Saturday, March 27, 2021

मेरा देश बदल रहा है |

अभिनय सिंह

 






बचपना भुलाकर समझदार बन गए ,

 कर्ज़ देने वाले कर्ज़दार बन गए | 

गाँव में सबकुछ अपना था , 

सिर्फ तुझे संवारने में ए जिंदगी ! 

शहर में आकर किराएदार बन गए।


आजकल एक नारा चला है सरकार का "मेरा देश बदल रहा है"

सरकार की बातों से मैं सहमत हूँ ,

क्योंकि चोर यहाँ चौकीदार बन गए |

लुटेरे ही यह अब हवलदार बन गए  |

जिनको ये पता ही नहीं कि तेरी कीमत क्या है, 

वही आज तेरे सबसे बड़े खरीददार  बन गए ।


आरक्षण की इस आंधी की क्या बात करे दोस्तों !

जो काबिल थे वो आज जॉब ढूंढ़ रहे  हैं , 

जो काबिल न थे वो उसके हकदार बन गए।

आरक्षण ने ज़ुल्म कुछ इस कदर किया कि,

 कुछ पंडित/सवर्ण भी कागज़ में चमार बन गए ।


कला का "क" भी पता नहीं जिन्हें, 

आज वो फरेबी कलाकार बन गए |

अभिनय के नाम पर धब्बा है जो , 

वो सब अभिनेता सुपरस्टार बन गए |



Wednesday, March 24, 2021

शहीदों के सम्मान में चिकित्सकों ने किया रक्तदान शिविर का आयोजन

शहीद दिवस विशेष 

covered by Reporter 

SATVIK SINGH CHOUHAN

कल 23 मार्च 2021 दिन मंगलवार को राष्ट्रीय शहीद दिवस के अवसर पर नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन  के आहवाहन पर सम्पूर्ण भारतवर्ष में वीर शहीदों को श्रद्धांजली देने के लिए रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया |

इसी कड़ी में कानपुर नीमा ने राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय गीता नगर, कानपुर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया कार्यक्रम का उद्घाटन डॉक्टर बृजेश सिंह कटिहार क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी कानपुर नगर द्वारा धन्वंतरी पूजन और दीप प्रज्वलित कर किया | 

कार्यक्रम के संयोजक डॉ अतुल कटियार एवं डॉ एस के आहूजा ने बताया कि करीब 35 लोगों ने रक्तदान के लिए नाम दर्ज कराया सुबह 9:00 बजे से शाम 3:00 बजे तक कार्यक्रम सफल रूप से चला जिस दौरान कुल 35 यूनिट रक्तदान हुआ तथा कई लोग मानक पूरे न होने की वजह से रक्तदान से वंचित रह गए |

गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कालेज के ब्लड बैंक की टीम का रक्तदान सम्पन्न कराने में विशेष योगदान रहा |

देश के लिए अपने रक्त से इस देश की धरती को सींच कर बलिदान देने वाले अमर क्रांतिकारियों की याद में कुछ क्षेत्रीय युवाओं ने पहली बार रक्तदान का अनुभव प्राप्त किया जिनमे से अंबेडकर नगर के इंद्र प्रकाश पाण्डेय , काकादेव के रितिक यादव , डॉ राज बहादुर आदि ने पहली बार रक्तदान किया |  

कार्यक्रम का संचालन डॉ अतुल कुमार कटियार के द्वारा किया गया तो वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ ए के मिश्रा ने की तथा सचिव - डॉ आर के गुप्ता , वरिष्ठ सदस्य डॉ वी के दुबे , डॉ एस के आहूजा आदि चिकित्सक उपस्थित रहे तो वहीं महिला मंच की अध्यक्ष डॉ नीरजा दुबे , डॉ प्रतिमा गुप्ता भी उपस्थित रहीं |



Tuesday, March 23, 2021

काकदेव पुलिस का कमाल : घर से बिछड़ी बच्ची को आधी रात सुरक्षित पहुँचाया परिजनो के पास

कल शाम 5:00 बजे के करीब काली मठिया मंदिर शास्त्री नगर के पास एक 11 साल की बच्ची लावारिश हालत में मिली , बच्ची अपने घर का पता नहीं बता पा रही थी , पुलिस द्वारा बार बार काउन्सलिन्ग के प्रयासों के बाद बच्ची सिर्फ इतनी जानकारी दे पा रही थी कि वह ॐ पब्लिक स्कूल में पढ़ती है |


