Wednesday, April 28, 2021

क्या सरकारी स्कूलों में शिक्षा देने के लिए शिक्षकों का सरकारी कर्मचारी होना ज़रूरी है |

रुस्तम केरावाला (अध्यक्ष - अम्परसंड ग्रुप)

भारत में शिक्षकों के रिक्त पदों का मामला कई वर्षों से अधर में लटका हुआ है। वर्ष 2018-19 का उदाहरण लें,जिसमें शिक्षकों के अनुमोदित पदों के मुकाबले 11.7% पद रिक्त थे। राज्य स्तर पर पूर्व-प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार की गई और शालेय शिक्षा के लिए शुरू की गई समेकित योजना ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के तहत शिक्षकों के 17,64,956 पदों में से 19.1% पद रिक्त ही रहे और शिक्षकों के राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में 8.8% पद रिक्त ही रहे। इसी दौरान बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे पूर्वी राज्यों में अनुमोदित किए गए पदों में से 30% खाली ही रहे। राज्य दर राज्य इसके कारण अलग-अलग रहे हों, लेकिन राज्य की आर्थिक स्थिति को इसके लिए निर्णायक कारक माना गया।

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भारत में ज़्यादातर सरकारद्वारा संचालित या सरकार द्वारा अनुदान प्राप्त स्कूल दूर-दराज़ और भौगोलिक रूप से दूरस्थ स्थानों में सामाजिक-आर्थिक रूप से सुविधाहीन परिवारों और पिछड़े समुदायों के बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। यूनिफ़ाइड डिस्ट्रिक्ट इनफ़ॉर्मेशन सिस्टम फ़ॉर एज्युकेशन-प्लस (U-DISE+)-2018-19 (Provisional) के डेटा के अनुसार सरकार द्वारा संचालित 10,83,678 स्कूल और सरकार द्वारा अनुदान प्राप्त 84,614 स्कूल थे।

सामान्य रूप से, अनुबंधित शिक्षकों को नियुक्त किया जाता है फिर उन्हें सुविधाहीन क्षेत्रों में भेजा जाता है और उन स्कूलों में भेजा जाता है जहाँ विद्यार्थियों की संख्या बहुत होती है और अभिभावक भी कमज़ोर वर्ग के होते हैं। इसी तरह, शहरी इलाकों में भी ऐसा ही होता है। शिक्षकों को आर्थिक रूप से कमज़ोर ऐसे परिवारों के विद्यार्थियों वाली स्कूलों में नियुक्त किया जाता है जो हाल ही में स्थानांतरित होकर शहर में आए हैं। U-DISE+ के डेटा के आधार पर अनुबंध वाले शिक्षकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। 2010-11 में यह संख्या प्राथमिक स्तर पर 3,16,091 थी जो 2017-18 में बढ़कर प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर 6,32,316 हो गई। बहस का मुद्दा फिर भी बरकरार रहता है कि आखिर हम यह कैसे उम्मीद करें कि सुविधाओं और उपकरणों की सुविधाओं के बिना ये शिक्षक सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से कैसे निपटेंगे?

बेशक, आज भारत में शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थी का प्रशिक्षण चिंता का मुख्य विषय बना हुआ है। हालाँकि अपने यहाँ अनुबंधित शिक्षकों की नियुक्ति की कोई स्पष्ट नीति नहीं है, लेकिन यह परंपरा ज़रूर अपनाई गई है कि शिक्षकों की संख्या इतनी रखी जाए कि शिक्षा हासिल करने के तरीकों में सुधार लाए जाएँ। यह तरीका आर्थिक रूप से मुनासिब हो सकता और कुछ मामलों में यह शैक्षणिक अभिगमन के विस्तार को आगे बढ़ाता है। 

शिक्षकों पर किए गए अध्ययन बताते हैं कि कोर्ट के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया को फ़ास्ट-ट्रैक पर लाने के प्रयासों में कमी और सामान्य उदासीनता जैसे राज्यों से विशेष रूप से जुड़े मुख्य कारणों की पहचान की गई, जो राज्य सरकार द्वारा अनुबंध शिक्षकों को नियुक्त करने के लिए होते हैं। 

सभी राज्य अक्सर यह तर्क देते हैं कि अगर भविष्य में केंद्र सरकार कभी समग्र शिक्षा अभियान को बंद करने का फ़ैसला करती है, तो इस कार्यक्रम में भर्ती किए गए शिक्षकों के वेतन का बोझ उन्हें उठाना होगा। हो सकता है कि ऐसी परिस्थिति को टालने के लिए राज्यसमग्र शिक्षा अभियानराशि के माध्यम से अनुबंधित शिक्षकों को नियुक्त करने को तरजीह दें।  

इसके अलावा, विभिन्न विषयों के शिक्षकों की अनुपलब्धता से जुड़ी चुनौतियाँ भी हैं। कई राज्यों में गणित, विज्ञान और अंग्रेज़ी जैसे विषयों के शिक्षकों की बड़े पैमाने पर कमी है। इस वजह से, ग्रामीण, दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में स्थित कुछ स्कूल उच्च माध्यमिक स्तर पर विज्ञान और गणित जैसे विषय पढ़ाते ही नहीं हैं। सच तो यह है कि U-DISE+ 2017-18 डेटा के अनुसार कुछ राज्यों में उनके उच्च प्राथमिक स्कूलों में इन सभी तीन विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं। इस दौरान, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई थी, जहाँ 90% उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इन विषयों के शिक्षक ही नहीं थे। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान और जम्मू व कश्मीर जैसे राज्यों में तो स्थिति समान रूप से निराशाजनक थी।

एक अन्य मुद्दा जो पहले की सभी नीतियों का हिस्सा रहा है, वह है भर्ती प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और उन्हें पारदर्शी बनाना। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के अधिनियमन और अधिसूचना को लागू करने के मामले में सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) शुरू करने की घोषणा एक आवश्यक प्रक्रिया के रूप में की, जो शिक्षक भर्ती से पहले लागू होगी। समान रूप से महत्वपूर्ण, हर नीति जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 भी शामिल है, शिक्षकों की भर्ती और नियुक्ति के लिए एक उचित प्रक्रिया की सिफ़ारिश करती है और यह सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान भी देती है कि सभी स्कूलों में आवश्यक विषय-शिक्षक हों।

इसलिए, यह सुनिश्चित करना एक व्यावहारिक कदम होगा कि सरकार द्वारा संचालित या सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों के रूप में ही नियुक्त किया जाए, तब कहीं जाकर वे नौकरी की सुरक्षा के अलावा अच्छे वेतन जैसे विभिन्न लाभों और प्रोत्साहनों के हकदार बनेंगे। यह उन छात्रों के दीर्घकालिक लाभों के लिए एक अच्छा कदम होगा, जो सामाजिक-आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों से संबंधित होते हैं। इसके अलावा, जब तक हमारे शिक्षकों पर ध्यान केंद्रित नहीं किया जाता है, तब तक इस प्रणाली में बदलाव लाने का सपना देखना संभव ही नहीं है, क्योंकि यही शिक्षक समाज में अपना जो योगदान करते हैं उसके लिए वे और भी बहुत कुछ पाने के हकदार हैं।

Tuesday, April 20, 2021

बाबा मस्तराम का ब्रह्मचारी आश्रम

      



