन्द्र शुक्ल द्वारा रचित देश वंदना के साथ बैठक की शुरुआत हुई। मॉरीशस से डॉ विनोद कुमार मिस्र, कनाडा से वैभव वैद्य,दुबई से प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल, पोलैंड से डा.सुधांशु शुक्ल,तंजानिया से डा.डी एन पाठक मारीशस से अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सचिवालय के महासचिव डा.विनोद मिश्रा,

चौधरी चरणसिंह विश्विद्यालय मेरठ से नवीनचंद्र लोहानी,हिंदी अकादमी हरियाणा की पूर्व निदेशक डॉ कुमुद बंसल,केंद्रीय हिंदी संस्थान की गीता शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण दुबे, डा.कविताभट्ट उत्तराखंड, डॉ अनिल शर्मा रुढ़की आदि ने अपनी बात रखी। बैठक में देशभर से तमाम साहित्यकार ऑनलाइन शामिल हुए।

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