जिसके आधार पर रात में ही ॐ पब्लिक स्कूल जा कर अभिलेख निकलवा कर इस बात कि पुष्टि हुई कि बच्ची उस ही विद्यालय में पढ़ने वाली छात्रा है , थाना काकादेव पुलिस के अथक प्रयासों से अभिलेखों के आधार से बच्ची को सकुशल उसके परिजनों के पास पहुंचाया गया | 

Tuesday, March 16, 2021

बाल शिक्षा को संवारती आगरा की अनंत वेलफ़ेयर सोसाइटी

अनंत वेलफेयर सोसाइटी एक प्रयास है गरीब असहाय, अशिक्षित एवं आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का , यहाँ बिना किसी भेद भाव ऊंच नीच अथवा अन्य किसी असमानता का आकलन किए हर वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा के दरवाजे खुले हैं  |

यह संस्था उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में सक्रिय है , समाज के अंतिम पायदान पर खड़े आगरा के क्षेत्रीय इलाकों के वो बच्चे यहाँ शिक्षा पा रहे हैं जिनके पापा रिक्शा चलाते हैं तो मम्मी कपड़े धोती हैं | आर्थिक रूप से अक्षम उन परिवार के बच्चे जो अक्सर हमारे समाज में आपको किसी नुक्कड़ चौराहे पर भीख मांगते दिख जाएँगे या फिर स्वाभिमान के साथ काम करते हुए किसी चाय की दुकान अथवा होटल में छोटू के रूप में बाल मजदूरी को बढ़ावा देते हुए ठीक ऐसे ही बच्चों को शैक्षिक सहारा दे रही है अनंत वेल फेयर सोसाइटी |

यह संस्था न सिर्फ बच्चों को साक्षर बनाती है बल्कि अधिक दिलचस्पी और लगन से पढ़ने और विषयों को सीखने की समझ रखने वाले बच्चों की उच्चय शिक्षा का भी पूरा प्रबंध करने के लिए उन्हें आगरा के बेहतरीन स्कूलों में दाखिल दिलवाती है जिसकी मासिक स्कूल फीस आदि का पूरा खर्च संस्था स्वयं वहन करती है |   

आज इस संस्था के पढ़ाए तमाम बच्चे तथाकथित बड़े स्कूलों में 90% से अधिक अंक ला कर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं |

जो काम प्राथमिक सरकारी विद्यालयों का है, उस काम को अ-सरकारी तथा असरकारी तरह से निभा रहा है आगरा का यह संस्थान   

सितंबर 2017 में रजिस्टर्ड 7 सदस्यों की इस सोसाइटी की न सिर्फ कल्पना करने वाली बल्कि इसको नए आयाम देने वाली निधि गिल आगरा कि निवासी हैं | उन्होंने विशेष बात चीत में हमें बताया कि भारत सरकार के नीति दर्पण मे पंजीकृत इस संस्था का नाम मैंने अपने पिता अनंत गिल के नाम पर रक्खा और अनंत चौदस पर उनका जन्म हुआ जिसके कारण उनका नाम अनंत पड़ा, मुख्यता शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय इस सोसाइटी कि संकल्पना का आधार मेरे निजी जीवन से जुड़ा है, मैं समाज के लिए कुछ करना चाहती थी और भावी पीढ़ी को शैक्षणिक मजबूती देने से बेहतर सेवा मेरे माध्यम से भला क्या हो सकती थी इसलिए यह मार्ग चुना जिसमें मुझे पूरा पारिवारिक सहयोग प्राप्त है लेकिन इसकी शुरुवात दिल्ली में हुई थी जब मैंने 4 बच्चों को अपनी खुशी के लिए पढ़ाना शुरू किया था, फिर दिल्ली से आगरा लौट कर इस काम को व्यवस्थित तौर पर संस्था का रूप देते हुए प्रारम्भ किया , इस कार्य में अभी तक की यात्रा मे किसी तरह का सरकारी सहयोग नहीं लिया गया है | बाधाएँ तमाम आई और आती रहेंगी लेकिन अब तक संस्थान के कार्यों में किसी तरह कि रुकावटें नहीं आई हैं , समाज और मित्रों का सहयोग निरंतर मिलता रहा है फिर वो चाहें आर्थिक हो या मानसिक |

