Monday, May 31, 2021

Be Monsoon Ready with KBL’s Flood-Control Autoprime Pump Unit

 

The high-capacity pump sets by KBL have been frequently pressed into service for major dewatering and disaster management mission at the global level

The Autoprime pump sets of Kirloskar Brothers Limited (KBL) is among the most preferred and ideal solutions for prompt dewatering or flood-control or wastewater management. This high-capacity, mobile flood-control and inland water-management unit is vastly used for dewatering the flood-affected areas in India and abroad during flood-like situations in monsoons. 

Water logging in cities, towns and many other areas, during monsoon is a grave concern as it not only affects business operations, resulting into economic loss, but also brings public movement to a stand-still and sometimes even results into loss of life. KBL’s dedicated Autoprime pump set can be critically helpful in duly combating such flood-like situations as it facilitates quick dewatering of the water logged areas.

The Autoprime pump set comes with an easy to operate plug-and-play for quick start-up and requires no manual intervention during priming. It is a light-weight, portable, trolley-mounted product that can be mobilised easily to the affected area without any hassles. Autoprime is mainly used for dewatering, over-pumping, sewer bypasses, industrial and municipal pumping applications.  

Autoprime pump sets are unique in nature as these are the largest-ever portable pump sets developed and supplied by KBL for flood control and drainage application in the Indian subcontinent. The pump set comes as a complete package, including a pump, prime over which could be an engine or electric motor, Autoprime unit, suction and discharge pipe and other necessary components. Its waterproof and acoustic canopy design and rugged construction ensures longer life with minimum maintenance, thus facilitating hassle-free operation of the pump set for many years.

Backed by rigorous on-site testing and guaranteed product performance, the Autoprime pump set is also a recommended choice for dewatering purposes globally.  With 100-plus installations, KBL’s Autoprime pump sets are operational in major cities, airports, and industries across the country.   

Earlier, the company’s Autoprime pump sets also played an integral role in dewatering operations carried out by the concerned municipal corporations in the flood-affected areas of Kerala and Maharashtra in India as well as in Sri Lanka. 

About Kirloskar Brothers Ltd (KBL): KBL is the flagship company of the US$ 2.1 billion Kirloskar Group. The company was established as Kirloskar Brothers in 1888 from which various group companies emerged later. Kirloskar Brothers was officially registered as a legal entity into Kirloskar Brothers Limited on January 15, 1920. KBL, a global conglomerate, provides complete fluid management solutions for large infrastructure projects in the areas of water supply, power plants, building & construction, process industries, irrigation, oil & gas, and marine & defence. It engineers and manufactures industrial, agricultural, and domestic pumps, valves, and hydro turbines. It is also India's largest centrifugal pump manufacturer with eight manufacturing facilities in India along with other international subsidiaries and operations in the Netherlands, South Africa, Thailand, the United Kingdom, and the United States of America. KBL has 12,700 channel partners in India and 80 overseas and is supported by the best-in-class PAN-India network of authorised service and refurbishment centres. 

All manufacturing plants of KBL have the necessary Quality, Environment, Occupational Health & Safety, and Energy standard certifications under the Integrated Management System (ISO 9001:2015, ISO 14001:2015, ISO 45001:2018, and ISO 50001:2018). The company's Kirloskarvadi plant is a state-of-the-art integrated manufacturing facility, which houses Asia's largest hydraulic research centre with a testing facility of up to 5000 kW and 50,000 m3/hr. KBL is the only pump manufacturing company in India and the 9th in the world to be accredited with the N and NPT certification by the American Society of Mechanical Engineers (ASME).

Saturday, May 29, 2021

कान्यकुब्ज मंच ने पत्रकारिता में नारद जी के नज़रिए पर डाला प्रकाश, किया भव्य ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन

'आदिपत्रकार देवर्षि नारद जी सिर्फ संचार के ही नहीं, सुशासन के मंत्रदाता भी हैं। नारद जी को संकटों का समाधान संवाद और संचार से करने में महारत हासिल है। आज के दौर में उनकी यह शैली विश्व स्वीकृत है। समूचा विश्व मानने लगा है कि युद्ध अंतिम विकल्प है। किंतु संवाद शास्वत विकल्प है।' कान्यकुब्ज मंच द्वारा आयोजित 'पत्रकारिता में नारदीय दृष्टि' विषयक ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी में

भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली के महानिदेशक प्रो संजय द्विवेदी ने कहा कि एक सुंदर दुनिया बनाने के लिए सार्वजनिक संवाद में शुचिता और मूल्यबोध की चेतना आवश्यक है। 

इससे ही हमारा संवाद लोकहित केंद्रित बनेगा। नारद जयंती के अवसर नारद जी के भक्ति सूत्रों के आधार पर आध्यात्मिकता के घरातल पर पत्रकारिता खड़ी हो और समाज के संकटों के हल खोजे, इसी में उसकी सार्थकता है।

इंदौर से देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ सोनाली नरगुंडे ने कहा कि 'देश की आजादी के बाद और खासकर नब्बे के दशक में आये आर्थिक उदारीकरण के बाद से लगातार व्यवसायिकता की तरफ बढ़ती पत्रकारिता को कोरोनाकाल ने एक नई दिशा दिखाई है। सामाजिक सरोकारों से दूर होते जा रहे पत्रकार जगत को वैश्विक महामारी ने लोकमानस के मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र की समझ पैदा की है।

गाजियाबाद से वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल के अनुसार भारतीय जनमानस आज भी मीडिया की खबरों में भरोसा करता है। एक पत्रकार का दायित्व है कि सुनी-सुनाई बातों में न जाकर खबरों की गहराई तक जाना चाहिए। एक पत्रकार का सम्पर्क सभी से हो लेकिन मित्रता सिर्फ सत्य से होनी चाहिए। कोरोनाकाल में पत्रकारों का दायित्व कहीं अधिक बढ़ जाता है।

कानपुर की प्रो प्रेमलता ने बताया कि पत्रकारिता का उपयोग व्यापक रूप से लोकहित के लिए किया जाता है ।किसी प्रतिष्ठा या पुरस्कारों के लिए नहीं । लोकहित ही पत्रकारिता का नारदीय सूत्र है।

हिन्दी परिवार इंदौर के अध्यक्ष हरेराम वाजपेयी के अनुसार नारद जयन्ती पत्रकारिता से जुड़े लोगों को अपनी कार्यशैली के मूल्यांकन और विश्लेषण करने का अवसर देता है। निष्पक्षता और सत्यता उसका आभूषण है।

सर्वब्राह्मण शिखर के सम्पादक शैलेंद्र जोशी ने देवर्षि नारद की पत्रकारिता को न्यायकारी, देव-दानव व मनुज सभी के लिए न्यायकारी व अहिंसक बताया। इनके अलावा इंदौर से डॉ मुकेश दुबे, योगेंद्र जोशी, रंजना शर्मा, उज्जैन से विवेक वाजपेयी,लखनऊ से प्रो डी सी मिश्र व विकास पाठक, कानपुर से सौरभ अवस्थी, अजय पाण्डेय व राजेश दीक्षित, नोएडा से मनीषा पाण्डेय, मुंबई से बी के मिश्र तथा भागलपुर (बिहार) से गोपाल कृष्ण पाण्डेय आदि ने भी चर्चा में भाग लिया। राष्ट्रीय संगोष्ठी का संचालन कर रहे थे  कान्यकुब्ज मंच पत्रिका के संपादक आशुतोष पाण्डेय। प्रबन्ध सम्पादक विष्णु पाण्डेय (लखनऊ) ने सभी सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Friday, May 28, 2021

नेता जी ने किया कोविड नियमों को तार-तार और पीड़ित पक्ष कर रहा न्याय कि दरकार

कोविड 19 की दूसरी लहर के बीच 14 मई 2021 को रात्रि 12 बजे रास्ता रोककर कानफाड़ू तेज आवाज में डीजे बजाना और  डीजे बजाने की शिकायत पुलिस में करने पर शिकायत कर्ता का मोबाइल छीनकर उसे बुरी तरह घेरकर मारने वाले दबंगों के खिलाफ कोतवाली खैर में 15 मई 2021 को एफआईआर नम्बर 247 पर कोविड 19 की गाइडलाइंस के उल्लंघन और शिकायत कर्ता के साथ मारपीट का मामला दर्ज हुआ था।

धारा 147, 323, 324, 336, 188, 269, 506 आईपीसी 1860 के तहत दर्ज उपरोक्त मुकदमे में गांव गढ़ी नगला श्योराम थाना खैर जनपद अलीगढ़ के दबंग नेताजी इंद्रपाल सिंह और उसके 5 पुत्रों और तीन भतीजों को नामजद किया गया था, चौकी इंचार्ज सोफा चरणसिंह नागर ने उक्त नामजद दबंगों की गिरफ्तारी के लिए कई दिन गांव में दबिश दी किन्तु एक आरोपी दीपक के अलावा अन्य कोई आरोपी हाथ न आया, दीपक को अदालत से जमानत मिल गई थी।

दबंगों ने पीड़ित परिवार और शिकायत कर्ता अरुण पर राजीनामा करने और अपनी शिकायत वापस लेने के लिए काफी दबाव बनाया और शिकायत वापस न लेने पर डराया धमकाया भी।

