Friday, April 16, 2021

दृश्य कथा का अनूठा प्रयोग : मनायेता

कला, पौराणिक कथा, ध्यान और आध्यात्म का संगम है मनायेता


क्या है मनायेता ?

मनायेता एक ऐसा मंच है जो न सिर्फ ध्यान और आध्यात्म को कला के माध्यम से समाज तक पहुँचा रहा है बल्कि तमाम रोचक पौराणिक कहानियाँ जिनसे आज का समाज अनजान है उनको भी संकलित कर बेहद ही मनमोहक रूप दे कर छोटे-छोटे वीडियो के माध्यम से अपने दर्शकों तक पहुँचा रहा है |

किसका है प्रयास ?

"मनायेता स्टोरी बाय चित्रकारी" की संस्थापक कानपुर की आयुषी गुप्ता ने बताया कि इस काम की शुरूआत की प्रेरणा तथा पौराणिक कथाओं की तरफ आकर्षण के पीछे परिवार का साथ रहने के साथ ही लाइन मेडिटेशन का भी अहम योगदान रहा है | जो कि उन्हें निजी तौर पर अन्य यौगिक क्रियाओं  से कई अधिक बेहतर लगता है, लाइन मेडिटेशन ज़ेंटेन्गल आर्ट का एक भाग है जो कि एक सार ड्राइंग तकनीक है, जो सफेद कागज पर काली स्याही का उपयोग के माध्यम से होती है, यह एक प्रकार की ‘कला चिकित्सा’ है जहाँ एक ड्राइंग द्वारा ध्यान और मन शांत हो सकता है |

आयुषी की कला के प्रति गहरी रूचि विद्यार्थी जीवन से ही रही है, लेकिन फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई के दौरान आर्ट से ज्यादा लगाव ग्राफ़िक्स से हो गया |

आज के अधिकांश युवाओं पर जहाँ पूर्णतः पश्चिमी सभ्यता में सम्मलित हो कर अपने देश की परम्पराओं को असम्मान के भाव से देखने का आरोप लगता है तो वहीं आयुषी गुप्ता इस आरोप की खिलाफत में खड़ी वो जीवंत उदाहरण है जो न सिर्फ पौराणिक कथाओं की जानकार हैं बल्कि उन गूढ़ बातों को बेहद सरल अंदाज़ में समाज तक प्रेषित करने का नेक और अविस्मरणीय काम भी कर रही हैं |

आयुषी का कहना है कि हमारे देश के पास विशाल आध्यात्मिक तथा पौराणिक विरासत है जिसमें जीवन के सभी प्रश्नों के न सिर्फ उत्तर हैं बल्कि हास्य व्यंग से लेकर ड्रामा आदि भी है, मनायेता का प्रयास रहेगा कि आने वाले समय में समाज को प्रभावित करने वाली ऐसी बातें, किस्से और बेहतर तथा रोचक अंदाज़ में हर विद्यार्थी तक पहुँच सके जिनसे उसे अपने जीवन को दिशा और गति देने में सरलता हो|

कैसा है पारिवारिक सहयोग ?

आयुषी के परिवार में उनके पिता श्री मनोज कुमार गुप्ता एक मल्टी नैशनल कंपनी के लिए काम करते हैं तथा माँ श्रीमती ममता गुप्ता घर और परिवार को सशक्त करने का काम करती हैं तो वहीं आयुषी की बड़ी बहन खुशबू गुप्ता भारत सरकार की स्मार्ट सिटी परियोजना में सहयोगी हैं |

आयुषी के अनुसार जहाँ आज एक तरफ कैरियर बनाने की भेड़चाल और पारिवारिक दबाव के चलते बच्चे डिप्रेशन का शिकार हो रहें तो वहीं आयुषी को इस बात का सुकून है कि उनके परिवार में आर्ट के प्रति तथा आयुषी के कैरियर के प्रति कोई निराशा का भाव नहीं रहता बल्कि उनके अभिभावक ने उन्हें प्रोत्साहन देने के साथ ही अपने कार्यक्षेत्र को अपनी मौलिकता के हिसाब से चुनने की आज़ादी भी दी है ||

आयुषी ने देश विदेश में फैशन इंडस्ट्री की नामचीन कंपनियों के साथ काम किया पर फिर उन्हें संतुष्टि के अभाव के चलते एहसास हुआ कि नौकरी में रह कर कला के साथ न्याय नहीं कर रही हूँ, जिसके बाद आयुषी ने नौकरी छोड़ अपना यह स्टार्टअप शुरू किया |

जहाँ आयुषी के इस कदम में उसके परिवार का पूरा सहयोग रहता है तो वहीं आपको बता दें कि मनायेता नाम भी आयुषी के घर का नाम है जो उन्हें उनके माता-पिता से ही मिला है |


अगर आप भी रूबरू होना चाहते हैं भारत के गौरवशाली पौराणिक इतिहास की अनोखी कहानियों से जिनसे आप अब तक अंजान हैं तो आज ही जुड़िए अतीत को आकर्षण बनाने की मुहीम मनायेता से....


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