निधि ने बताया कि वो प्रतिदिन 70 से अधिक बच्चों को उनकी योग्यता के आधार पर 3 बैच में विभाजित कर पढ़ा रही हैं जिसमें लड़कियों की संख्या अधिक रहती है जिनमे कुछ शारीरिक रूप से अक्षम बच्चे भी शामिल हैं | 

बच्चों के सृजनात्मक एवं रचनात्म्क विकास के लिए हर शनिवार आर्ट क्लासेस होती हैं  जिसमें बच्चे अपने मन के भावों को कागज़ पर पेंटिंग के माध्यम से उकेरते हैं तथा उन्हें रंग बिरंगे रंगों के माध्यम से सँजोते हैं |


इसके अलावा भी होली , दिवाली , दशहरा , क्रिसमस हो या बाल दिवस , स्वतन्त्रता दिवस हो या गणतंत्र दिवस बच्चों के लिए हर कार्यक्रम का जश्न एक उत्सव की तरह मनाया जाता है जिसका पूरा खर्च जनसहयोग के माध्यम से पूर्ण होता है | 


बचपन से ही समाज के दर्द को महसूस करने वाली निधि गिल ने विज्ञान से स्नातक करने के बाद पढ़ाई भी समाज से गहराईयों से जुड़े विषय कानून और पत्रकारिता की पाई ,  इस एन.जी.ओ. की संचालिका निधि पेशे से पत्रकार रही हैं जिन्होंने जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ जर्नलिज़्म, दिल्ली से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद 3 साल दैनिक राष्ट्रीय पत्र अमर उजाला में शिक्षा को कवर किया तथा कुछ समय आकाशवाणी में भी अपनी सेवाएँ दी |

वर्तमान मे निधि सामाजिक कार्यों के अलावा निजी जीवन में जीवन यापन के लिए आगरा में होम ट्यूशन लेती हैं , अनंत वेलफ़ेयर सोसाइटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के अलावा उनका सपना है कि वो आगामी समय में संयुक्त रूप से एक अनाथालय तथा प्राइमरी स्तर का एक ऐसा विद्यालय खोल सकें जो शिक्षा के बाजारीकरण से दूर हो, जहाँ बड़ी संख्या में शिक्षा से वंचित बच्चे न्यूनतम शुल्क में शिक्षा पा सकें | 


अनंत वेलफेयर सोसाइटी से जुड़ी अन्य जानकारियों के लिए क्लिक करें | 




Sunday, March 14, 2021

जुमले की झंकार

अनिल कुमार मंडल  

म तो भैया विकट लुटे हैं,जुमले की झंकार में।

इससे तो बेहतर थे भाई, हम पिछ्ली सरकार में।

हम तो भैया विकट लुटे हैं,जुमले की झंकार में।

निर्दय होकर काट रहे हैं, धार नहीं हैं कटार में।

इससे तो बेहतर थे भाई, हम पिछ्ली सरकार में।

रोटी, पानी, दवा भी महंगी,सांस न मिले उधार में।

हम तो भैया विकट लुटे हैं,जुमले की झंकार में।

नौकरी छुटी,बीबी रूठी,जीवन हैं मंझधार में।

इससे तो बेहतर थे भाई, हम पिछ्ली सरकार में।


 चालक देश के बदल रहे हैं,कमी हैं जबकि कार में।

हम तो भैया विकट लुटे हैं,जुमले की झंकार में।

चंगु, मंगू दोनों एक हैं, समझे ये विस्तार में।

इससे तो बेहतर थे भाई, हम पिछ्ली सरकार में।

जरदारी हो या हो मुफलिस, कौन बचा संसार में।

हम तो भैया विकट लुटे हैं,जुमले की झंकार में।

जीने की जहाँ होड़ लगी हैं, हम भी खड़े कतार में।

इससे तो बेहतर थे भाई, हम पिछ्ली सरकार में।

                                    

                               

यूट्यूबर के साथ काम करें या कॉर्पोरेट मीडिया के साथ ?