ऊपरी दबाव और धन के बल पर नेताजी इंद्रपाल सिंह व उसके साथी लगातार गिरफ्तारी से बचे रहे और पीड़ितों को मुकदमा वापस लेने के लिये लगातार धमकी देते रहे। नेताजी इंद्रपाल सिंह और हाल ही में प्रधानी का चुनाव लड़े उनके भाई श्रीराम ने जब देखा उनके खिलाफ स्थानीय पुलिस सख्ती कर रही है तो दोनों ने मिलकर एक साजिश पीड़ितों के विरुद्ध रची और पुलिस उपमहानिरीक्षक अलीगढ़ को लूटपाट डकैती और महिलाओं से छेड़छाड़ की मनगढ़ंत झूठी कहानी बनाकर एक शिकायतपत्र अरुण प्रेमचंद व अन्य गवाहों के खिलाफ दिया, पुलिस को झूठी सूचना एवं शिकायत देकर दबंग नेताजी इंद्रपाल सिंह व उसका भाई श्रीराम पीड़ितों एवं उनके गवाहों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करवाने में सफल हो गए।

कोतवाली खैर ने दिनांक 27 मई 2021 को एफआईआर नम्बर 266 पर धारा 147, 392, 452, 354, 323, 504, 506 जैसी संगीन धाराओं के तहत पीड़ितों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कर लिया है।

इस झूठे मुकदमे की आड़ में दबंग पीड़ितों पर दबाव बना रहे हैं समझौता न करने पर इस झूठे मुकदमे में पीड़ितों और उनके गवाहों को जेल भिजवाने की धमकी दे रहे हैं।

झूठे मुकदमे में इंद्रपाल सिंह की पुत्र वधू गीता पत्नी विष्णु ने पीड़ित परिवार के सभी पुरुष सदस्यों और मौके के गवाहों के अलावा पीड़ित परिवार की महिलाओ को भी आरोपी बनाया दिया है। पुलिस ने बिना छानबीन के पीड़ितों के खिलाफ लूटपाट छेड़छाड़ जैसी गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करके असंवेदनशीलता का परिचय दिया है।

इस झूठे मुकदमे को निरस्त करवाने और दबंगो के खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करवाने के अपराध में पीड़ित परिवार की महिला इंद्रेश ने माननीय मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक आगरा, पुलिस उपमहानिरीक्षक अलीगढ़ और एसएसपी अलीगढ़ को लिखित शिकायत भेजी है और मुख्यमंत्री जनसुनवाई एप पर भी शिकायत दर्ज करवाई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जनसुनवाई एप पर शिकायत नम्बर 400143210114110 पर शिकायत दर्ज कर पुलिस को उचित कार्रवाई हेतु भेज दी है।

“ये वादा है”

शैलेंद्र श्रीवास्तव


 शैलेंद्र श्रीवास्तव एक भारतीय फिल्म अभिनेता हैं, जो  कि मुख्य तौर से हिंदी सिनेमा में सक्रिय हैं। 

 सिनेमाघरों में हिट होने वाली कई फिल्मों में शैलेंद्र ने   अहम भूमिका निभाई है | 

 वे बहुचर्चित टीवी कार्यक्रम CID की टीम का भी   हिस्सा रहे हैं |



सखी

कल तुमने अपने

प्यारे हाथों से बनाए

और दिलकश सजाए 

व्यंजनों का 

व्हाटसएप से

चित्र भेजा था...

मुझे ललचाने का 

बहलाने, फुसलाने का

दिलकश और ऊमदा...

सामान भेजा था।

गोया तुम चाहतीं थीं...

खाने मैं घर पे चला आऊँ

वो सारा कुछ जो भी तुमने

तहे दिल से पकाया था

उसे खा लूँ...

और उसकी प्यारी सी ख़ुशबू

मैं दिल में जज़्ब भी कर लूँ

वो दिलकश सी बिरयानी...

वो ऊमदा हलीम...

वो चटपटे दही-भल्ले...

वो मीठी खीर और सब कुछ...

जो भी तुमने बनाया था...

मेरी ख़्वाहिश थी

आकर मैं ज़ुबाँ से

लुत्फ़ उसका लूँ

गुलाब और केवड़े

की प्यारी ख़ुशबू

दिल में मैं भर लूँ

मगर अफ़सोस... 

कुछ मजबूरियाँ हैं

आ नहीं सकता

वबा ने जो क़हर ढाया है

बतला भी नहीं सकता

जो मिलना दूर से दो गज़ से हो

वो मिलना... मिलना..  क्या...!!!

मैं दो गज़ दूर से मिलने

नहीं... मैं आ नहीं सकता

ढँका नक़ाब से चेहरा

हो तेरा भी और मेरा भी

नक़ाबपोश ये चेहरा

तुम्हें दिखला नहीं सकता..

मेरा वादा है तुमसे...

मिलने आऊँगा मैं उस दिन

गले मिलने के लायक़

हम हो जाएँगे जिस दिन

कि जब बन्दिशें होंगी नहीं

पहरा नहीं होगा

कि जब मेरा और तेरा भी

चेहरा खुला होगा

किसी के दिल पे कोई ज़ख़्म

जब गहरा नहीं होगा

कि जब महफ़ूज़ सब होंगे 

ये दुनियाँ पहले सी होगी

ज़रूर आऊँगा मैं उस दिन...

हाँ...मैं आऊँगा उस दिन..

ये वादा है...

               ये वादा है...

                             ये वादा है...

                  

Thursday, May 27, 2021

ख़्वाहिशों का बोझ

शैलेंद्र श्रीवास्तव

 शैलेंद्र श्रीवास्तव एक भारतीय फिल्म अभिनेता हैं, जो  कि मुख्य तौर से हिंदी सिनेमा में सक्रिय हैं। 

 सिनेमाघरों में हिट होने वाली कई फिल्मों में शैलेंद्र ने   अहम भूमिका निभाई है | 

 वे बहुचर्चित टीवी कार्यक्रम CID की टीम का भी   हिस्सा रहे हैं |



ख़्वाहिशों का बोझ 

ख़ामख़ा सर पे उठा रखा था...!

देश बन्दी में... 

शहर बन्दी में...

महामारी की बन्दिशों में

ये एहसास हुआ...

ज़रूरतें बहुत कम हैं अपनी...!

रोटी दो वक़्त की

दो कपड़ा जिस्म ढकने को

सर छुपाने को छत

या कोई हुज़रा...

एक अदद बिस्तर बस...

महामारी की बन्दिशों में

ये एहसास हुआ...

ज़रूरतें बहुत कम हैं अपनी...!







ख़ामख़ा बोझ लिए फिरते हैं...

बड़ी कारों का, बड़े बँगलों का

हो सामान सौ बरस का

ऐशो-आराम का...

सोने चाँदी के सारे बर्तन हों

हीरे मोती से जड़े गहने हों

महँगे कपड़े हों

महँगी घड़ियाँ हों

वग़ैरह... वग़ैरह... वग़ैरह...

महँगी घड़ियाँ 

क्या है वक़्त ये बतलातीं हैं

उलझा ग़र वक़्त हो 

सुलझा कभी ना पाती हैं

इत्र परफ़्यूम होते हैं

दूसरों के लिए...

लगा लो जिस्म पे 

कपड़ों पे चाहे जितना भी

ख़ुशबू ख़ुद को कभी नहीं आती...

आलमारी से झाँकते हुए

महँगे कपड़े

जिस्म ढकने से ज़्यादा

हम भी कुछ हैं

ये दिखाने के काम आते हैं

साज़ो-सामान सब नुमाइश है...

महामारी की बन्दिशों में

ये एहसास हुआ...

ज़रूरतें बहुत कम हैं अपनी...!

जिस्म जब छूटता है 

सब धरा रह जाता है...

साथ जाता नहीं कुछ

सब यहीं रह जाता है

जिस्म मिट्टी का है 

मिट्टी में ही मिल जाना है

कौन हैं... क्या हैं हम?

किसको यहाँ दिखलाना है

महामारी की बन्दिशों में 

ये एहसास हुआ...

ज़रूरतें बहुत कम हैं अपनी...!

मुश्किल इस दौर ने 

ये सबक़ सिखलाया है

जब यहीं छूटना है 

सब कुछ तो...

शान झूठी... अमीरी झूठी है

ख़ुद के कुछ होने का...

एह्सासे-ग़ुरूर झूठा है...

कोई बड़ा है, कोई छोटा है

ये फ़ासला भी सारा झूठा है

बेवजह...

कोई ज़रूरत ही नहीं...!

ग़र ज़रूरी है तो बस

आपसी रिश्ते अपने

जो कही खो गए हैं

ढूँढे से नहीं मिलते ही नहीं...

क़द्र कर लें...

कि कुछ मालूम नहीं 

साथ अपना कोई

किस लम्हा छोड़ जाएगा...!

ज़िन्दगी महफ़ूज़ हो

ज़रूरी है ज़िन्दगी के लिए...

आओ बन जायें मुहाफ़िज़

सभी अपनों के लिए

क्यूँकि बस प्यार ज़रूरी है

ज़िंदगी के लिए

भरोसा-प्यार की गारा मिट्टी

बहुत ज़रूरी है...

पुख़्ते रिश्तों के लिए

हम किसी का सहारा बने

कोई हमारा सहारा बने

भाई-चारा को छोड़

है नहीं कोई चारा...

बाक़ी फ़िज़ूल है...

फ़क़त दिखावा है...

महामारी की बन्दिशों में

ये एहसास हुआ

ज़रूरतें बहुत कम हैं अपनी...!

ज़रूरतें वाक़ई बहुत कम हैं अपनी...!