एक बार की बात है ब्राह्मणा नंद नामक संत भ्रमण करते हुए नदी के उस किनारे पहुँचे जहाँ पर आज आश्रम है, पूर्व में वहाँ एक टीला हुआ करता था, वह उस टीले पर अपनी कुटिया बना कर रहने लगे उनके शिष्य के रूप उस समय प्रख्यात थे "करिया बाबा" जिनका असली नाम आज भी लोगों को नहीं पता है, फिर उनके शिष्य हुए श्री मतंगा नंद स्वामी जिन्होंने अपना शिष्य बनाया गोविंदा नंद स्वामी जी को जिसके बाद गोविंदा नंद जी ने अपना शिष्य बनाया था, बाबा मस्त राम जी को जिनका देहावसान वर्ष 2003 में हुआ था | यह आश्रम के अंतिम महंत थे, वर्ष 2003 में उनकी मृत्यु के बाद कोई भी व्यक्ति इस आश्रम का प्रमुख नहीं हुआ बल्कि आश्रम क्षेत्रीय ग्राम निवासियों के सहयोग से संचालित होता है, गंगा के एकांत में बसे शान्तिमय आश्रम में आज भी बाबा मस्तराम की समाधी और उनकी मूर्ति बनी हुई है ||

बाबा मस्तराम ब्रह्मचारी थे वह सुभानपुर के निवासी थे , इसलिए निकट क्षेत्र में आश्रम भी "ब्रह्मचारी आश्रम" के नाम से जाना जाता है |

क्रांतिकारी मुनेश्वर अवस्थी के परिवार के लोग ज़मींदार थे, जिनमें से पंडित गया प्रसाद अवस्थी के पिता जी श्री बाबू राम अवस्थी इस आश्रम की देख रेख और कंस्ट्रक्शन का काम अपने निजी खर्चे से करवाते थे, जिसमें कि गंगा स्नान करने आने वालों के लिए एक अतिथि कक्ष और बरामदे के साथ ही एक मंदिर भी बनवाया था, जो कि समय के साथ कालग्रस्त हो गया जिसके कुछ अंश काफी समय बाद देखने को मिले थे | 

आश्रम संबंधित इन सब जानकारियों को देने वाले मंदिर के पुजारी श्री बाबा हरजिंदर दास जी वर्तमान में मोइद्दीनपुर गाँव में ही रहते हैं, अविवाहित हैं और मूलत: उसी गाँव के रहने वाले हैं | उन्होंने बताया कि इस आश्रम से गाँव वालों की मान्यता जुड़ी हुई हैं इस आश्रम और मंदिर का न तो कोई ट्रस्ट है न ही सोसाइटी अथवा संस्था, इसका संचालन सिर्फ ग्रामीणजनों के सहयोग और ईश्वर की कृपा से हो रहा है | वर्तमान में तो प्रतिदिन यहाँ सुबह शाम आरती होती है लेकिन वैसे प्रतिवर्ष कथाएं हुआ करती थी लेकिन इस वर्ष लॉकडाउन और कोविड के चलते वार्षिक कथा संभव नहीं हो पाई |




वीडियो देखें 


Friday, April 16, 2021

दृश्य कथा का अनूठा प्रयोग : मनायेता

कला, पौराणिक कथा, ध्यान और आध्यात्म का संगम है मनायेता


क्या है मनायेता ?

मनायेता एक ऐसा मंच है जो न सिर्फ ध्यान और आध्यात्म को कला के माध्यम से समाज तक पहुँचा रहा है बल्कि तमाम रोचक पौराणिक कहानियाँ जिनसे आज का समाज अनजान है उनको भी संकलित कर बेहद ही मनमोहक रूप दे कर छोटे-छोटे वीडियो के माध्यम से अपने दर्शकों तक पहुँचा रहा है |

किसका है प्रयास ?

"मनायेता स्टोरी बाय चित्रकारी" की संस्थापक कानपुर की आयुषी गुप्ता ने बताया कि इस काम की शुरूआत की प्रेरणा तथा पौराणिक कथाओं की तरफ आकर्षण के पीछे परिवार का साथ रहने के साथ ही लाइन मेडिटेशन का भी अहम योगदान रहा है | जो कि उन्हें निजी तौर पर अन्य यौगिक क्रियाओं  से कई अधिक बेहतर लगता है, लाइन मेडिटेशन ज़ेंटेन्गल आर्ट का एक भाग है जो कि एक सार ड्राइंग तकनीक है, जो सफेद कागज पर काली स्याही का उपयोग के माध्यम से होती है, यह एक प्रकार की ‘कला चिकित्सा’ है जहाँ एक ड्राइंग द्वारा ध्यान और मन शांत हो सकता है |

आयुषी की कला के प्रति गहरी रूचि विद्यार्थी जीवन से ही रही है, लेकिन फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई के दौरान आर्ट से ज्यादा लगाव ग्राफ़िक्स से हो गया |

आज के अधिकांश युवाओं पर जहाँ पूर्णतः पश्चिमी सभ्यता में सम्मलित हो कर अपने देश की परम्पराओं को असम्मान के भाव से देखने का आरोप लगता है तो वहीं आयुषी गुप्ता इस आरोप की खिलाफत में खड़ी वो जीवंत उदाहरण है जो न सिर्फ पौराणिक कथाओं की जानकार हैं बल्कि उन गूढ़ बातों को बेहद सरल अंदाज़ में समाज तक प्रेषित करने का नेक और अविस्मरणीय काम भी कर रही हैं |

आयुषी का कहना है कि हमारे देश के पास विशाल आध्यात्मिक तथा पौराणिक विरासत है जिसमें जीवन के सभी प्रश्नों के न सिर्फ उत्तर हैं बल्कि हास्य व्यंग से लेकर ड्रामा आदि भी है, मनायेता का प्रयास रहेगा कि आने वाले समय में समाज को प्रभावित करने वाली ऐसी बातें, किस्से और बेहतर तथा रोचक अंदाज़ में हर विद्यार्थी तक पहुँच सके जिनसे उसे अपने जीवन को दिशा और गति देने में सरलता हो|

कैसा है पारिवारिक सहयोग ?

आयुषी के परिवार में उनके पिता श्री मनोज कुमार गुप्ता एक मल्टी नैशनल कंपनी के लिए काम करते हैं तथा माँ श्रीमती ममता गुप्ता घर और परिवार को सशक्त करने का काम करती हैं तो वहीं आयुषी की बड़ी बहन खुशबू गुप्ता भारत सरकार की स्मार्ट सिटी परियोजना में सहयोगी हैं |

आयुषी के अनुसार जहाँ आज एक तरफ कैरियर बनाने की भेड़चाल और पारिवारिक दबाव के चलते बच्चे डिप्रेशन का शिकार हो रहें तो वहीं आयुषी को इस बात का सुकून है कि उनके परिवार में आर्ट के प्रति तथा आयुषी के कैरियर के प्रति कोई निराशा का भाव नहीं रहता बल्कि उनके अभिभावक ने उन्हें प्रोत्साहन देने के साथ ही अपने कार्यक्षेत्र को अपनी मौलिकता के हिसाब से चुनने की आज़ादी भी दी है ||

आयुषी ने देश विदेश में फैशन इंडस्ट्री की नामचीन कंपनियों के साथ काम किया पर फिर उन्हें संतुष्टि के अभाव के चलते एहसास हुआ कि नौकरी में रह कर कला के साथ न्याय नहीं कर रही हूँ, जिसके बाद आयुषी ने नौकरी छोड़ अपना यह स्टार्टअप शुरू किया |

जहाँ आयुषी के इस कदम में उसके परिवार का पूरा सहयोग रहता है तो वहीं आपको बता दें कि मनायेता नाम भी आयुषी के घर का नाम है जो उन्हें उनके माता-पिता से ही मिला है |


अगर आप भी रूबरू होना चाहते हैं भारत के गौरवशाली पौराणिक इतिहास की अनोखी कहानियों से जिनसे आप अब तक अंजान हैं तो आज ही जुड़िए अतीत को आकर्षण बनाने की मुहीम मनायेता से....