विनीत कुमार 
आपके मोबाईल या कम्प्यूटर स्क्रीन पर जो यूट्यूबर वन मैन शो वाली पत्रकारिता करते नज़र आते हैं, उन्होंने कैमरा, प्रोडक्शन, एडिंटग एवं रिसर्च जैसे काम के लिए इन्टर्न या सीखने के नाम पर कम पैसे में मीडिया के छात्रों को अवसर देना शुरू कर दिया है. इसका मतलब है कि छोटी ही सही, अब वो अपनी एक टीम बना चुके हैं. बहुत संभव है कि यह टीम आगे चलकर एक मीडिया संस्थान के तौर पर विकसित हो जैसा कि निजी समाचार चैनलों के शुरूआती दौर में आजतक, एनडीटीवी, जी न्यूज़, आगे चलकर तहलका और दि वायर जैसे संस्थानों का विस्तार हुआ.

मेरे पास इस संबंध में फोन आने लगे हैं कि यदि हमें एक तरफ फलां यूट्यूबर मीडियाकर्मी के साथ काम करने का मौक़ा मिल रहा है और दूसरी तरफ कॉर्पोरेट मीडिया की तरफ से ऑफर है, ऐसे में हमें क्या करना चाहिए, आप सुझाव दें ? यह जानकारी देते हुए वो साथ में जोड़ना नहीं भूलते कि कॉर्पोरेट मीडिया में पैसे तो मिल जाएंगे लेकिन जो हाल है, वहां हम पत्रकारिता के नाम पर क्या करेंगे, ये तो आपको भी पता ही है.

यह तो हम अपनी आंखों के सामने देख ही रहे हैं कि जैसे-जैसे समय बीत रहा है, कॉर्पोरेट मीडिया जिसे कि मुख्यधारा मीडिया मानकर देखा-समझा जाता रहा है, पत्रकारिता की गुंजाईश तेजी से ख़त्म होती जा रही है. ऐसे दौर में जबकि मीडिया पूरी तरह दो हिस्सों में बंट चुका हो और दोनों तरफ से अतिरेक दिखाई देते हों, आगे चलकर नागरिकों के सवाल के नाम पर अहं, निजी हित और अपनी बात मनवाने का आग्रह और जोर मारता रहेगा. हालत यह है कि एक बड़ी आबादी है जो रोज़ाना टीवी चैनल देखे या अख़बार पढ़े बिना राय बना चुकी है कि कौन क्या बोलेंगे, कौन क्या लिखेगा और छापेगा ? जिन रिपोर्ट, लेख और कार्यक्रमों को तैयार करने में घंटों लग जाते हों, उन्हें लेकर एक पूर्वग्रह तैयार है, ये पत्रकारिता के लिए बेहद ख़तरनाक स्थिति है. ऐसे में यूट्यूबर अपने स्तर पर जो कुछ भी कर रहे हैं और उन्हें तारीफ़ मिल रही है तो मीडिया के छात्रों के भीतर उनके साथ जुड़ने का आग्रह स्वाभाविक है.

मैं पिछले दस साल से देश के अलग-अलग मीडिया संस्थानों के सैकड़ों मीडिया छात्रों के संपर्क में रहता आया हूं और मेरा अनुभव यह कहता है कि मीडिया के छात्र या नए मीडियाकर्मी दिमाग़ी तौर पर दो खांचे में बंटे होते हैं- एक जिन्हें जल्दी-जल्दी फ्लैट, गाड़ी, सुविधाएं, परिवार, बच्चे...चाहिए और दूसरे जिन्हें ये सब तो चाहिए लेकिन उससे पहले उनके उपर सरोकार, समाज, देशहित, बदलाव आदि की एक परत भी चाहिए. वो परत समाज में यह भरोसा बनाए रखे कि गणेश शंकर विद्यार्थी के वंशज अभी बचे हुए हैं. पहले खांचे के लोग कहीं ज़्यादा स्पष्ट और सपाट होते हैं. उनके लिए मीडिया एक पेशा है, रोज़गार है और जिससे उन्हें सामाजिक और आर्थिक हैसियत दुरूस्त करनी है.

दूसरे खांचे के छात्र-नए मीडियाकर्मी थोड़े कन्फ्यूज्ड रहते हैं. उन्हें भी वो सबकुछ चाहिए जिनकी आलोचना करते हुए उनकी ट्रेनिंग हुई. वो न भी चाहें तो सामाजिक ढांचा है कि देर-सबेर ऐसा सोचने के लिए धकेल दिया जाएगा लेकिन उनकी हसरत इस बात की बराबर बनी रहती है कि पहले उन्हें पत्रकार समझा जाय, सरोकारी माना जाय और उसके भीतर से एक ऐसा अर्थतंत्र बने कि हमारी वो सारी ज़रूरतें और सपने पूरे हों जो पहले खांचे के लोग तेजी से हासिल कर ले रहे हैं. ऐसा सोचने और करने में कोई बुराई नहीं है. जो इंसान पेट और दिमाग़ की ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकता, बहुत संभव है कि अपनी तमाम बौद्धिकता और प्रतिभा के बावज़ूद कुंठा या हताशा का शिकार हो जाए. ये सब अंतहीन बातें हैं..