                   - 

कृषि कानून:किसानों की सुविधा या गले का फंदा

सौरभ सौजन्य

  

  वर्तमान में चारो तरफ हाहाकार मचा हुआ है किसान आंदोलन को 26 मई से 6        महीने पूरे होने जा रहे हैं पर किसानो और केंद्र सरकार का विरोध जारी है तो     आइए एक एक कर जानते हैं आखिर कौन कौन से हैं यह कानून और क्या उनकी    खामियां




कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य ( संवर्धन एवं सुविधा) अधिनियम- 2020 की हकीकत

जी हाँ यह पहला कृषि कानून है इसीतरह की कुछ व्यवस्था बिहार में मौजूद है बिहार में 2006 में एपीएमसी एक्ट खत्म कर दिया था, वहां की स्थिति बद से बदतर है। वहां एमएसपी से आधे रेट पर उपज बिकती है। अगर शुरू में कुछ दे भी दिया तो बाद में समस्या बढ़ जाती है। मसलन कुछ कंपनियों ने जैसे नेट का डाटा शुरू में फ्री में दिया, बाद में रेट बढ़ा दिए। ऐसे में जो पोर्ट कराकर आए और पुरानी कंपनियों में जाना चाहा, तब तक पुरानी दुकानें बंद हो चुकी थीं। ऐसी ही हालात किसान की हो जाएगी। न मंडियां होंगी न एफसीआई बचेगा। साथियों इसीप्रकार का एक और प्रत्यक्ष उदाहरण बताता हूँ महाराष्ट्र में तो पहले से ही प्राइवेट मंडियां हैं, वहां तो दाम नहीं मिल रहा है न?

किसानों को सरकार गुमराह कर रही है महाराष्ट्र में तो पहले से ही प्राइवेट मंडियां हैं, वहां तो दाम नहीं मिल रहा है। कपास पर एमएसपी नहीं मिल रही। नीचे बिक रही है। जिस चीज के दाम बढ़ने लगते हैं सरकार उसका आयात करवा लेती है और दाम नीचे चला जाता है कृषि अर्थशास्त्री देवेन्द शर्मा इस पर टिप्पणी करते हैं की "कॉरपोरेट (अडानी/अम्बानी) आएगा तो छोटे किसान बाहर होंगे

जब कॉरपोरेट आएगा तो छोटे किसान बाहर होंगे। किसान यह बात समझता है। अगर अमेरिका का उदाहरण लें तो 1970 के दशक से अभी तक 93 फीसदी डेयरी फॉर्म बंद हो चुके हैं।फिर भी अमेरिका में दूध का उत्पादन बढ़ा है। क्योंकि कॉरपोरेट की एंट्री हो गई है। यही हाल भारत में होगा, क्योंकि ये मॉडल हम वहां से लेकर आए हैं। कॉरपोरेट फायदे में रहेगा इसलिए उछल रहा है।"

इसके बाद नम्बर आता है कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन अनुबंध एवं कृषि सेवा पर करार अधिनियम-2020 का!

यह कानून भी बड़े गतिरोध का कारण है चूंकि इसी में कांट्रेक्ट फार्मिंग या अनुबंध खेती की बात की गई है कृषि के क्षेत्र में अधिकांश फसलों में उत्पाकदता में प्रथम स्थान रखने वाले राज्य पंजाब में कांट्रेक्ट फार्मिंग लंबे समय से हो रही है कंपनी अपने महंगे बीज देती है खाद और दिशानिर्देश भी देती है किसान नकदी फसलों की ओर भागता है कंपनी अपने हिसाब से खेती कर आती है खाद्यान्न संकट न बढ़ जाए। लागत बहुत लग जाती है। खुद के बीज भी खत्म हो जाएंगे। गुणवत्ता के आधार पर नहीं भी खरीदती है।कंपनी उसे खरीदने के लिए नखरे करती है उसी गुणवत्ता में पहुंचाना होता है किसान उतना तकनीकी जानकर नहीं के मानकों पर खरा उतर पाए। पंजाब में किसानों का माल कंपनी ने नहीं खरीदा तो खुले बाजार में भेजना पड़ा।अगर इस प्रकार हुआ तो इसके अनेको दुष्प्रभाव होंगें जैसे पूरे के पूरे गांव में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से गांव में खाद्यान्न संकट आ सकता है एक जगह एक ही तरह की फसलें होने लगेंगी।आपको बताते चले की कांट्रेक्ट की सबसे पहले पंजाब में ही लोगों ने अनुबंध खेती से हाथ खींचे बस आप हमें एमएसपी दीजिए इसके नीचे खरीद गैरकानूनी करें पूरी दुनिया में किसान बाजार के उतार-चढ़ाव से ही परेशान हैं।किसान एक निर्धारित मूल्य चाहता है आज किसान को सीधे समर्थन की जरूरत है किसान की अब आम 18000 रुपये प्रतिमाह हो। पीएम किसान निधि की योजना अच्छी पहले किसान आए मांग रहा है और उन्हें बाजार के हवाले कर देते हैं। क्या अर्थशास्त्रियों और नौकरशाहों का वेतन पैकेज भी बाजार के साथ लिंक किया जा सकता है? अगर बाजार इतना अच्छा है तो इन्हें क्या दिक्कत है? किसान को भी दिक्कत नहीं होगी।

आवश्यक वस्तु (संशोधन)

इसका प्रभाव यह होगा की इसमें पूंजीगत स्टॉक करेंगे, जहां सस्ता मिलेगा वहां से ले लेंगे। सस्ता आयात करके सस्ता बेचने से देश के किसान का माल खरीदेगा कौन? किसान को और सस्ते से में बेचना पड़ेगा। एक तरह से मार्केट को कंट्रोल कर लेंगे। निजी कंपनियों के इशारों पर मार्केट का रेट तय होगा। मिलावट भी बढ़ेगी अभी आरती कम कर रहे हैं जब बड़े लोग आ जाएंगे तो कंट्रोल बिल्कुल भी नहीं रहे हो।

प्रावधान है कि अनाज के 50 प्रतिशत दाम बढ़ने पर सब्जी और फल में 100 प्रतिशत दाम बढ़ने पर वह तिलहन दलहन में 50 प्रतिशत से अधिक दाम बढ़ने पर सरकार दखल देगी लेकिन सरकार तय करेगी। दाम एमएसपी से कम न मिलें। अब बाजार में दाम बढ़ने शुरू हुए तो सरकार ने आयात शुरू कर दिया जबकि विदेशों में ऐसा नहीं होता। निजी कंपनी आएंगे तो जितनी दाल मिल को साल भर की जरूरत होगी तो उतनी इखट्टा करके रख लेंगी।किसानों से नया खरीदने पर उनका नुकसान होगा, निर्यात होगा तो वह उपभोक्ता पर मार पड़ेगी। अगर कंपनी निर्यात के लिए खरीद रही है तो कानून नहीं लागू होगा। जब जो स्टॉक बनाकर रख लेगा। वह उसे निकालकर फसल के समय बाजार में दाम गिरा देगा, और फिर स्टॉक कर लेगा इस पर सरकार कैसे नियंत्रण करेगी?

जब स्टॉक लिमिट नहीं होगी तो जितना मर्जी हो आप स्टॉक कर लो। उपभोक्ता को तो उतना नुकसान नहीं होगा क्योंकि जब कीमतें बढ़ती हैं तो सरकार आयात करके दुकानें खोलती हैं। जब सस्ता होता है तो सरकार ने क्या किया? जब किसान अपना उत्पाद सड़कों पर फेंकता है तो सरकार ने क्या किया? क्या किया प्राइवेट प्लेयर्स ने?

इन परिस्थितियों में पहले से बर्बाद किसान और बर्बाद हो जाएगा अगर आज इन कानूनों की वापसी न हुई तो हमारी आने वाली पीढ़ी को हम क्या जवाब देंगे? उठो और स्वर बुलंद कर दो |

टिप्पणीकार चन्द्रशेखर आज़ाद कृषि विवि कानपुर के स्कॉलर एवं लगातार 3 बार यूपी छात्र संघ अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं |

इनफ्लुएंजा का सटीक इलाज है योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा : डॉ.बिश्वरूप राय चौधरी

उत्तरप्रदेश योगासन खेल संघ एवं इंटरनेशनल नेचुरोपैथी आर्गेनाइजेशन के सयुंक्त तत्वाधान से आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यान माला भाग 2 के सातवें दिवस पर  DIP डाइट के लिए विश्व प्रसिद्ध, इंडो वियतनाम मेडिकल बोर्ड के निदेशक, डॉ.विश्वरूप राय चौधरी ने अपने व्याख्यान में बताया कि वायरस की कोई दवा नहीं होती है, निमोनिया, इनफ्लुएंजा (ILI) खांसी,जुखाम आदि बीमारियों का समुचित इलाज प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा संभव है |

डॉ.चौधरी ने बताया कि जब शरीर में कोई बाहर का वायरस प्रवेश करता है तो शरीर उसे रोकने के लिए शरीर टेंपरेचर बढ़ाता है, लेकिन हम अज्ञानतावश कुछ दवाइयां खाकर शरीर के टेंम्परेचर प्रभाव को कम करके उस वायरस को अपने शरीर में पालने का काम करने लग जाते हैं इसके फल स्वरुप हम अपने शरीर में और अन्य बीमारियों को जन्म देने लगते हैं उन्होंने बताया की नारियल पानी का सेवन बुखार की अवस्था में लेने पर बहुत ही लाभकारी है, और हम योग, प्राणायाम का अभ्यास कर अपने इम्यूनिटी  को बढ़ा सकते हैं।