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👇जब सीता माता ने किया 1000 सर वाले रावण का वध

 

👇जब लक्ष्मण ने किया अपने दामाद का वध    
         
     
   
👇जब रावण के हाथ हिमालय के नीचे दब गए 


Tuesday, April 13, 2021

PEOPLE WITH POWER

SHAMBHAVI TIWARI
 When people with power break you,

 It’s a huge fall.

 Fall in the debris of the harrowing memories.

 Though every time it looks like it’s a wake up call,

 But the curtain of love blinds it all.

 From , “Oh! you don’t know a bit. I’ll help you love to , Oh! you   good for nothing, go figure it out yourself.”

Cushioned with sorrow and despair, the  clustered clouds burst into a river.

Those that don’t speak, couldn’t help but quiver.

Found a corner to question the Giver.

When will I be ready, to climb the stairs so heavy?

Heavy with judgements and criticism,

All the courage trapped in a prism.

Make no haste, the Conscience speaks,

Take the first train and be ready.

At each station of your life, the choice will be there.

You just have to take the  risk, dare.

The experiences will seep into the curious mind,

Whenever you feel stuck, the solution, you’ll always find.

Then will mull the people with power,

In wonder how you came at par?

Reliance Securities creates new earnings opportunities in financial services via its digital platform amidst COVID 2.0

 

    The ‘Rojgar Mela’ initiative has been curated to help individuals kickstart their businesses and expand their income prospects

-        Individuals can earn Rs 1-2 lakh per month and more even while working from home through the completely digital platform provided by Reliance Securities.

 


Amidst the rising uncertainties with the second wave of COVID-19 infections across the country and the renewed fears of widespread employment losses, Reliance Securities is organising a ‘Rojgar Mela’ on April 17, 2021, bringing a plethora of career opportunities in financial  distribution. This initiative has been curated to help individuals kickstart their businesses and expand their income prospects by creating regular and steady earnings sources of Rs 1-2 lakh or more every month, even while working from home through the completely digital platform provided by Reliance Securities.

By joining Reliance Securities as a Business Associate or  an exchange-registered Business Partner, all the affiliates get the unique opportunity to leverage its best and the most hi-tech end-to-end digital infrastructure to reach out to current and potential investors across the length and breadth of the country with the widest array of investment and trading products across equities, derivatives, currency, IPOs, wealth management solutions, insurance products, mutual funds, bonds, and corporate FDs amongst others. Right from client onboarding, to investing through mobile and web-based desktop interfaces, data analytics support from the connected data repository and continuous customer engagement – the affiliates will be able to operate completely digitally once they become a part of Reliance Securities.

The end-to-end and completely digital platform of Reliance Securities, which facilitates completely digital Partner Empanelment, Digital Client Acquisition, Client Servicing, Partner Trading and back office support, has propelled it to the position of the fastest growing and leading financial services firm in the country with over 1 million customers and a presence across more than 1500 locations across the country.

According to Lav Chaturvedi, ED&CEO, Reliance Securities, “In the current times of uncertainties caused by the Coronavirus pandemic, financial intermediation can be a limitless, stable and steady income source for individuals even while working from home. This is especially true because of the immense growth potential in this profession as currently only 3-4% of India’s population invests in financial products and there is room to grow this base many times over with the growth expected in India’s stock markets, India’s GDP target of $5 trillion and the rise in the upwardly mobile middle-class that is willing to invest in financial products.”

The Rojgar mela opens up opportunities for almost everyone – from Independent Financial Advisors, to Mutual Funds Agents, Real Estate, Insurance or Post Office Agents, SME Entrepreneurs and  Manufacturers, Tax Consultants, Direct Selling Agents (DSA), Architects, Builders, Grocery store owners, Commodity Merchants and even MBA & College Students – to became a part of the financial intermediation network of Reliance Securities and ensure steady source of income in these pandemic times and beyond.

Through the Rojgar mela, individuals interested in making a career in financial intermediation will be provided with the basic mantras for running a successful business, they can be a part of the Q&A sessions with experts and also join the sessions with industry experts in business building.

Sunday, April 11, 2021

संकल्प सेवा समिति के द्वारा थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए रक्तदान शिविर का आयोजन

आज दिनांक 11 अप्रैल दिन रविवार को संकल्प सेवा समिति के द्वारा थैलीसीमिया बीमारी से पीड़ित बच्चो की जरूरत को देखते हुए हैलट ब्लड बैंक टीम के द्वारा हंसपुरम नौबस्ता में रक्तदान शिविर आयोजित किया गया, रक्तदान शिविर में नौबस्ता थाना प्रभारी सतीश कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, संश्था के सदस्यो ने अतीथि महोदय को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया |

ततपश्चात मुख्य अतिथि ने रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र एवं गिफ्ट देकर उनका उत्साह बढ़ाया, आज के रक्तदान शिविर में 16 रक्तदाताओं ने रक्तदान किया, संश्था के अध्यक्ष संतोष सिंह चौहान ने बताया कि थैलीसीमिया जैसी घातक बीमारी से ग्रसित बच्चो के लिए संश्था के द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है, और ये प्रयास लगातार जारी रहेगा, रक्तदान शिविर में अजय तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव, अजय बाजपेयी, रमाकांत शुक्ला आदि ने रक्तदान किया, कार्यक्रम में विजय मिश्रा, पुनीत, राजकुमार मिश्रा, विष्णु, सुबोध आदि उपस्थित रहे |

Saturday, April 10, 2021

भारतीय मूल्यबोध पर अंतर राष्ट्रीय परिचर्चा

अध्ययन एवं अनुसंधान पीठ और हिंदी प्रचारिणी सभा मॉरिशस के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय परिचर्चा का आयोजन हुआ जिसका विषय था 'भारतीय मूल्यबोध :समकालीन अनिवार्यता ।

'इसमें मुख्य अतिथि पूर्व राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी जी थे ,पूर्व मंत्री अरुण चतुर्वेदी जी विशेष अतिथि थे ।विश्व हिंदी सचिवालय के महासचिव प्रो .विनोद कुमार मिश्रा विशिष्ट अतिथि थे।कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष डॉ ,.धनराज शम्भू ने की।इस परिचर्चा में देश के  विभिन्न विश्व विद्यालयों के 10 से भी अधिक कुलपति तथा देश विदेश के प्रख्यात विद्वान ,साहित्यकार और आलोचक उपस्थित थे ।मॉरिशस से रोहिणी रामरूप ,दक्षिण अफ्रीका से राजेश लक्ष्मण ,लोकेश महाराज ,हीरालाल सेवनाथ ,जर्मनी से  डॉ .सारिका ,ब्रिटेन से डॉ .तेजेन्द्र शर्मा ,प्रो .बलदेव भाई शर्मा ,प्रो .कुमाररत्नम,प्रो .भगवती प्रकाश शर्मा , प्रो .रामदेव भारद्वाज,प्रो .के .जी .सुरेश ,प्रो .श्री प्रकाशमणि त्रिपाठी , प्रो .ए .डी .एन .वाजपेयी ,प्रो.कुल्दीपचन्द अग्निहोत्री , प्रो .हरिमोहन शर्मा ,प्रो.अरुण कुमार भगत ,प्रो.कुमुद शर्मा ,प्रो.संजय द्विवेदी ,डॉ .रश्मि सिंह ,प्रो .शैलेन्द्र कुमार शर्मा ,प्रो .जी .पी.पांडेय ,प्रो.जे .बी . पांडेय ,डॉ .सूर्यप्रसाद दीक्षित ,डॉ .देवी प्रसाद मिश्रा ,श्रीमती निधि चौधरी ,प्रो.ममता शर्मा ,प्रो.सत्यकेतु सांकृत ,डॉ .आलोक पांडेय ,डॉ .सुनील त्रिवेदी,डॉ .शालिनी मिश्रा ,डॉ .बीना बुदकी , डॉ .सुनील तिवारी ,श्री रवींद्र माहेश्वरी, डॉ .गिरीश पंकज ,डॉ .संदीप अवस्थी ,सुश्री शुभांगी ,सुश्री शिवांगी , श्रीमती लीना पाणी ,  श्री सतबीर सिंह ,आचार्य चंद्र ,डॉ .राजकुमारी मिश्रा की बौद्धिक उपस्थिति रही।इस कार्यक्रम में विभिन्न कार्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाओं के लिए सम्मान समारोह के अंतर्गत देश दुनिया की विशिष्ट प्रतिभाओं को अध्यक्ष डॉ .धनराज शम्भू तथा आमंत्रित विशिष्ट अतिथियों के द्वारा सम्मानित भी किया गया।हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो .पी .एल .चतुर्वेदी जी को मरणोपरांत 'समाज रत्न' सम्मान तथा पूर्व राज्यपाल माननीय केसरीनाथ त्रिपाठी जी को 'हिंदी  रत्न 'सम्मान से सम्मानित किया गया।