फिलहाल ये कि हमलोग जो आए दिन कॉर्पोरेट मीडिया की कारगुज़ारियों पर लगातार लिखते रहते हैं, नए मीडियाकर्मी या छात्र को करिअर का फैसला उसके हिसाब से नहीं लेना चाहिए. मीडिया संस्थानों से प्रकाशित-प्रसारित सामग्री और मीडियाकर्मियों के साथ व्यवहार अलग चीज़ें हो सकती हैं. ये बहुत संभव है कि जो चैनल दिन-रात जहर उगल रहा हो वो अपने मीडियाकर्मियों को समय पर सैलरी और बाकी सुविधाएं मुहैया करा रहा हो और जो दिन-रात सरोकार की बात करता नज़र आता हो, पत्रकारिता की आड़ में अपने मीडियाकर्मियों का हक़ मारने और निचोड़ने में लगा हो. आप सोशल मीडिया पर लोगों के लिखे पर ग़ौर करेंगे तो हर दूसरा-तीसरा व्यक्ति अंबानी समूह और उसके उत्पाद को कोसता नज़र आएगा लेकिन बात काम करने पर विचार करने की हो तो उसे प्राथमिकी तौर पर महत्व देगा. ऐसा इसलिए कि एक चैनल जो चिट-फंट के धंधे में है, उसके मुक़ाबले वेतन, सुविधा और सुरक्षा की गारंटी यहां ज़्यादा है या हो सकती है. ऐसा कहने का मतलब इनके प्रतिरोध में लिखने से असहमत होना नहीं है, पाठक और मीडियाकर्मी के स्तर पर अलग-अलग ढंग से, अलग-अलग स्थितियों को ध्यान में रखकर सोचने से है. यूट्यूबर के मामले में आप इसी तरह से सोच सकते हैं.

एक पाठक, दर्शक के तौर पर आपको इन यूट्यूबर का काम बहुत पसंद आता है, आपको लगता है कि सच्ची पत्रकारिता ये लोग ही कर रहे हैं. आप इनके साथ रहेंगे तो बहुत कुछ सीखेंगे, इसके बदले में भले ही आपको किसी तरह का आर्थिक सहयोग न मिल रहा हो या कम मिल रहा हो. लेकिन यहां पर आपको एक बात गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है और वो यह कि इन्हें लेकर पत्रकारिता के जो जज़्बात पैदा हो रहे हैं, वो सुरक्षित रह पाएगा ? वो यूट्यूब कंटेंट के अलावा अपने व्यवहार में इतने उदार, लोकतांत्रिक और खुले दिल के हैं कि आपको आगे जाने के भरपूर मौक़ा दें ? मैं ऐसे चमकीले यूट्यूबर मीडियाकर्मी की वीडियो से जब भी गुज़रता हूं, इस बात पर ख़ासतौर पर ग़ौर करता हूं कि वो शुरू में या आख़िर में किस-किसको क्रेडिट देते हैं, किसके काम की चर्चा करते हैं ?