राष्ट्रीय वेबिनार में मुस्कुराए कानपुर फोरम की सचिव व समाजसेविका,डॉ. कामायनी शर्मा ने अतिथि परिचय के साथ-साथ उत्तर प्रदेश योगासन खेल संघ को इस समाज उपयोगी वेबिनार कार्यक्रम के लिए धन्यवाद दिया साथ ही कहा कि सभी लोगों को योग और प्राकृतिक जीवन शैली का पालन करके अपने जीवन को सुख में और निरोगी बनाना चाहिए।

इस राष्ट्रीय व्याख्यान माला में उत्तर प्रदेश योगासन खेल संघ के महासचिव आचार्य विपिन पथिक,आचार्य सोनाली धनवानी, INO के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनंत बिरादर, डॉ. नन्द लाल जिज्ञासु, खेल संघ की अध्यक्ष,डॉ. विजयलक्ष्मी जायसवाल,डॉ. उर्मिला यादव ,अंजू बाला भसीन,दीक्षा गुप्ता,कंचन गुप्ता,अंजली बागपत, सुमन नंदा आदि मौजूद रहे।

उत्तर प्रदेश योगासन खेल संघ के कोषाध्यक्ष अभय सिंह ने बताया कि दिनांक 27 मई को पुणे के डॉ जीतेन्द्र आर्य जी प्राकृतिक चिकित्सा से बीमारी उपचार विषय पर अपना व्याख्यान देंगे जिसे खेल संघ की फेसबुक पेज UPYSA पर देखा जा सकता है।

India's domestic gasoline consumption had staged a strong rebound to 8 million mt in fourth quarter 2020 from a low of 5 million mt in Q2 2020, Petroleum Planning and Analysis Cell data showed.

The author of this article is Mr. Narinder Wadhwa, President at Commodity Participant Association of India, CPAI 

Changing dynamics of commoities amid covid

The exponential surge in India's COVID-19 cases has affected the country's energy, metals and agriculture markets; it has also cast a shadow on the international price outlook of some commodities.


With India reporting about 300,000 cases daily for many consecutive days, there is a more likelihood of lower consumption numbers of some commodities.

OIL: India would witness a year-on-year oil demand growth of 400,000 b/d in 2021, lower than an earlier estimate of 440,000 b/d according to experts.

With lockdowns like restrictions in major cities and industrial places and work from home mode of working, the demand from oil will be less.

India's domestic gasoline consumption had staged a strong rebound to 8 million mt in fourth quarter 2020 from a low of 5 million mt in Q2 2020, Petroleum Planning and Analysis Cell data showed. As some surveys by some global research agencies, the  demand slipped to 7.8 million mt in Q1 this year and was expected to pull back sharply to 6.5 million mt or lower in Q2.

Regional lockdowns threaten mobility and industrial activity. Refiners are reported to have cut run rates marginally. The Run rates remained good until March, with average runs rising to 99% in March from 97% in February.

The aviation and industrial fuel demand will take a hit.  Some refineries may cut jet fuel and diesel output as. Some of the major construction projects were reported to have been put on hold in an effort to avoid crowded work environments.

GAS: Likewise, country’s city gas demand could drop by 25%-30% in the coming months. LNG regasification volumes are reported to be down by more than 10%. Higher inventories are further reported at Dahej and Hazira. Contracted cargoes may not have been cancelled however the spot demand is said to have been affected

Steel: Steel production may be least affected .

Tata Steel, JSW Steel and ArcelorMittal Nippon Steel India have announced plans to supply oxygen for medical use.

Despite the tumble in the automotive sector, hot-rolled coil prices remain high in India even as domestic steelmakers step up efforts to supply liquid medical oxygen to offset the strain caused by the surge in COVID-19 infections.

Steel consuming sectors were, however, undergoing a greater degree of operational cuts due to the oxygen shortage. Maruti Suzuki and Hero MotorCorp, recently announced temporary production shutdowns.

The Pandemic situation could potentially disrupt pellet exports. The Indian seaborne pellet prices are facing rising pressure . At the ports, the loading operations are likely to be affected  due to manpower shortage.

Agriculture: Agriculture and allied activities have been exempted from government restrictions so far, several markets remain closed. Micro and   local level restrictions have stagnated market demand for agricultural commodities in some pockets

• Rabi crop and harvest is expected to be good. However the storage and transportation could be tricky under current circumstances.. Hopefully, the good harvest will have salutary impact. During the previous year, it was positive
• Agricultural exports for commodities, such as sugar, are steady. The sugar stocks have been seeing upward trend.
• .Almost three fifth of the country's palm oil consumption comes from hotels, restaurants and food catering sectors. The demand may be affected.
• With some markets shut and supplies remaining tight, domestic wheat prices had risen in other trading centers. In Rajasthan's key market, Jaipur, wheat prices increased to nearly Rupees 18,742/ mt ($250/mt) against around Rupees 17,769/mt at the beginning of April.
• According to USDA Attache, the Wheat exports from India during the year 2021-22 could be at 2 million MT , 26% lower compared to previous year
• At Indore , the  major trading center in Madhya Pradesh state , the demand of wheat has been hit as the market is shut due to the lockdown imposed by the state government.
• The  farmers may find it difficult to sell to private traders due to localised restrictions of movement of people and goods. The market participants in physical markets  opine that the  total wheat procurement by the government from farmers could exceed expectations as. This could potentially tighten supply in the open market and lead to a rise in domestic prices.

Oilseeds & Impact on Cotton - The edible oil pack gave phenomenal returns in FY21, with crude palm oil topping rising  as much as 73%. Soybean was also a major gainer, with the price jumping 63 per cent followed by soy oil (58 per cent).

Farmers could be more inclined towards cultivating oilseed crop against other kharif crops such as cotton, which can give good returns in the latter part of the year on any decline in acreage compared with last year.


Tuesday, May 25, 2021

अधिकारियों को व्हाट्साएप ग्रुपों से दूरियाँ बनाना उचित या अनुचित

श्याम सिंह पवार  Hkkjrh; izs"k ifj"kn

fMftVy ;qx esa i=dkfjrk djus dk rjhdk vFkok i=dkfjrk ds eapksa dh Noh ij lokfy;k fu’kku yxrk fn[k jgk gS] gj rjQ NksVh cM+h ?kVuk yksxksa rd tYn ls tYn igqap jgh gSA ysfdu og fdruh fo’oluh; gS ;g dksbZ dqN dg ugha ldrk\

     'kksly IysVQkeksaZ ij izlkfjr vuko’;d lans’k o [kcjsa yksxksa dh ijs’kkuh dk dkj.k curs fn[k jgs gSaA esjk ekuuk gS fd mPPkkf/kdkfj;ksa dks og~Vli xzqiksa ls cgqr igys gh nwfj;ksa cuk ysuh pkfg;s D;ksafd vDlj ns[kus dks fey jgk gS fd og~Vli xzqiksa esa iz’kkfjr fd;s x;s xSj ftEesnkjkuk lekpkjksa vFkok muls lEcfU/kr fyadksa dks i<+dj eu ef"rLd ij Hk; ns[kus dks feyrk gS vkSj tYnckth esa ,sls QSlys ys fy;s tkrs gSa tks  vuqfpr gksrs gSa vkSj ftlls dbZ funksZ"k O;fDr;ksa ds f[kykQ dk;Zokgh gks tkrh gS rks dbZ nks"kh cp tkrs gSa vFkok dbZ vf/kuLFk deZpkjh vuko’;d gh cyh dk cdjk cu tkrs gSaA

     dbZ ekeys ,sls ns[kus dks feys dh og~Vli xzqiksa vkSj 'kks’ky IysVQkeksaZ esa [kcjsa pkyk;h x;h vkSj tc ns[kk fd tYnckth esa xSj ftEesnkjh okyk dzR; gks x;k rks mls u"V ¼fMyhV½ dj nsrs gSaA ;g Hkh ns[kus dks fey jgk gS fd vusdksa yksx ,d gh [kcj dks og~Vli xzqiksa esa Mky nsrs gSa vkSj mlds ckjs esa ;g tkudkjh tqVkuk eqf’dy Hkjk gksrk gS fd ;g iksLV@lUns’k@[kcj fdlus Mkyh vkSj mls fdlus fdlus QkoZM fd;kA vf/kdkfj;ksa dks pkfg, fd iqf"Vdkjd] ftEesnkj o fo’oluh; eapksa ij gh Hkjkslk djsa D;ksafd vxj og dqN vuqfpr vFkok xSj ftEesnkjh okyh [kcj pyk;saxs rks mUgsa vklkuh ls fpfUgr fd;k tk ldrk gS vkSj dkuwu ds nk;js esa mu ij dk;Zokgh dh tk ldrh gSA bu fnuksa ns[kus dks fey jgk gS fd jkSc vFkok HkkSdky tekus ds pDdj esa fo’ks"k dj ;qok oxZ vius dks izs"k vFkok ehfM;k ls tksM+dj i=dkj fn[kkuk pkgrk gS tcfd T;knkrj mu dfFkr i=dkjksa dks dkWih isLV&QkoZfMax ds vykok dqN djuk ugha vkrk ysfdu Lo;a dks dgykrs gSa ofj"V i=dkjA ,sls i=dkjksa ds f[kykQ dqN Bksl uhfr cukus dh vko’;drk gS tks i=dkfjrk dks cnuke dj jgs gSa vkSj izs"k dkMZ dk nqiZ;ksx dj jgs gSaA ykWdMkmu ds nkSjkuk izs"k dkMZ cukus okyksa dks /ka/kk dqN T;knk gh ped mBk D;ksafd yksx blh fy, dkMZ cuok jgs gSa fd iqfyl mUgsa u jksdsA vDlj ns[kus dks Hkh fey jgk gS fd vius okguksa esa izs"k dk LVhdj yxkdj ?kweus okys O;fDr;ksa dh la[;k c<+ x;h gS vkSj iqfyl okys mUgsa blfy, NsM+rs ugha fd irk ugha dSlk i=dkj gksA