Friday, April 9, 2021

व्यय रहित चुनाव

डॉ. कमल टावरी
सेवा निवृत-आई.आई.एस 


"मैं हमेशा वह कर रहा हूं जो मैं नहीं कर सकता, ताकि मैं सीखूं कि यह कैसे करना है।"

              (पब्लो पिकासो)

 भारत में शांतिपूर्ण, स्थायी विकास के लिए आंदोलन में शामिल होने के लिए भारत (भारत) के सभी लोकतांत्रिक, शांति-प्रेमी, तर्कसंगत और भविष्य-उन्मुख लोगों से अपील करें |

यह कागज क्यों ?

हमारी चुनावी प्रणाली में गंभीर खामियां हैं, जिन्हें कम से कम चुनाव आयोग द्वारा प्रदान किया जा सकता है, मतदाता, राजनीतिक दल और चुने हुए विधायक बेहतर के लिए चीजों को बदलने के लिए तैयार और तैयार हैं। हम मौजूदा व्यवस्था को इस मांग को पूरा करने के लिए उपयुक्त नहीं मानते हैं कि सांसदों और सरकारों को लोगों की सेवा करनी चाहिए। वे खुद को पहले स्थान पर रखते हैं विशेष रूप से क्योंकि यह अत्यधिक आकर्षक है।

व्यय-मुक्त चुनावों के लिए हमारी अवधारणा लोकतांत्रिक सिद्धांतों की मूल रूप से कड़ाई से होगी, और उम्मीदवार, स्वयंसेवक और समर्थक इसके लिए लड़ेंगे।

इस पर विचार करते हुए, हम लगभग लागत-मुक्त उम्मीदवारी के लिए अवधारणा के साथ आते हैं, और हमें लगता है कि इसे उन लोगों द्वारा चुनौती के रूप में लिया जा सकता है जो अपने देश और लोगों की सेवा करने के लिए दृढ़ हैं, लेकिन चुनाव के लिए अभी तक ठीक से खड़े नहीं हुए हैं उपर्युक्त कारण। वे राजनीतिक दलों या अपने स्वयं के एजेंडे रखने वाले पैरवीकारों से निर्भर नहीं बनना चाहते हैं।

हम अपने व्यक्ति-उन्मुख मापदंडों के अनुसार उन व्यक्तियों की पहचान करना चाहते हैं और लगभग स्वतंत्र रूप से स्वतंत्र चुनाव अभियानों की सुविधा प्रदान करते हैं, स्वतंत्रता के विचारों, दूसरों के लिए विचार, सामाजिक जिम्मेदारी, बुनियादी ढांचे, मानसिकता और दृष्टिकोण जैसे नागरिक समाज में आवश्यक परिवर्तनों के लिए काम कर रहे हैं। और समाज की बुराइयों के बारे में जागरूकता। हमने अपनी चुनावी प्रणाली और देश में राजनीति के काम करने के तरीके का खेद व्यक्त किया है। लोकतंत्र के 7 दशकों से अधिक के अनुभवों के मूल में हमने अपनी अवधारणा लगभग लागत-मुक्त उम्मीदवारी के लिए विकसित की है, इस प्रकार औसत राजनेता की विभिन्न निर्भरता की बुराइयों से मुक्त हो गए हैं।

निम्नलिखित मुख्य समस्याओं से पता चलता है:

1. उम्मीदवारों की ऋणीता, इस प्रकार फाइनेंसरों से कुल निर्भरता। साथ ही, खर्च किए गए धन को सफलतापूर्वक चुने जाने के बाद पुनः प्राप्त करना होगा जिसका अर्थ है भ्रष्ट आचरण, शोषण, लूट, धोखा, टूटे वादों के माध्यम से।

2. "टिकट" का वितरण योग्यता के बाद नहीं, बल्कि पार्टी के नेता से संबंधित होने जैसी पूरी तरह से राजनैतिक विशेषताओं के अनुसार, एक शक्तिशाली प्रायोजक होने के नाते, जो लाभकारी होगा, संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में एक शक्तिशाली व्यक्ति से समर्थन प्राप्त करने, पार्टी में प्रभावशाली व्यक्तियों को ब्लैकमेल करने का , आदि।

3. वोट-बैंक की रणनीति, होनहारों के माध्यम से समाज में बढ़ती दरारें और वास्तव में कुछ समुदायों / जातियों को विशेषाधिकार और / या लाभ प्रदान करना जो शाब्दिक रूप से अपने वोट बेच रहे हैं। यह मुख्य कारण है कि आजादी के 7 दशक से भी अधिक समय बाद भी हम एक आरक्षण प्रणाली से चिपके हुए हैं जो कि पूरी तरह से विफल है और यह भी कि, "अल्पसंख्यक अधिकार" (उन्हीं कारणों से) जो एक लोकतांत्रिक देश के लिए पूरी तरह से असुरक्षित हैं। वास्तव में, वे संविधान के विपरीत हैं।

4. अवसरवादी दृष्टिकोण, व्यक्तिगत लाभ के लिए एक पार्टी से दूसरे पार्टी में जाना। यह एक काफी लोकप्रिय तरीका प्रतीत होता है कि संबंधित पार्टी के नेताओं को या तो रंग बदलने की धमकी दी जाती है, अगर कुछ मांगें पूरी नहीं की जाती हैं, तो कुछ पारिश्रमिक या अन्य लाभों के लिए रंगों को वास्तव में बदल दिया जाता है। किसी भी मामले में, यह मतदाता के प्रति बहुत नीच राय दिखाता है और एक संदिग्ध चरित्र को भी प्रकट करता है।

5. आनुपातिक प्रतिनिधित्व के बजाय प्रमुखता प्रतिनिधित्व (अधिकांश मतदान प्रणाली)। यहां, हम संबंधित चुनाव प्रणालियों की बारीकियों पर बहुत गहराई से नहीं बताते हैं, लेकिन संक्षेप में: जबकि अधिकांश प्रतिनिधित्व में लगभग आधे वोट बेकार जाते हैं, आनुपातिक प्रणाली मतदान प्रतिशत के अनुसार लगभग सभी वोटों का भुगतान करने के लिए प्रदान करती है। 

6. खतरे को नियंत्रित करने के लिए EC के कई प्रयासों के बावजूद असीमित भ्रष्टाचार। बड़े उद्योगपति, बैंकर, कर चोरी करने वाले और अन्य माफिया विलासिता को सचमुच "खुद" एक या अधिक दलों को वहन कर सकते हैं और अपने एजेंडे को निर्धारित कर सकते हैं। इसके अलावा, पैसे और / या सामान के वितरण के माध्यम से मतदाताओं को रिश्वत देना आम है।