मेरी अपनी समझ है कि एक दर्शक-पाठक के तौर पर ये यूट्यूबर मीडियाकर्मी हमारी ज़रूरतें पूरी कर रहे हैं, इस लिहाज़ से इनके प्रति हमारे मन में गहरा सम्मान है. इनका ये हौसला बरक़रार रहे. लेकिन यही बात मैं इनके साथ जुड़कर काम करने के संदर्भ में नहीं सोच सकता. वो इसलिए कि जब भी कारोबारी मीडिया का मुक़्कमल इतिहास लिखा जाएगा, ये सबके सब उसी कटघरे में शामिल होंगे जिसकी शिकायत आज वो कर रहे हैं. आप शायद भूल गए होंगे, मैं यह बात कभी नहीं भूल सकता कि सौ करोड़ की कथित दलाली मामले में जी न्यूज के संपादक की गिरफ़्तारी होने पर तब इसी एक यूट्यूबर मीडियाकर्मी ने जो तब इस चैनल का फ्लैगशिप कार्यक्रम पेश किया करते, कहा- ये भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में काला दिन है, ये आपातकाल है पता नहीं आगे क्या स्थिति बनी कि चैनल से अलग हो गए. क्या उन्हें पता नहीं था कि आपातकाल का मतलब क्या होता है और संपादक पर किस बात का आरोप है ? आप ग़ौर करेंगे तो एक-एक करके सबके साथ एक लंबी फ़ेहरिस्त आपको जुड़ी मिलेगी जिसमें कि बचाव और पर्दा डालने का काम लोकतंत्र के नाम पर होता रहा जबकि उसके पीछे एक स्पष्ट व्यावसायिक कारोबारी हित था. इस मामले में मेरी समझ बिल्कुल साफ है कि नए माध्यम के तौर पर यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म का चयन कुछ कर गुज़रने से कहीं ज़्यादा नए व्यावसायिक मॉडल की खोज है.

शागिर्दी बेहद ख़ूबसूरत चीज़ है. शास्त्रीय संगीत और दूसरी कलाओं में अभी भी सीखने-समझने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि किसी उस्ताद के साथ हो लो. वो जो आपको सिखा-बता जाएंगे, उसके आगे संस्थान की पढ़ाई बहुत पीछे हैं..लेकिन मीडियाकर्मियों के चमकीले चेहरे को देखकर शागिर्द होने से पहले इस सिरे से विचार करना उतना ही ज़रूरी है कि जिस लोकतंत्र और आज़ाद ख़्याल की बात वो स्क्रीन पर किया करते हैं, वो उसे बर्दाश्त भी कर पाते हैं ?

बिना लागलपेट के आप मुझसे पूछेंगे तो मैं यदि आपकी जगह रहूं और मेरे सामने जी न्यूज, इंडिया टीवी, आजतक में काम करने का अवसर हो और यूट्यूबर के साथ जुड़कर सरोकारी पत्रकारिता करने का ऑफर तो मैं बिना हिचक के जी न्यूज, इंडिया टीवी या आजतक से जुड़ना पसंद करूंगा. यह जानते हुए कि यहां पत्रकारिता नहीं होती लेकिन वहां इस बात की दुविधा भी नहीं होगी कि हम पत्रकारिता कर रहे हैं या फिर जन सरोकार. एक मीडिया छात्र या नए मीडियाकर्मी के तौर पर मैं तब भी इन संस्थानों में बहुत कुछ ऐसा सीख पाऊंगा जो यूट्यूबर के साथ जुड़कर संभव नहीं. मुझे इस बात का यकीं ही नहीं होगा कि ये हमें संभावनाओं से भरा एक मीडियाकर्मी के तौर पर हमें देखना बर्दाश्त कर पाएंगे. सलाह देने की स्थिति में तो मैं कभी नहीं होता लेकिन हां

यह ज़रूर है कि यूट्यूबर जो अनुभव लेकर कारोबारी मीडिया से अलग होकर नया व्यावसायिक मॉडल खोज रहे हैं, नए मीडियाकर्मी पहले कारोबारी मीडिया के अनुभव से गुज़रते हैं तो आगे उनके भीतर कम से कम दुविधा होगी. चीज़ों से एकदम मोहभंग हो जाना और वो भी बिना अनुभव के ही, अच्छी स्थिति नहीं होती. आख़िर वो भी आज यूट्यूब के ज़रिए पत्रकारिता इसलिए कर पा रहे हैं कि कॉर्पोरेट मीडिया में सालोंसाल काम करते हुए आर्थिक-सामाजिक मोर्चे पर एक सुरक्षित ढांचा खड़ा कर लिया है. वो इस काम में असफल भी होते हैं तो जीविकोपार्जन के स्तर पर कोई संकट नहीं होगा जबकि एक नए मीडियाकर्मी के लिए तो कमरे के किराये से लेकर ढाबे का खाना, कपड़े, राह खर्च सब इसी पत्रकारिता से जुटाने होंगे.