     ,sls esa ,d rks i=dkfjrk dh Noh ij iz’u yxrk gS nwljh  vksj ncko ds pyrs dbZ funksZ"k O;fDr jkSan fn;s tkrs gSa ehfM;k laLFkkuksa dks bl vksj /;ku nsuk pkfg;s fd oks ,sls yksxksa ds izs"k dkMZ u cuk;sa tks flQZ HkkSdky cukus ds fy, gh i=dkj cuuk pkgrs gSa ;k izs"kdkMZ dh vkM+ esa ,sls d``R; djuk pkgrs gSa tks ns’k lekt ds fy, mfpr ugha gS] cfYd mUghsa yksxksa dks izs"k dkMZ tkjh djsa tks lekt ds ncs dqpys 'kksf’kr vkSj ihfM+r yksxksa dh leL;kvksa dks mBkuk pkgrs gksa ;kuh fd okLro esa i=dkfjrk djuk pkgrs gksaA ns[kus dks fey jgk gS fd iqfyl vf/kdkfj;ksa us vkt og~Vli xzqiksa dks vyfonk dg fn;k gSA 'kk;n mUgksaus vPNk o ljkguh; dne mBkrs gq, vkt dh ?kfB;k i=dkfjrk dks vkbZuk fn[kk;k gSA 


Saturday, May 22, 2021

मुनमुन दत्ता की भाषा पर भांगड़ा

लेखक - राकेश अचल 

एक लोकप्रिय धारावाहिक की अभिनेत्री यदि जाने,अनजाने किसी जाति विशेष से जुड़े सम्बोधन का इस्तेमाल कर दे हमारी सोसायटी तिल का ताड़ बना लेती है.लेकिन दूसरी तरफ जब हमारे नेता जाति के आधार पर टिकिट देने से लेकर राष्ट्रपति चुनने तक के लिए जाती को आधार बनाते हैं तो सबको सांप सूंघ जाता है. समाज के इसी दोगले चरित्र की वजह से देश आगे नहीं बढ़ पा रहा है ,आगे बढ़ने की फुरसत ही नहीं है किसी के पास . मैंने पिछले तीन महीने से चूंकि टीवी देखा नहीं है इसलिए मुझे पता नहीं की मुनमुन दत्ता ने किसके  लिए क्या कह दिया ?लेकिन आज जब पूरे मामले को खंगाला तो खोदा पहाड़ और उसमें से निकला एक मरा हुआ विवादों का चूहा .

कहते हैं कि टीवी सीरियल 'तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा' फेम मुनमुन दत्ता  को जातिसूचक शब्‍द का इस्‍तेमाल बहुत महंगा पड़ा है। ऐक्‍ट्रेस पर अब गिरफ्तारीकी तलवार लटक रही है। मुनमुन के ख‍िलाफ हरियाणा में गैर जमानती धाराओं मेंअजा.जजा  ऐक्‍ट के तहत एफआईआर दर्ज हो गई है।


मुनमुन के ख‍िलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में श‍िकायत दर्ज हो रही है। जालंधर में भी दलित संगठनों के उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है और कार्रवाई नहीं किए जाने पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। 'बबीता जी' यानी मुनमुन दत्ता के खिलाफ नेशनल अलायंस फॉर शेड्यूल क्लास हयूमन राइट्स के संयोजक रजत कलसन ने श‍िकायत दी थी। इसी को आधार बनाकर थाना शहर हांसी की पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।

मुनमुन दत्ता कोई बहुत बड़ी अभिनेत्री नहीं हैं लेकिन हिंदी पट्टी में उन्हें पहचाना जाता है .शिकायत करता आजकल  कोरोनाकाल में फुरसत में हैं इसलिए उन्होंने मुनमुन का इंस्ट्राग्राम  पढ़ लिया .शिकायत करता में साहस नहीं है कि वो देश में आग उगलने वाले किसी नेता के खिलाफ अदालत की शरण में जाएँ या किसी थाने का दरवाजा खुलवा लें . इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में मुनमुन दत्ता ने कहा था कि उन्होंने मस्कारा, लिप टिंट और ब्लश लगाया है, क्योंकि वह यूट्यूब पर आने वाली हैं और अच्छी दिखना चाहती हैं। इसके बाद उन्होंने एक जाति का नाम लेकर कहा था कि वह उनकी तरह नहीं दिखना चाहतीं। मुनमुन दत्ता के इसी वीडियो पर बवाल मच गया है।

मुनमुन इस तरह के पचड़े में पड़ने वाली कोई पहली कलाकार नहीं हैं. इससे पहले भी कीकू जैसे हास्य कलाकार और दुसरे लोग भी इस तरह के विवादों में उलझ चुके हैं .मुनमुन ने भी इस मामले में माफी मांग ली है और इससे ज्यादा कुछ होना भी नहीं है लेकिन तिल के ताड़ तो खड़े किये ही जाते रहेंगे .मुनमुन के प्रति मेरी सहानुभूति केवल इसलिए है क्योंकि वे एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं,मॉडल हैं.उनसे गलती होना थी सो हो गयी. वे नहीं जानतीं कि इस देश में लोग कितनी फुरसत में हैं. 

जाति सूचक शब्द अपमान का कारण कब से बन गए ये जान्ने के लिए आपको इतिहास के कुछ पन्ने पलटने पड़ेंगे .जिस देश में काम को छोटा-बड़ा और जाति सूचक माना जाता हो वहां मुनमुन जैसो को तो मरना ही है .जागरण और नव जागरण के नाम पर ही ये सब होता है,जबकि जमाना बदल चुका है .मांस का व्यापार अब ब्राम्हणों के हाथ में हैं लेकिन उन्हें कोई कसाई नहीं कह सकता ,हाँ कसाई को कसाई कहने से अपमानजनक स्थितियां बन सकती हैं गांधी जी ने दलितों के लिए हरिजन शब्द का इस्तेमाल शुरू किया था.भाई लोगों को ये भी नहीं जांचा तो इस शब्द को बदलकर दलित कर दिया गया.फिर भी जब मन नहीं भरा तो इसी शब्द को अनुसूचुत जाति/जनजाति कर दिया गया .सवाल ये है कि क्या सम्बोधन बदलने से हालात भी बदल गए हैं क्या ?

मेरे ख्याल से हमें इन्हें छुद्रताओं से आगे निकलना पडेगा .जाति हमारे विकास की,हमारी एकता की ,हमारे राष्ट्रप्रेम की सबसे बड़ी बाधा है .भारत के शहरों में जाति भेद कम हुआ है लेकिन शहरों में स्थितियों में बहुत ज्यादा अंतर नहीं आया है और इस अन्तर को इस तरह के बेसिर-पैर के विवाद बढ़ाते रहते हैं .मुनमुन ने जो किया ,उसे वो नहीं करना चाहिए था लेकिन अब क्षमा याचना के बाद मुनमुन के साथ जो हो रहा है वो भी नहीं होना चाहिए था .

भारत जैसे देश में जहाँ आदमी तो आदमी मृत देहों को सम्मान हासिल नहीं है वहां जाति के नाम परकानूनी मल्ल्युद्ध करना सिवया मूर्खता के क्या है ?समाज के लिए लड़ना जरूरी है लेकिन इस तरह की लड़ाइयों से किसी समाज को कुछ हासिल नहीं हो सकता .हमारे समाज में कहावतें इतनी पुरानी हैं कि यदि आज आप उनका इस्तेमाल करें तो मुनमुन की तरह आरोपी बन जाएँ ,लेकिन मै इसे गलत मानता हूँ. अब कोई कहे कि 'तेली का काम तमोली से' नहीं करना चाहिए तो इसमें क्या बुरा है .या ' धोबी का कुत्ता,घर का न घाट का ' कहने से किसका अपमान हो रहा है ?या हलुआ मिला न मांडे,दोऊ दीन से गए पांडे ' भी कहना खतरनाक हो सकता है .

मेरे अपने मित्र मंडल में अनेक अनुसूचित जाति/जनजाति के मित्र हैं ,वे मुझे अक्सर पंडित कहते हैं लेकिन मै कभी बुरा नहीं मानता क्योंकि मै जानता हूँ कि अब्बल तो मै पंडित हूँ नहीं और अगर किसी ने मुझे पंडित कह भी दिया तो इससे मेरी पहचान में न कोई कमी आने वाली है और न इजाफा होने वाला है .मैंने आजतक अपने किस साथी के लिए जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया .मुझे लगता है कि यदि कोई इस सबसे सहज नहीं है और आहत होता है तो इन शब्दों के इस्तेमाल से बचा जाना चाहिए .मुनमुन को भी बचना था लेकिन बेचारी को कहाँ पता था कि लोग उसे हवालात भेजकर ही संतोष का परम अनुभव करेंगे .

जो भी हो भाषा के इस्तेमाल के मामले में जितने हमारे देश के नेता हिंसक हैं उतनी मुनमुन नहीं है. कोई दुसरे लेखक या बिरादरी वाले नहीं हैं इसलिए आज के संक्रमणकाल में सभी को ,पुलिस को भी इस सबके प्रति सजग रहना चाहिए तभी देश आगे बढ़ेगा ,अन्यथा नौ दिन चले अढ़ाई कोस  की बात  हमारे ऊपर हमेशा लागू होती रहेगी. 