7. उम्मीदवारों के बीच कोई वास्तविक विकल्प नहीं है क्योंकि वे सभी समान हैं: हम देखते हैं कि अधिकांश दल मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए एक ठोस एजेंडा तैयार करने में बहुत अधिक प्रयास नहीं करते हैं, लेकिन इसके बजाय, वास्तविक लक्ष्य समूह के आधार पर वादे यादृच्छिक रूप से किए जाते हैं जो पार्टियों के पदाधिकारी दिए गए परिदृश्य पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस प्रकार, राजनीतिक राय की स्पष्ट रूप से आवश्यकता नहीं है। औसत भारतीय राजनेता पार्टी प्रमुखों से अलग-अलग आदेशों या मतदाताओं से वास्तविक मांगों को समायोजित करने में बहुत लचीला है, जो कुल अवसरवाद और व्यक्तिगत दृष्टिकोण या सिद्धांतों के अभाव में आता है। विश्वसनीयता नाली में गिर जाती है।

8. लॉबिस्टों से निर्भरता का अर्थ है कि सभी सांसदों के बहुमत को बड़े उद्योगों, जैसे बैंकरों, कुछ भारतीय और विदेशी संगठनों जैसे उद्योगों और वैश्विक खिलाड़ियों जैसे कृषि क्षेत्र में बड़े प्रभावशाली उद्योगों जैसे सर्वशक्तिमान लॉबीवादियों की प्रतिक्रिया और प्रतिक्रिया के लिए मजबूर किया जाता है। क्षेत्र जैसे कि मोनसेंटो और कीटनाशकों के अन्य आपूर्तिकर्ताओं, सामान्य भोजन के समर्थकों और अंत में, अपने स्वयं के उत्पादों को पेटेंट कराने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे दुनिया भर में कृषकों को ब्लैकमेल कर सकें। पिछले नहीं बल्कि कम से कम बेईमान पर्यावरण कोयले के कोण से पर्यावरण का विनाश करता है, और अत्यंत जोखिम वाले परमाणु शक्ति के समर्थक। जाहिर है, अक्षय ऊर्जा उद्योगों में कोई बड़ा पैसा नहीं है, लेकिन यह देश और इसके लोगों के हित में होगा कि वे उन्हें वापस लाएं। Id००० वर्ग किलोमीटर के तटीय क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए, जहाँ बड़े पवन पार्क लगाए जा सकते हैं या यह तथ्य कि जलवायु-आधारित भारत को सौर ऊर्जा के लिए एक इष्टतम क्षमता प्रदान की जाती है, कोयले को सब्सिडी देने के लिए यह बिल्कुल जघन्य है, इसके बजाय ग्लोबल वार्मिंग के लिए सबसे बड़ा अपराधी नवीकरणीय ऊर्जा के लिए प्रोत्साहन देते हुए, जैव-प्रौद्योगिकी भी जो हमारे तेल आयात को कम कर सकती है। हमारे कानून निर्माता स्पष्ट रूप से देश और इसके लोगों को इन खतरों से बचाने के लिए इच्छुक नहीं हैं।

निम्नलिखित में हम उपरोक्त बिंदुओं को उठाएंगे और संदर्भ में, लगभग व्यय रहित उम्मीदवारी स्थापित करने के उद्देश्य से हमारे समाधान सुझाएंगे।

 

क्यू 1 लोग चुनाव के लिए क्यों खड़े होते हैं?

 

हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए सांसदों के विभिन्न घरों की आवश्यकता होती है, जिन्हें राजनीतिक कार्यों के माध्यम से लोगों का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। एक राजनेता के इस सवाल का मानक जवाब कि वह चुनाव के लिए क्यों खड़ा है: "लोगों की सेवा करने के लिए।" यह गंभीर होगा तो हंसी आएगी। वास्तव में, लोग अपने स्वयं के लाभ के लिए निर्वाचित होना चाहते हैं, चाहे वह वित्तीय हो, शक्ति के लिए या प्रतिष्ठा के लिए, अधिक उदार पारिश्रमिक और भत्ते जो कि उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी जारी है। जब तक वे स्पष्ट रूप से "लोगों की सेवा" करने का सवाल नहीं उठाते हैं, तब तक वे जवाबदेह नहीं होते हैं कि वे क्या करते हैं या नहीं करते हैं। बड़े और बड़े लोग, राजनेताओं के बारे में सकारात्मक राय नहीं रखते हैं, वे अक्सर अपनी समस्याओं के साथ विश्वासघात और अकेले छोड़ देते हैं। अधिकांश राजनेता अगले चुनाव प्रचार के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा करते हैं, और उनकी धनराशि उनके टर्फ में निवेश करने के लिए होती है जो उन लोगों तक पहुंचती है जिन्होंने उसे / उसके लिए मतदान किया था।

 

 

प्रश्न 2. चुनावों के दौरान हम उम्मीदवारों की "योग्यता" को कैसे परिभाषित करते हैं?

वर्तमान "योग्यता आधारित" उम्मीदवार वे हैं जो पैसा खर्च करते हैं, मतदाताओं को रिश्वत देते हैं, शराब और अन्य मुफ्त, नौकरी, आरक्षण और क्या नहीं जैसे सभी प्रकार के आवंटन प्रदान करते हैं। बाहुबलियों, माफियाओं, अपराधियों, मनचलों ने शायद ही मतदाताओं को जिताने के लिए जनोन्मुखी नेताओं के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी। इस स्थिति का कारण जीवन के सभी क्षेत्रों में भ्रष्टाचार की व्यापक प्रकृति है। चुनाव इतना महंगा है कि शायद ही कोई ईमानदार, मेधावी उम्मीदवार आगे आ सके। राजनीतिक दलों ने दुर्भाग्य से खेदजनक स्थिति के लिए समायोजित किया है, उनकी अपनी समस्याएं और मजबूरियां हैं, उदाहरण के लिए कैसे अन्य दलों को एकजुट करने के लिए सहयोगी दलों के समूह को एकजुट करना है, भले ही बेईमानी से समझौता किया जाए जो वे सत्ता के लिए सहमत हैं। इसलिए, समस्या की जड़ - सत्ता और पैसे के सामान्य लालच के अलावा - चुनाव प्रणाली में निहित है, जिसमें तत्काल बदलाव की आवश्यकता है।

हमारी अवधारणा एक उम्मीदवार के व्यक्तित्व पर आधारित है: उसे या तो पहले स्थान पर बहुत सारी सहनशक्ति और अच्छे संचार कौशल होने चाहिए। "योग्यता" पक्ष के बारे में, हमें एक पेशे में पेशेवर अनुभव और सफलता का वजन करना होगा ताकि उम्मीदवार को पता चले कि अपने काम के माध्यम से आजीविका कमाने का क्या मतलब है। इन गुणों को आसानी से कहा जा सकता है और "कार्यस्थल" का अर्थ है, औसत दर्जे की प्रदर्शन से जुड़ी हर नियमित गतिविधि, जैसे कर्मचारी, श्रमिक, किसान, उद्यमी आदि।

प्रश्न 3. खर्च-मुक्त चुनाव कैसे हो सकते हैं?