(साभार विनीत कुमार की फेसबुक वाल से)

डॉ राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में अमृत महोत्सव संगोष्ठी का हुआ सफल आयोजन

डॉ राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय के तत्वाधान में आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर "आजादी का अमृत महोत्सव" बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर "राष्ट्रधर्म एवं राष्ट्रवाद" विषय पर विशेष संगोष्ठी का बहुत ही सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एस. के. भटनागर की अध्यक्षता में संपन्न हुआ । 

इस अवसर पर डॉ. ए. पी. सिंह, डॉ. अलका सिंह, डॉ. कुलवंत सिंह, डॉ. वैदुर्य जैन, डॉ. सुमेधा द्विवेदी, सुश्रीभव्या अरोड़ा, सुश्री शिवांगी तिवारी, सुश्री स्वर्णा यति, आदि ने अपने विचार व्यक्त किए । 

कुलपति महोदय प्रोफेसर एस. के. भटनागर  ने संविधान के प्रस्तावना की चर्चा करते हुए उसके महत्व पर प्रकाश डाला एवं राष्ट्र धर्म को संविधान धर्म के समकक्ष रखते हुए संविधान पालन के महत्त्व पर जोर दिया। प्रोफेसर ए. पी. सिंह  ने राष्ट्रधर्म एवं राष्ट्रवाद के गुण बिंदुओं पर चर्चा की। इस कार्यक्रम का संचालन मिलिंद राज आनंद ने सफलतापूर्वक किया। उन्होने देश में मनाए जा रहे आज़ादी की ७५ वें वर्षगांठ के परिपेक्ष्य में अमृत महोत्सव पर राष्ट्रवाद की भावना के गौरवशाली इतिहास पर भी चर्चा की। यह कार्यक्रम डॉ. अलका सिंह , शिक्षक, डॉ राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्व विद्यालय लखनऊ के निर्देशन में सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। उन्होंने सभी का आभार व्यक्त करते हुए

 नागरिक  कर्तव्यो के विषय  पर  समसामयिक कविता का पाठ भी किया। कुलसचिव, श्री अनिल मिश्रा  ने सभी आगंतुकों को अमृत महोत्सव की शुभ कामनाएं एवं बधाई दी |

जिंदगी के मायने

कवि सुरेश साहनी 
कविता जगत में अपनी सरल एवं प्रभावी कविताओं के माध्यम से कमाल करने वाले कानपुर के सुरेश साहनी जी बेहद सृजनशील व्यक्तित्व के धनी होने के साथ ही सौम्यता के प्रतीक हैं | उनकी रचनाएँ जितनी सरल और मन को संतुष्टि देने वाली होती हैं उतनी ही गहरी भी होती हैं |



कब न थे कब थे हमारी ज़िन्दगी के मायने।
आप कब समझे हमारी किस खुशी के मायने।।

मेरे जीते जी न समझा जो हमारे दर्द को
क्या समझता फिर हमारी खुदकुशी के मायने।।

हुस्न वालों को पता है हुस्न की रांनाईयाँ
इश्क़ वाले जानते हैं आशिक़ी के मायने।।












जिस ख़ुदा की राह में मरता रहा है आदमी
क्या पता है उस ख़ुदा को बन्दगी के मायने।।

हम से बेपर्दा हुआ जो क़ुर्बतों के नाम पर
वो हमें समझा रहा है पर्दगी के मायने।।

जो चरागों को बुझाने में हवा के साथ थे
क्या  बतायेंगे हमें वो रोशनी के मायने।।

कितनी दरियाओं का पानी पी रहा है रात दिन
इक समन्दर को पता है तिश्नगी के मायने।।

चुप रहो

कवि सुरेश साहनी 

कविता जगत में अपनी सरल एवं प्रभावी कविताओं के माध्यम से कमाल करने वाले कानपुर के सुरेश साहनी जी बेहद सृजनशील व्यक्तित्व के धनी होने के साथ ही सौम्यता के प्रतीक हैं |  उनकी रचनाएँ जितनी सरल और मन को संतुष्टि देने वाली होती हैं उतनी ही गहरी भी होती हैं |