Friday, May 21, 2021

SURYA NAMASKAAR the real vaccine against Covid19

I am Pratyasha from Howrah, West Bengal.  I am Student of DPS Howrah today I am  introducing you all about Surya Namaskar one of most scientific and  worldly practice yoga for immunity booster of since vedic ages people specially for children. As per medical report Covid19 third wave will affect our children and our children should be strong enough  physically and mentally to minimize the threat. Surya Namaskar can helps them to be strong in physical and mental health and by regular practice  in early morning it will helps our breathing and we will be active throughout the day. .
Remember a healthy lifestyle and  habits can protect us from this pandemic. 
So stay healthy and safe.
l.


 





Advt. Space


संभल कर सांस लेना इस हवा में

 

संजय शर्मा "सिफ़र"

संभल कर सांस लेना इस हवा में कुछ घुला सा है 
परिंदे भी नहीं दिखते फ़िज़ा फिजाँ में क्यों धुआँ सा है |

सड़क खामोश सी क्यों हैं कोई आहट नहीं होती 
गली के मोड़ पर ठहरा हुआ ये क्या कुहासा है |

कहीं से कहकहे का शोर कहीं हैं सिसकियाँ घुटती
तुम्हारे शहर का मौसम बड़ी एक बद दुआ सा है |

नहीं अब बोले है कोई सभी दिखते हैं जल्दी में 
निगाहों में लिखा है कि हुआ कुछ हादसा सा है |

उन्हें शोहरत की बस अपनी ही फ़िक्रे खाये जाती हैं 
ज़मीं को रौदने वाले तुझे कुछ भ्रम हुआ सा है |

संभालो अब ये घर अपना के तूफान आ के रहना है 
हवा का रुख सिफ़र अबकी दिखे कुछ अलहदा सा है |

 

Tuesday, May 18, 2021

बेजुबानो की खीर पार्टी

आज दिनांक 18 मई को  "टीम कानपुर फ़ॉर वॉइसलेस" ने गोविंद नगर और दादानगर क्षेत्र में करीब 150 डॉग्स की खीर पार्टी कराई!

STARS NGO (स्पेशल ट्रीटमेंट फ़ॉर एनिमल्स एंड रेप्टाइल्स ) की संचालक तमन्ना सेठी व रमित सेठी के मार्गदर्शन में भूखे श्वानों को खीर भोज गोविंद नगर, दादानगर के क्षेत्र में कराया गया!

टीम कानपुर फ़ॉर वोइसलेस के कोऑर्डिनेटर गौरव बाजपेई (गौरैय्या बचाओ) ने बताया कि "भूख तो सभी को लगती है" कोरोना काल की समस्याएं सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि बेजुबान बेसहारा प्राणी जो हमारे घरों के बाहर घूमते हैं और सीधे तौर पर इंसान पर ही आश्रित होते हैं यह बेचारे भी इस महामारी का दंश झेल रहे हैं!

 हां यह बीमार जरूर नहीं हो रहे, लेकिन यह भूख से बेहाल हैं! आप सभी को याद होगा जब स्थितियां सामान्य थी, शहरों  में सड़कों और गलियों में चहल-पहल थी, खाने-पीने के ठेले लगते थे, तब वहां से यह बेसहारा जानवर जैसे कुत्ते और गोवंश  अपना पेट जूठन से भर कर अपनी जिंदगी चला लेते थे ! 

पर आज शहर पूरी तरह से शांत है, ठेले नहीं लग रहे हैं, रेस्टोरेंट बंद है, ढाबे बंद है! कहीं से खाने-पीने का कोई सामान मुहैया नहीं हो पा रहा हैऔर इसका सबसे ज्यादा असर इन बेजुबान जानवरों को झेलना पड़ रहा है क्योंकि यह मूल रूप से जूठन और भोजन की बची खुची सामग्री पर ही पेट की आग बुझाने के लिए निर्भर होते थे !

अतः अब यह मानव समाज का नैतिक कर्तव्य बनता है कि इन भूखे प्राणियों के बारे में सोचें क्योंकि भूख तो सभी को लगती है! बार-बार लगती है! इसका कोई अंत नहीं होता! 

शहर वासियों के घरों से नियमित तौर से बासी भोजन, जूठन और फलों और सब्जियों के छिकले निकलते हैं !किंतु यह घरों में ही कूड़े में मिल जाते हैं या  सड़क पर कूड़े में फेंक दिए जाते हैं , जहां यह पशुवों के हक का भोजन कुचल जाता हैं या खुले में पड़े होने के कारण सड़ जाते हैं!

 और यह पदार्थ जो एक जानवर की भूख मिटा सकते थे वह व्यर्थ हो जाते हैं , अतः आप सभी सम्मानित नगर वासियों से अनुरोध है कि आप अपने घर से निकलने वाले बासी भोजन जूठन और फलों सब्जियों के छिक्कलों को घर के बाहर किसी साफ स्थान पर रख दें , जैसे ही यह पदार्थ आपके घर से निकलते हैं! ताकि आपके घर के बाहर से निकलने वाला एक भूखा प्राणी उसे खा कर के अपनी थोड़ी सी भूख मिटा सके और वह पदार्थ जो किसी प्राणी के कार्य आ सकता था हमारी लापरवाही से व्यर्थ ना जा सके । ऐसा सब करेंगे तो कोई बेजुबान बेसहारा प्राणी भूखा नही रहेगा!

अपनी भूख तो सबको दिखती है पर शहर में ऐसे कई कर्मवीर भी हैं जो अपनी भूख से ज्यादा इन बेजुबान जानवरों की भूख को तवज्जो देते हैं आज हम आपको ऐसे कुछ प्राणियों के हितेषी हो से मिलाने वाले हैं।

टीम कानपुर फ़ॉर वॉइसलेस के ये सभी सदस्य अपने अपने संसाधनों को विकसित करके प्रतिदिन करीब 700- 1000 चौपाये जानवरों का पेट भरने का कार्य कर रहे हैं!

Advertisement

इसमे से कई सदस्य अपने खुद के NGO भी चला रहे हैं और बहुत से सदस्य यह कार्य व्यक्तिगत रूप से पूरी निष्ठा के साथ कर रहे हैं!! 

तमन्ना सेठी गोविंद नगर, दादानगर में

प्रखर तिवारी शिवाला में 

मनहर कांत , पल्लवी शुक्ला शास्त्री नगर में

मयंक त्रिपाठी और मयंक अवस्थी बर्रा में

 आशुतोष त्रिपाठी अमन शुक्ला, अंकिता यादव ,किदवई नगर में

दीपक राणा (लाल बंगला/ श्याम नगर)

कनिका बजाज ( गोविंद नगर)

 कनिका मिश्रा (पांडु नगर) 

दीपिका जी (यशोदा नगर)

सोनम महेश्वरी (तेजाब मिल कम्पाण्ड)

ज्ञानेंद्र अवस्थी / सुशील पांडेय (पनकी)

 नैनप्रीत कौर (गुमटी) 

आकृति राजपाल ( शाश्त्री नगर ) शुभांगी सरावगी ( श्याम नगर) कल्याण सरकार ( पनकी)

 हेमानी श्रीवास्तव (पांडु नगर) 

गौरव अपर्णा बाजपेई ( हूला गंज)

सचिन गौड़ (कमला टावर )

अर्पित जैन ( बादशाही नाका)

यह सभी कार्यकर्ता रोज अपने स्तर पर अपने घर के आस-पास के क्षेत्रों में जाकर के भूखे श्वानों व कुछ हद तक गौवंशों को भोजन कराने का नियमित कार्य इस लॉकडाउन के पीरियड में भी कर रहे हैं !

साथ ही  घायल होने की स्थिति में उनकी चिकित्सकीय मदद  भी कर रहे हैं  यह सारी मदद यह अपने स्वयं के संसाधनों से करते हैं इसके लिए उन्हें सरकारी कोई भी मदद नहीं मिलती है!

 इसके अलावा भी शहर में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें हम नहीं जानते किंतु वह प्राणियों की भूख के दर्द को समझते हैं और अपने स्तर पर फीड करा रहे हैं इसके बावजूद यह संख्या बहुत कम है समाज में हर व्यक्ति को यह समझना होगा कि जब वह अपने घर से निकलने वाले, उसके लिए व्यर्थ हो चुके पदार्थों को ही , यदि इन बेजुबानों के पेट तक पहुंचा दें तो शहर का कोई भी बेजुबान भूखा नहीं सो सकता भूख से व्याकुल नहीं हो सकता!!