हर परिवर्तन या आंदोलन या सुधार को सफल होने के लिए सही समय की आवश्यकता होती है। यह बहुत स्पष्ट है कि बहुसंख्यक लोग मौजूदा व्यवस्थाओं से तंग आ चुके हैं, खासकर चुनाव प्रणाली के साथ। हम अभी भी औपनिवेशिक बहुमत के प्रतिनिधित्व से चिपके हुए हैं जिसका अर्थ है कि बहुत बार लगभग आधे वोट बर्बाद हो जाते हैं। आनुपातिक प्रतिनिधित्व बहुत अधिक होगा और विभिन्न मतों को पूरा करेगा। जर्मनी के अनुभव बताते हैं कि यह अधिक न्यायसंगत और न्यायपूर्ण है, जिसे तथाकथित "5 -% - बाधा" भी कहा जाता है, जो छोटे-छोटे छींटाकशी करने वाले दलों के साथ सुशासन को असंभव बना देगा। इस तथ्य के बावजूद कि निकट भविष्य में चुनाव प्रणाली को बदलना आसान नहीं होगा, हमें विश्वास है कि व्यय-मुक्त चुनाव अवधारणा मतदाताओं के बहुमत के लिए अपील करेगी क्योंकि यह जवाबदेही के साथ अच्छे राजनीतिक नेताओं को भी लाएगी और निहित स्वार्थों से कोई निर्भरता नहीं।

 

· सही स्थानीय उम्मीदवारों की पहचान करना और उन्हें निर्दलीय के रूप में चुनाव में खड़े होने के लिए राजी करना। उम्मीदवारों को 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग में होना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस प्रक्रिया में ट्रूडेन-आउट तरीके और रेंगना नहीं है, और एक मजबूत नागरिक समाज के निर्माण के लिए युवाओं को प्रेरित करना है। एक और आवश्यकता यह होगी कि उम्मीदवार के पास कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, और संबंधित परिवारों को अहंकारी कारणों से सामान्य दबाव के बिना उद्यम को पूरा समर्थन देना चाहिए।

ग्रामीणों को व्यय-मुक्त चुनाव अवधारणा के बारे में सूचित करें और उपयुक्त उम्मीदवार प्रस्तुत करें। उम्मीदवार संबंधित गाँव का हिस्सा होगा और स्वयंसेवकों के समर्थन के साथ, गाँव, सोशल मीडिया और अन्य आईटी उपकरणों में जानकारी बैठकों जैसे विभिन्न माध्यमों से खुद को बाजार में पहुँचाना उसका / उसका काम है। व्यय-मुक्त तरीकों और साधनों के माध्यम से भ्रष्टाचार-मुक्त चुनाव विश्वास और विश्वसनीयता बनाने का केंद्रीय बिंदु होगा।

· उन लोगों की खोज करें जिन्होंने अतीत में इस लाइन पर काम किया है और अनुभवों को साझा किया है। यदि संभव हो तो, स्थानीय सेवानिवृत्त लोगों को अपने अनुभवों के साथ कारण का समर्थन करने के लिए उत्साहित करें।

· उम्मीदवार का समर्थन करने और उन्हें संचार, समन्वय, सूचना प्रौद्योगिकी और समग्र शिष्टाचार जैसे विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षित करने के लिए स्थानीय प्रतिबद्ध स्वयंसेवकों की पहचान करें।

· चुनाव एजेंडा, व्यवहार्य विकास कार्यक्रमों के साथ मिलकर जमीनी स्तर के नेतृत्व को सामने लाएगा। पर्यावरण-उन्मुख व्यावसायिक अवसरों और रोजगार सृजन के लिए एक स्पष्ट विकास योजना स्थानीय लोगों और अधिकारियों को शामिल करके गांव और क्षेत्र के लिए बनाई जाएगी। निम्नलिखित मानकीकृत उपकरण विकास के लिए ब्लूप्रिंट के रूप में काम करेंगे।

· 7 भारत के लिए अभिनव, कार्यान्वयन योग्य, निवेश, समावेशी, खोजी विचार है।

· 6 पीएस सार्वजनिक निजी पंचायत, लाभदायक प्रगतिशील भागीदारी।

5 Cs अभिसरण, समन्वय, लागत में कमी, पूंजी उत्पादन अनुपात और स्पष्टता।

एक यथार्थवादी और तर्कसंगत वातावरण तैयार करना होगा ताकि हारना भी हताशा में समाप्त न हो बल्कि चुनौती को जारी रखने के लिए शक्ति प्रदान करे। मौजूदा वंचितों से लड़ने के लिए सही तरीके से संवाद करना होगा। स्थानीय सामान्य सेवा केंद्र, समन्वय के लिए आईटी और सोशल मीडिया उद्देश्यों के लिए बहुत महत्व होगा।

· स्थानीय मीडिया, स्थानीय पत्रकारों और निर्वाचन क्षेत्र के मीडिया को सूचित किया जाना चाहिए ताकि वे नए प्रयोग में रुचि लें। वे इस संदेश को फैलाने के लिए बहुत महत्व रखते हैं और इस प्रकार इस अवधारणा को प्रचारित करने के माध्यम से विपणन करते हैं और उम्मीदवार और क्षेत्र के लिए विकास योजनाओं के बारे में वीडियो दिखाते हैं।

· स्थानीय स्कूल और कॉलेज शामिल होने चाहिए और छात्र संदेशवाहक हो सकते हैं, बड़े लोग स्थानीय स्वयंसेवक समूह में शामिल हो सकते हैं।

जैसा कि इस अवधारणा को मानसिकता और दृष्टिकोण में काफी बदलाव की आवश्यकता है, लोगों के मुद्दों को लेने के लिए और साथ ही, इस अवधारणा को प्रचारित करने के लिए स्थानीय सूचना बैठकों सह चर्चा में बहुत जोर दिया जाना चाहिए।

· सरकार, राज्य अधिकारियों, कानून और व्यवस्था की स्थिति, धार्मिक संस्थानों, जातियों, आदि की विशिष्ट भूमिकाओं को उनके लोगों के उन्मुखीकरण के आधार पर पूछताछ और विश्लेषण किया जाना चाहिए।

आरक्षण और सरकारी नौकरियों के लिए लड़ने के बजाय हमें सुशासन, अच्छे नेतृत्व, अच्छी नीतियों के लिए लड़ना होगा जो लोगों की अपनी समस्याओं को हल करने के लिए आत्मविश्वास का निर्माण करेगा।

अच्छे नेतृत्व परिवर्तन के लिए "स्मार्ट वार्ड" से शुरू करें।

· स्थानीय लोगों द्वारा स्मार्ट वार्डों की ग्रेडिंग के लिए मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स का उपयोग करें।

लालच, अभिमानी मानसिकता, अहंकार, असंवेदनशीलता, कम विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के प्रति उदासीनता की अड़चनों को स्थानीय लोगों के खिलाफ लड़ने और सही साबित करने की जरूरत है।

"ऐसा नहीं है क्योंकि चीजें मुश्किल हैं जो हम उद्यम नहीं करने की हिम्मत करते हैं। यह इसलिए है क्योंकि हम उद्यम नहीं करते हैं कि वे मुश्किल हैं।"

Tuesday, April 6, 2021

ANMI seeks exemption from COVID-19 curbs for unhindered functioning of exchanges

Association of National Exchanges Members of India (ANMI), the largest pan-India organisation comprising of over 900 stock brokers, has sent an urgent SOS to the Maharashtra government seeking relief from the fresh curfew and lockdown measures.

To contain the spread of COVID-19 infections in the state, the Maharashtra government on 4th April, 2021 imposed partial lockdown as a precautionary measure from 5th April to 30th April, 2021. However, only leading exchanges NSE and BSE and banks, etc. have been exempted from the partial lockdown. Since stock broking is systematically important part of financial services industry and crucial for exchange operations, ANMI in its submission to the Maharashtra government has urged for the following reliefs.

To include financial market intermediaries “Stock Brokers” as essential Service Provider.