चुप रहो प्यार होने तलक चुप रहो।
पीर उपचार  होने तलक चुप रहो ।।

थरथराये अधर  मुंद गये फिर नयन
गात कम्पित हुए कह गयी क्या छुवन

पूर्ण अभिसार होने तलक चुप रहो।।
चुप रहो प्यार होने तलक चुप रहो।।

जब से लगने लगा प्यार है ज़िन्दगी
प्यार से मृत्यु के पार है ज़िन्दगी

ज़िन्दगी पार होने तलक चुप रहो।। 
चुप रहो प्यार होने तलक चुप रहो।।

तुम निहारो हमे हम निहारे तुम्हें
खो के इक दूसरे में पुकारे तुम्हें

मौन उदगार होने तलक चुप रहो।।
चुप रहो प्यार होने तलक चुप रहो।।

प्यार क्या है कोई मौसमी फल नहीं
प्यार की राह इतनी सरल भी नही

राह गुलजार होने तलक चुप रहो।।
चुप रहो प्यार होने तलक चुप रहो।।

नाद अनहद सुनें होश भी ना रहे
पूर्ण आनन्द हो जोश भी ना रहे

एक आकार होने तलक चुप रहो।।
चुप रहो प्यार होने तलक चुप रहो।।

प्रेम है राधिका प्रेम यदुनन्द है
प्रेम ब्रज में बसा सत चिदानंद है

रास गुंजार होने तलक चुप रहो।।
चुप रहो प्यार होने तलक चुप रहो।।

मौन अभ्यर्थना है स्वयम ब्रम्ह की सोहम खण्डना द्वेष की दम्भ की
हाँ अहम क्षार होने तलक चुप रहो।।
चुप रहो प्यार होने तलक चुप रहो।।

मौन  शिव सत्य सुन्दर की अनुभति है
शब्द के ब्रम्ह होने की प्रतिभूति है
अर्ध्य स्वीकार होने तलक चुप रहो।।
 चुप रहो प्यार होने तलक चुप रहो।।

मूल आधार से दल सहस्त्रार तक
दल सहस्त्रार से ब्रम्ह के द्वार तक
जय गुणाकार होने तलक चुप रहो।।

चुप रहो प्यार होने तलक चुप रहो।।

देह ही घाट है देह ही नाव है
देह से पार ही मुक्ति का ठाँव है
देह पतवार होने तलक चुप रहो।।

  

Tuesday, March 9, 2021

नारी रत्न सम्मान से सम्मानित हुईं प्रो .माला मिश्र

नारी जागृति युवा मंडल के द्वारा अदिति महाविद्यालय ,दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर माला मिश्र को 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर समाज एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 'नारी रत्न सम्मान 'से विभूषित किया गया।

प्रो .माला मिश्र लगभग तीन दशकों से लेखन ,काव्य सृजन ,अध्ययन ,प्राध्यापन ,शोध कार्य , पत्रकारिता , लघु नाटिकाओं के पटकथा लेखन एवं निर्देशन ,सामाजिक सर्वेक्षण एवं नाना विध सामाजिक विकास कार्यों से जुड़ी रही हैं।सशक्त समाज एवं उन्नत राष्ट्र निर्माण में अपनी वैचारिकी और कर्मठ प्रयासों से उन्होंने एक विशिष्ट पहचान बनाई है।प्रो .माला मिश्र एक प्रसिद्ध साहित्यकार ,उत्कृष्ट पत्रकार और समर्पित हिंदी सेवी रही हैं। समाज और शिक्षा  विशेष रूप से स्त्री शिक्षा और सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके सतत प्रयासों के लिए उन्हें नारी रत्न सम्मान प्रदान किया गया है।इससे पूर्व भी उन्हें अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।

Monday, March 1, 2021

प्रतिमा अनावरण समारोह के माध्यम से स्व• मंगली प्रसाद जी गुप्त को किया गया याद

यूपी बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त श्री ओमर वैश्य शिक्षायतन इंटर कॉलेज, गणेश नगर रावतपुर कानपुर जो कि शहर का प्रतिष्ठित और सम्मानित शिक्षण संस्थान है, जो कि ओमर वैश्य विद्यालय कमेटी द्वारा संचालित किया जाता है |

इस विद्यालय की सम्पूर्ण भूमि के दानदाता स्व• मंगली प्रसाद जी गुप्त थे, जिनकी विशाल प्रतिमा का अनावरण कल 28 फरवरी 2021, दिन रविवार की सुबह बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ किया गया | मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती नीलिमा कटियार (उच्च शिक्षा राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश शासन) तथा श्री सुरेन्द्र मैथानी (विधायक - गोविंद नगर विधान सभा) रहे |


इस मौके पर प्रधानाचार्य महोदय तथा समस्त शिक्षकगण के रूप में समूचा विद्यालय परिवार मौजूद रहा |

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