पशुओं की सेवार्थ समर्पित मिशन अंत्योदय

आज दिनांक 18 मई को " मिशन अंत्योदय " के तहत ग्वालटोली स्थित कार्यालय से विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए पशु प्रेमियों , सामाजिक कार्यकर्ताओं को बेसहारा पशुओं के पानी पीने हेतु चरही का वितरण किया गया।मिशन अंत्योदय के संस्थापक देव कबीर ने कहा कि बेसहारा पशुओं के प्रति हमारी संवेदनाएं लगभग मर चुकी हैं ।


हमें नहीं लगता कि इन्हें भी भूख लगती है, इन्हें भी पीने के लिए पानी चाहिए , आराम करने की जगह चाहिए, दवा और इलाज चाहिए , लोगों का प्रेम चाहिए । बेसहारा जीवों की इस नाकदरी के कारण ही  प्रदूषण फैलता है , बीमारियां बढ़ती हैं मनुष्य तमाम रोगों और आपदाओं का शिकार होता है । इन  बिंदुओं को दृष्टिगत रखते हुए  " मिशन अंत्योदय " के तहत 10  - लोगों को चरही का वितरण किया गया । आगे भी इस मुहिम को जारी रखा जाएगा । यदि लोगों का आपेक्षित सहयोग मिला तो यह मिशन  पूरे कानपुर में पशुओं हेतु अपनी सेवा  देने का पूरी निष्ठा के साथ प्रयास करेगा। अपनी तरफ से भी लगातार प्रयास जारी रखेगा। इस संख्या में इजाफा करता रहेगा। आज चरही प्राप्त करने वालों में पशु प्रेमी अनिल कुमार , अनिल कुमार यादव ,सरवन , अंकित समुद्रे, जोगेन्द्र परिहार, सर्वेश, संजय यादव, भगवानदीन वर्मा, सुनील वाल्मीकी, जीतू कैथल, मन प्यारे वाल्मीकि, अभिजीत आफताब आदि लोग रहे।इस अवसर पर कुंवर जीत,श्री कृष्ण पार्षद, सत्य व्रत अम्बेडकर, रूद्र आदि लोग सहयोगी की भूमिका में  उपस्थित रहे ।

Advertisement Space


Thursday, May 13, 2021

फीडिंग इंडिया जैसी संस्थाओं का सामाजिक सहयोग

फीडिंग इंडिया ,द लर्निंग हट अकेडमी व अन्य कई संस्थायें विगत कुछ वर्षों से झुग्गी झोपड़ियो के निर्धन बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करने व भोजन वितरण व अन्य कई समाज सुधारक कार्य कर रही है। संस्था द्वारा "नो योर सुपरहीरोज़" ऑनलाइन वीडियो सीरीज जोकि "स्टडी हब ऑनलाइन क्लासेस" यूट्यूब चैनल के माध्यम से अभिषेक शुक्ला व अविनाश सिंह चौहान द्वारा आयोजित की गई , इन सभी संस्थाओं से जुड़े सदस्यों को वार्ता के माध्यम से प्रचार और सहयोग करने का प्रयास कर रहे हैं । इस सीरीज के प्रथम वीडियो में हर्षित अग्रवाल व एकता यादव (टीम स्टडी हब) द्वारा कुछ चुनिंदा संस्थाओ के सदस्यों से बातचीत हुई जिसमें कि द लर्निंग हट अकेडमी,शिवकृति फाउंडेशन, फ्लाई इन द स्काई नामक संस्थाओं ने भाग लिया |

आयोजन को सफल बनाने में सभी संस्थाओं के सदस्य उपस्थित रहे जिसमें मुख्य सदस्य स्मृति मिश्रा, आकांक्षा श्रीवास्तव, हर्षित सिंह, उद्देश्य सचान ,प्रत्यक्षा कटियार आदि उपस्थित रहे।

 वेबिनार सीरीज को सफल बनाने में वृजकिशोर मिश्रा, प्राची पांडेय, प्रज्ञा कुशवाहा, अनूप कुशवाहा द्वारा स्टडी हब की तरफ से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।

संकल्प सेवा समिति के द्वारा थैलीसीमिया बच्चो के लिए रक्तदान शिविर

कोरोना के डर से लोग इस समय ब्लड बैंक में ब्लड नही डोनेट कर रहे है, जिसकी वजह से थैलीसीमिया बीमारी से ग्रसित बच्चो के लिए ब्लड की समस्या उतपन्न हो गयी है, उन्हें ब्लड नही मिल पा रहा है, आपको बता दे कि थैलीसीमिया से ग्रसित प्रत्येक बच्चे को हर माह 4 यूनिट ब्लड की आवश्यकता होती है, कानपुर शहर में ऐसे 125 बच्चे है, इसी समस्या को देखते हुए संकल्प सेवा समिति के द्वारा लगातार रक्तदान शिविर आयोजित किये जा रहे है, आज हैलट ब्लड बैंक में संकल्प सेवा समिति के द्वारा 11 लोगो ने  रक्तदान किया, संश्था के अध्यक्ष संतोष सिंह चौहान ने सभी रक्तदाताओं को कोरोना को देखते हुए इम्युनिटी बढाने के लिए च्यवनप्राश गिफ्ट के रूप में दिया, तथा संश्था के एक सदस्य दीपू अग्निहोत्री के द्वारा प्लाज्मा डोनेट किया गया, दीपू अग्निहोत्री ने बताया कि 14 दिन बाद वो दोबारा प्लाज्मा डोनेट करेगे, संतोष सिंह ने बताया कि इसी प्रकार थोड़े थोड़े डोनर्स को लाकर रक्तदान कराया जाएगा जिससे रक्त की कमी को कुछ दूर किया जा सके, आज रक्तदान करने वालो में मोहित अग्निहोत्री ने अनस नाम के थैलीसीमिया बच्चे के लिए रक्तदान किया, तथा योगेन्द्र चौहान, हर्ष, गुड्डन दीक्षित, इशरत सज्जाद, मनीष आदि लोगो ने रक्तदान किया |

Tuesday, May 11, 2021

The ‘Corona Sewa Yagna’ initiative by Gujarat Governor, Acharya Devvrat gets 100 oxygen concentrators along with an oxygen-generating plant donated by PayTM

Shri Acharya Devvrat, Governor of Gujarat, is going full steam ahead to meet his vision to plan and deploy a massive grassroot level initiative to combat and manage the current pandemic situation by bringing about a difference through the ‘Corona Sewa Yagna’ initiative. As part of the second phase of the initiative, Paytm, India's digital financial services platform through its CSR arm, Paytm Foundation has donated 100 oxygen concentrators along with an oxygen-generating plant to the Gujarat governor to help meet the medical oxygen requirement of hospitals to combat the second wave of Covid-19.

In an effort to combat the shortage in the supply of medical oxygen and stabilize the healthcare infrastructure, Shri Acharya Devvrat through ‘Corona Sewa Yagna’ – LIFE initiative, has activated deployment of oxygen concentrators, which can help buy crucial time when the patient’s oxygen levels drop. This machine filters oxygen from the atmosphere and can help boost oxygen level. Deploying oxygen concentrator’s at hospitals will also help in reducing dependence on refilling cylinders and their transport. The oxygen concentrators will be sent to public hospitals, Covid-19 clinics, primary health centers, dedicated Covid-19 hospitals and health centers.

Speaking on the ‘Corona Sewa Yagna’, Governor of Gujarat Shri Acharya Devvrat said, “In the second phase of the initiative, we have successfully activated deployment of oxygen concentrators to meet the urgent need to treat patients with oxygen therapy. The government is working round-the-clock and undertaking every effort to combat the spread of the virus and save as many lives as possible. We remain committed to join hands and support the government as one big team driven by one mission. We remain grateful to Paytm for lending support to the noble cause. We plan to stop not till our goal is successfully reached, which is to control the rapid spread of Covid-19."

Vijay Shekhar Sharma, Founder & CEO – Paytm said, "We feel proud to extend our efforts to support Gujarat Governor Shri Acharya Devvrat’s noble ‘Corona Sewa Yagna’ initiative. It’s crucial in the time of crisis to provide a pillar of support to our fellow citizens as pandemic waves hit the shores. We aim to converge our resources along with the State Government's initiatives to save as many lives of the people of Gujarat. These oxygen concentrators are our humble contribution to help overcome the oxygen shortage by the Gujarat citizens struggling with COVID-19.”

Yuva Unstoppable, a well-known non-profit organization, is supporting this campaign under the mentorship of the Hon. Governor of Gujarat. Other corporates like HDFC Bank, Finolex, JITO and more have supported ‘Corona Sewa Yagna’ initiative. 

Amitabh Shah, Founder, Yuva Unstoppable said, “We are extremely grateful to Hon. Governor of Gujarat, Hon. CM of Gujarat, other state dignitaries and our corporate partners for providing unflinching support towards this campaign. To be able to provide the necessary aid during this pandemic time and enable deployment of medical oxygen concentrators remains crucial to combat the shortage in supply of medical oxygen. We remain wholeheartedly committed to the cause and remain grateful to various corporates who are supporting us in this hour of crisis.”

Earlier, the Gujarat Governor facilitated delivery of three months of ration supply and essential item kits to over 1 lakh Class-IV healthcare workers in Jamnagar. The first batch of a total number of 16 trucks containing essential food supplies such as pulses, cooking oil, food grains, spices, snacks, toiletries and detergents, among others were distributed to these healthcare personnel in Jamnagar.

Besides the ‘Support’ program (ration supply to Class-IV healthcare workers and now ‘Life’ initiative (oxygen concentrators to hospitals), the governor has another outreach program in the fight against coronavirus, which is about ‘Prevention’ (awareness on getting vaccinated).