2. To allow broking staff to travel by local transport and to exempt them from partial lockdown/curfew.

 An ANMI official said, “Since NSE & BSE are permitted to work, the intermediaries are also required to keep their offices open and hence we request the government to add stock brokers in the category of essential services to ensure they can provide services to their clients. Further, apart from NSE and BSE, other exchanges like NCDEX, MCX, MSE and Depositories CDSL, NSDL should also exempted from restrictions.”

 Stock broker offices are mostly located in Mumbai and the staff is required to commute between office to home till late in the night.  Further, trading hours of Commodity Brokers is permitted by SEBI upto 11pm and the office is required to be kept open till the market is open and by the time the staff leaves the office after completing his work it is 12.00 midnight.

CPAI urges Maharashtra govt to classify stock broking under essential services amid new COVID-19 curbs

In the wake of the fresh round of COVID-19 related restrictions announced by the Maharashtra government on April 4th, 2021, the Commodity Participants Association of India (CPAI) – which is the PAN India apex association of stock and commodity brokers – has written to Maharashtra government to classify stock and commodity broking under “essential services.” This request is particularly in the view that the government has allowed both the leading stock exchanges – NSE and BSE— to remain operational and to ensure smooth functioning of the exchanges, undisrupted broking services must also be facilitated. 

Recognising the importance of Capital markets in ensuring the nation’s economic

stability, the Maharashtra was amongst the first states to have brought stock broking, along with depositories and mutual funds, under essential services during the nation-wide lockdown imposed in March 2020.

Urging the Maharashtra government to provide similar reliefs during the fresh round of restrictions, Mr. Narinder Wadhwa, President, CPAI, said: “On behalf of CPAI, it’s our earnest request to the Maharashtra government to issue necessary clarifications to exempt employees working in broking offices from any curbs on their movement. This is to ensure smooth operations and functioning of the broking offices as without the support of the broking industry, exchanges cannot operate.” He also assured the government of all the necessary support and full compliance with all other guidelines.

 Maharashtra's new COVID-19 guidelines will come into force from 8 pm on April 5 will remain in force till 11.59 pm on April 30.

Monday, April 5, 2021

बेजुबानों को सहारा देने को संघर्ष कर रहा कानपुर में युवा संस्थाओं का समूह

कल दिनांक 4 अप्रैल को कानपुर के किदवाई नगर स्थित कोचिंग सेंटर में टीम कानपुर फ़ॉर वाइसलेस की पहली औपचारिक बैठक सम्पन्न हुई । जिसमे कानपुर में कार्य करने वाले अधिकतर पशु प्रेमी व बेजुबानो पर कार्य करने वाली एक्टिव संस्थाए उपस्थित रहीं।

बैठक में हीरो फाउंडेशन से पल्ल्वी शुक्ला जी ने बताया कि सभी टीम मेंबर्स अपने एरिया में रहने वाले माननीय सांसद, विधायक, कानून के जानकार तथा वरिष्ठ नागरिकों इत्यादि के पास जाकर बेसहारा पशुओं के समर्थन में वीडियो बनाएंगे ताकि आम जन में बेजुबानो के प्रति कर्तव्य भाव जगाया जा सके। बेसहारा पशुओं के समर्थन में दो-दो मिनट के कैप्सूल वीडियो तैयार किए जाएं जो एक विशेष मैसेज को कैरी करते हों | तो वहीं बेजुबानो की रसोई से मनहर कांत और उम्मीद एक किरण के मयंक अवस्थी ने अगले 1 महीने में वोलेंटियर्स की संख्या को 300 के आसपास लेकर जाने का उद्देश्य सामने रक्खा ताकि जमीनी स्तर पर बेसहारा प्राणियों की बेहतर मदद की जा सके।

एक मेडिसिन टीम का भी गठन किया गया जो कमल यादव,अनुभव अवस्थी, अंकित वर्मा के नेतृत्व में काम करेगी और अगले 15 दिन में सभी ट्रीटमेंट करने वाले सदस्यों को एक दवाओं का मेजर स्टॉक उपलब्ध कराएगी |


स्पेशल ट्रीटमेंट फॉर एनिमल्स एंड रेप्टाइल सोसाइटी की तम्मना सेठी ने कहा कि बर्रा के शेल्टर जिसे "उम्मीद एक किरण" संस्था चला रही है को यथासंभव शक्ति देकर मजबूत किया जाएगा और इसी के साथ कानपुर में एक नए सेंटर को बनाने के लिए सरकारी संस्थाओं से मदद मांगी जाएगी |

स्ट्रीट डॉग्स ऑफ कानपुर से नैन प्रीत जी,आकृति जी ने कहा वॉलिंटियर बनाने के लिए जूम मीटिंग के माध्यम से नैनप्रीत कौर,आकृति राजपाल, कनिका मिश्रा जी के नेतृत्व में यह पूरा कार्यक्रम किया जाएगा |

स्कूल कॉलेज सरकारी गैर सरकारी संस्थाओं के हेड्स को अपने संपर्क में ले करके उनसे जो भी यथासंभव मदद हो सकती है ली जाए तथा जन जागरण अभियान चलाया जाए |

सेवा दान फाउंडेशन के आशुतोष त्रिपाठी ने कहा कि एनिमल क्रुएलिटी ला के आईपीसी सेक्शन हर थाने में लगे इसका प्रयास करके, अगले 15 से 20 दिनों में इस कार्यक्रम को संपन्न करना है ताकि लोगों को पशुओं के साथ क्रूरता करने के खामियाजा का पहले से ही पता हो|

टीम कानपुर फ़ॉर वोइसलेस अभियान के कन्वेनर गौरव बाजपेई ने महानंदी अभियान की शुरुवात की घोषणा की, जिसके तहत हमारे घरों में आने वाले शांत स्वभाव के नंदी महाराज और गौ माता के मस्तक पर सूखी हल्दी लगाएंगे और उसके ऊपर हल्दी चुने से बना हुआ लाल टीका लगाएंगे । यह शुभ कार्य की शुरुवात हम इसलिए करेंगे ताकि उनकी पवित्रता आम जनमानस न भूले, 

अभियान को नाम दिया गया "मैं शिव का जीवित नन्दी हूँ अभियान" 

बैठक में बेज़ुबानो को आवाज़ देने, उनका सामाजिक अधिकार देने की रणनीति बनाई गई जिसमें टीम कानपुर फॉर वौइसलेस के टीम कोर्डिनेटर गौरव बाजपेई जिसमें अमन शुक्ला ,हर्षित अवस्थी ,अनन्या त्रिवेदी, अंकिता यादव , रमित सेठी, दीपिका जी, कनिका बजाज जी, लक्ष्मी जी, आदि उपस्थित रहे |

Thursday, April 1, 2021

कानपुर : बेसहारा स्वान की हत्या किए जाने के विरोध में बर्रा थाने में दर्ज हुई शिकायत

जरौली फेस-2 कनिका यादव (बदला हुआ नाम) अपने परिवार के साथ रहती हैं उनके बच्चे व बच्चों के दोस्त मोहल्ले के बेसहारा जानवरों को खाना पानी पिलाने का कार्य करते हैं। 31 मार्च की सुबह उन्हें सूचना मिलती है की एक पिल्ला जिसकी उम्र 4 माह के आसपास थी जिसे बच्चे  खाना पानी खिलाते रहते थे वह जटा शंकर पैलेस के सामने सड़क पर बेसुध पड़ा हुआ है ।

बच्चों ने पास जाकर देखा तो उन्हें पता चला कि वह बहुत बुरी स्थिति में था और उन बच्चों को देखकर वह पड़े पड़े चिल्लाने लगा ! न हीं वह उठ पा रहा था, न हीं चल पा रहा था ! इसके बाद बच्चे अपनी माँ के सहयोग से उसे जाजमऊ स्थित पेट क्लीनिक ले गए ! 

जहां पर डॉक्टर ने उसके ब्लड टेस्ट किए ,उसे इंजेक्शन लगाया और आशंका जताई कि इसे बुरी तरह मारा गया है! क्योंकि उसके शरीर में ब्लड क्लॉट्स पड़े हुए थे । शाम को उस श्वान पिल्ले को वापस लाते वक्त रास्ते में ही उसकी दुखद मृत्यु हो गई।

मोहल्ले में वापस जाकर जानकारी जुटाने पर पता चला कि मोहल्ले के ही किसी व्यक्ति ने उस पिल्ले को बुरी तरह डंडों से मारा था जिसके कारण इंटरनल ब्लीडिंग हुई और उसकी मृत्यु हो गई ।

यह जानकारी जब स्ट्रीट डॉग्स ऑफ कानपुर की नैनप्रीत और आकृति को पता चला तो उन्होंने इस क्रूरता के खिलाफ चुप ना बैठने का निर्णय लिया! अन्य पशु अधिकारों के लिए कार्य करने वाले संगठनों से बात कर कर उन्होंने तय किया कि वह इस हत्या के विरोध में थाने में जाकर शिकायत दर्ज कराएंगे ।


पशु प्रेमियों व पशु अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली संस्थाओं को कोआर्डिनेट करने वाली संस्था "टीम कानपुर फॉर वॉइसलेस" के कनवेनर गौरव बाजपेई (गौरैय्या बचाओ) व सभी सदस्यों ने इसका एक सुर में समर्थन किया और आज 1 मार्च को बर्रा थाने में विभिन्न संस्थाओं के सदस्यों व पशु प्रेमियों  ने इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई।

इंस्पेक्टर हरमीत सिंह और धीरेंद्र वर्मा जी ने मामले की गंभीरता को समझा और उन्होंने शीघ्र कड़ी कार्यवाही करने का भरोसा दिलाया |

इस पूरे कार्य मे सेवा दान फाउंडेशन के हर्षित अवस्थी, अमन शुक्ला, आन्या त्रिवेदी, स्पेशल ट्रीटमेंट फॉर एनिमल्स एंड रेप्टाइल्स सोसायटी की तमन्ना सेठी ,रमित सेठी, हीरो फाउंडेशन की पल्लवी शुक्ला, पशु आश्रय चलाने वाले ज्ञानेंद्र अवस्थी व प्रखर तिवारी, आदि उपस्थित रहे !

Commodity market participants seek FM’s urgent intervention as volumes shrink further in Feb-Mar ’21

●      Commodity market average daily turnover (ADT) down by 27% between February 2021 to March 2021; equity markets also see 19% fall in ADT

●      CPAI urges FM to allow their submissions on addressing three key challenges

●      Indian commodity exchanges are failing to recover liquidity owing to existing challenges pertaining to IGST, peak margin and CTT/STT

 

01st April, Delhi: The Commodity Participants Association of India (CPAI), the pan-India apex association of commodity market participants, today met the Hon'ble Finance Minister Smt. Nirmala Sitharaman for seeking her immediate intervention and policy support following a sharp decline in the volumes of exchange-traded commodities.

During the meeting, the CPAI representatives tabled their concerns pertaining to current challenges and hurdles that the industry is facing, which are contributing to diminishing liquidity on Indian commodity exchanges.

Commodity markets’ average daily turnover (ADT) has shrunk further by 27% between February and March 2021. Equity markets have also seen a sharp fall of 19% in ADT in this period, while equity futures volumes are down by 14%.


Mr. Narinder Wadhwa, President, CPAI, said: “In today’s pandemic times, when GoI is supporting industries with schemes like production-linked incentive (PLI), commodity market participants have also urged the MoF for policy support to improve market depth and liquidity, and enable India to emerge as a price setter of commodities. We are extremely thankful to the Hon’ble Finance Minister Smt. Nirmala Sitharaman for giving us a patient hearing and considering our submissions. Implementing our suggestions will reduce the cost of hedging in commodity markets, bring ease of doing business.”

CPAI has placed their concerns and sought the FM’s intervention on three key issues:

 1.     Amending IGST Act owing to the challenges faced by market participants while delivering / receiving goods at the  designated centres.

All trades which result in delivery on the Exchange Platform are covered under IGST except for where the buyer and seller are located in the same state. if the buyer and seller are located in different states from the place of delivery, challenges are faced by market participants on IGST registrations, which increases their compliance burden.  CPAI, therefore, urged the FM to suitably amend the IGST Act in order to allow the seller of commodities to raise the tax invoice from the state where he is already registered. It also urged FM to do away with the need of obtaining a casual taxable person registration in the state where the accredited warehouse is located.

CPAI further submitted that the place of supply of goods should be the registered address of buyer and not the physical location of the goods at the time of delivery – either actual or constructive.

2.     Rationalising the peak margin requirement to maintain market depth and turnover

SEBI implemented a peak margin requirement for all clients from 1st Dec 2020. Under the plan, clients were to be allowed reduced leverage on intraday positions in phases. As per the schedule, peak margin obligation of client was 25% from 01/12/2020, 50% from 01/03/2021, 75% from 01/06/2021 and 100% from 01/09/2021. With margins slated to increase as per schedule, markets are likely to witness a significant drop in volumes and participation. The same can also be observed from the trend in equity markets where volumes, especially intraday volumes have shifted from equity and futures markets (down 19 % and 14 % month on month) where the margin is higher to options markets (up 16 % month on month) where the margin is lower, particularly when options are purchased. Our markets are already saddled with higher costs as compared to global markets. A large part of the costs is regulatory costs. Further with the increased margin requirements on day trades, overall liquidity and depth could go down further.

CPAI, therefore, urged the FM to help the industry for rationalising Peak Margin requirement to maintain market depth and turnover.

3.     Rationalising cost of transactions: 

The  cost of transaction started increasing from 2004 when STT was introduced and incidentally the Turnover to Market Ratio fell more steeply when section 88E was withdrawn in 2008 & STT started getting treated as an expense instead of a tax.

Although Market Cap increased by 194% (from 51.38 lacs crore in 2008-9 to 151.08 lacs crore in 2018-19) but Ratio of Turnover to Market Cap fell.  The Govt Revenue & Cash Market Volumes did not keep up at same pace. The Daily Spot Volume Grew By 72%- much below its potential especially when Market Cap has grown much higher. STT grew by merely 28% from Rs 8576 crore to Rs 11000 crore.

Similarly, introduction of CTT in 2012 led to a sharp fall in commodity market volumes as well. After CTT introduction, volumes on MCX fell 60% from 2012 to 2019. Govt also could collect Rs 667 crore as CTT in 2018-19 while it hoped to collect Rs 2000 crore.

The volumes of Indian commodity exchanges have been falling over the last decade due to challenges on ease of doing business, taxation, costs and compliance norms.  Since the Commodity exchange industry in India is still in its nascent stage, CPAI said the finance minister’s intervention to address the existing hurdles will go a long way in changing the future of this industry.

About CPAI

Commodity Participants Association of India (CPAI) is the registered all India association of all the national commodity exchanges and comprising commodities participants of recognized Commodity Exchanges like MCX, NCDEX, NSE, BSE, ICEX, MSEI as also other commodity market participants in the value chain operating across the country.

CPAI’s mission is to work for a transparent, efficient, safe & vibrant commodity derivatives market and creating world-class infrastructure for commodity spot markets. CPAI has a vision of Indian Commodities Market making an impact & influencing world commodity markets along with providing an efficient platform to consumers, producers, traders and the industry.

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