Monday, May 10, 2021

लेखक

देवेंद्र कुमार मिश्रा 
स्वतंत्र लेखक 

 जिस समय उनकी प्रतिमा पर फूल माला चढ़ाई जा रही थी, उसी समय वे सभा में चाय   बाँट रहे थे | मंत्री जी ने मंच पर महान लेखक के विषय में कहा "हमारा सौभाग्य है कि   हमें शम्भूनाथ जी जैसे महान रचनाकार को उनके जीते जी उनकी मूर्ति पर फूलमाला   चढ़ाने का सौभाग्य मिल रहा है |" ठीक  उसी समय शम्भूनाथ जी के काँपते हाथों से   हिंदी  भवन में बैठे श्रोताओं, लेखकों, पाठकों की भीड़ में जो करतल ध्वनि से मंत्री जी   की बात का स्वागत कर रहे थे, किसी अतिथि पर चाय गिर गई | अतिथि ने गुस्से में भद्दी   गाली देते हुए शम्भूनाथ को धक्का दिया और शम्भूनाथ जी गिर पड़े | उनके सर से खून   बहने लगा | चाय की दुकान का मालिक शम्भुनाथ को अच्छी तरह पहचानता था | वह   उन्हें फौरन होटल में लाया और अपने दूसरे कर्मचारी से चाय वितरण करने को कहा और स्वयं ऑटो में उन्हें अस्पताल ले गया |

ग्रामवासी शम्भुनाथ को पता ही नहीं चला कि वे कैसे लिखने लगे ? और इतना अच्छा लिखने लगे कि उनकी कविताएं बड़ी-बड़ी पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगी | दसवीं के बाद गरीबी के कारण उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी | गाँव में ही मजदूरी करने लगे थे | गाँव में एक पुस्तकालय था, फुरसत निकालकर वे जाते और एक एक किताब पढ़ लेते | उन्ही किताबों में दिए पते पर वे डाक से अपनी कविताएं भेजते रहते | शहर कभी किसी काम से जाते तो वहाँ के पुस्तकालय का पता करते और पढ़ते रहते पुस्तकें | उन्हें पता ही नहीं चला कि कैसे उनकी कविताएं राजधानी में धूम मचा रही थी  | एक दो प्रकाशक जरूर उनके गाँव आए | उनसे कहा "आप लिखिए, हम छापेंगे, आपकी रचनाओं को पुस्तक के रूप में और रुपया भी देंगे |" उन्होंने पुस्तक की पांडूलिपि तैयार करके प्रकाशक को भेजी | प्रकाशक ने उनके नाम पाँच हज़ार का चेक भेजा | वे इसमें ही बहुत खुश थे | उन्होंने अपनी पत्नी से कहा - "देखो अब तो नाराज नहीं होंगी लिखने से, अब तो रुपए भी मिल रहे हैं | मैं इन रुपयों में से आधे तुम्हे दूँगा और आधे से कागज, कलम, लिफ़ाफ़े, डाक टिकट और पढ़ने के लिए कुछ किताबें खरीदूँगा |"

 पत्नी ने कहा - "ठीक है लिखों | लेकिन काम करना मत छोड़ना | इतने पैसों में जीवन नहीं कटेगा |"

वे खेतों में मजदूरी भी करते और लिखते भी जाते | इस बीच उन्हें कई बार पाँच हज़ार रुपए दिए गए और बदले में उनसे पांडुलिपि ले ली जाती |

लिखते लिखते उनकी उम्र 55 वर्ष हो गई | एक बेटा था जो कालकवलित हो गया था | पत्नी थी और विवाह के काफी समय बाद एक बिटिया हुई थी | जो अब विवाह के योग्य हो गई थी | इस साल गाँव में सूखा पड़ा | खेती बर्बाद हो गई | उनके करने के लिए मजदूरी भी न थी गाँव में ||

वे बैठे सोच रहे थे कि क्या करें ? तभी गाँव का एक लड़का जो शहर में नौकरी करता था, उसनें शम्भूनाथ के पैर पड़े | बचपन में उनका बेटा और यह लड़का मदन साथ में ही खेलते थे | मदन को आशीर्वाद देते हुए उन्होंने कहा - "खुश रहो बेटा"

मदन ने कहा - "चाचा आपको पता नहीं आप क्या चीज हैं ? शहर के स्कूलों के पाठ्यक्रम में आपकी कविताएं पढ़ाई जाती हैं | आपको याद है आप दो-तीन बार प्रदेश और देश की राजधानी गए थे सम्मान के लिए |"

"हाँ, बेटा याद तो है लेकिन उसका क्या ?"

"चाचा वे बहुत बड़े सम्मान थे | आप देश का गौरव हैं | आपके नाम से राजधानी में अकादमी खुली है | बहुत बड़ी साहित्यिक संस्था |"

"हमें पता नहीं बेटा खुली होगी |" शम्भुनाथ ने कहा  |

" अरे चाचा, आप नहीं समझेंगे, आप क्या चीज हैं ? " आश्चर्य और ख़ुशी से झूमता हुआ मदन चला गया |

" सुनिए " पत्नी ने कहा |

" जब आपके नाम से सरकार ने इतना कुछ बनाया है तो उसमें आपको नौकरी मिल जाएगी | यहाँ भूखे मरने से अच्छा है कि आप राजधानी जाइए और कहिए सरकार से हमारे नाम से संस्था बनाए हो, हमें नौकरी पर रखो कैसे मना कर देंगे? "

जाने का मन तो नहीं था शम्भुनाथ का, लेकिन कोई और चारा भी नहीं था | वे चल पड़े राजधानी की ओर | रिक्शे वाले से उन्होंने कहा - "भैया शम्भूनाथ अकादमी का पता मालूम है | रिक्शे वाले ने कहा - "जी मालूम है | चलना है क्या ?"

•कितने पैसे लोगे ?

•• पचास रुपए

• ये तो बहुत ज्यादा हैं

•• तो फिर सिटी बस से चले जाइए वो देखिए सामने खड़ी है  |

वे सिटी बस में चढ़ गए | सिटी बस के कंडक्टर ने पाँच रुपए लेकर उन्हें अकादमी के बाहर छोड़ दिया | बाहर उनकी संगमरमर की प्रतिमा लगी थी | वे आश्चर्य से भर गए | बाहर चपरासी ने उनसे

"पूछा किससे मिलना है ?"

"साहब से"

"कौन से साहब से ?"

"जो सबसे बड़ा हो |"

"इस तरह नहीं मिल सकते, अपॉइंटमेंट ली |"

"नहीं ली"

चपरासी ने उन्हें ऊपर से नीचे तक देखा  | बड़ी दाढ़ी, बिखरे बाल, मैली सी धोती और एक-दो जगह से फटा हुआ कुर्ता ||

" जाओ पहले बाबू से मिलो |"

शम्भूनाथ जी बाबू के पास पहुँचे | उन्होंने बाबू से कहा - "मैं शम्भूनाथ हूँ"

"तो मैं क्या करूँ"

"साहब से मिलना है|"

"क्यों ?"

"क्यों का क्या मतलब ? ये अकादमी मेरे नाम से खुली है जिसमें तुम नौकरी कर रहे हो |"

"नौकरी मैं सरकार की कर रहा हूँ | किसके नाम से क्या खुला है उससे मुझे क्या लेना-देना?"

बाबू ने चिढ़ कर कहा | "जाइए बाहर बैठिए, आपका नाम भेज दिया है | जज साहब बुलाएंगे तो चले जाना |"

शम्भुनाथ ने चारों तरफ नज़र फैलाकर देखा | अकादमी की बड़ी बड़ी दीवारों पर उनकी किताबों के नाम लिखे थे |

काफी देर वो बैठे रहे | तभी उनके नाम का पुकारा हुआ | वे साहब के कमरे में गए | साहब के केबिन में साहब की कुर्सी के पीछे ऊपर दीवार पर उनकी फोटो लगी हुई थी |

"कहिए क्या काम है ?" साहब ने पूछा | "मैं शम्भुनाथ हूँ |"

"आगे बोलिए"

"ये अकादमी मेरे नाम से बनी है |"

शम्भुनाथ की बात सुनकर साहब चौंके  | उन्होंने पीछे लगी तस्वीर को देखा | फिर गौर से शम्भुनाथ की तरफ देखा और कहा - " अरे बैठिए लेखक महोदय | आपका स्वागत है | आप यहाँ कैसे ? खबर भिजवा दी होती, गाँव पहुँच जाते सेवा में |" फिर उन्होंने चपरासी को बुलवा कर चाय नाश्ता लाने के लिए कहा |

"बहुत ख़ुशी हुई आपसे मिलकर |" शम्भूनाथ को कहने में संकोच हो रहा था | जहाँ इतना मान सम्मान हो वहाँ काम कैसे मांगे ? लेकिन मज़बूरी थी उनकी गाँव में खाने के लाले पड़े थे |

उन्होंने संकोच में कहा - "साहब, सुना है ये अकादमी मेरे नाम पर बनी है | बाहर मेरी प्रतिमा भी स्थापित है |"

" हाँ, हाँ, बिल्कुल बनी है | मूर्ति भी आपकी है |"

"तो क्या मुझे कोई नौकरी मिल सकती है यहाँ ?"

साहब पहले चौंके फिर उन्होंने कहा - "शम्भुनाथ जी, नौकरी के लिए तो विज्ञापन निकलते हैं फॉर्म भरा जाता है | परीक्षा होती है | फिर जो योग्य होता है उसे लिया जाता है | भर्ती की एक प्रक्रिया होती है | योग्यता, उम्र सब देखी जाती है | आपकी उम्र तो नौकरी के लायक है नहीं |"

"क्या झाडू-पोछा करने की नौकरी भी नहीं मिल सकती |🤔 उसकी भी भर्ती होती है |"

शम्भुनाथ को चुप देखकर अधिकारी ने कहा - "आप बताइए | मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ ? कहो तो संस्कृति मंत्री से बात कर कोई राशि दिलवा दूँ |"

"नहीं, मुझे काम चाहिए |"

" मैं इसमें आपकी कोई मदद नहीं कर सकता |"

अधिकारी ने कहा चाय नाश्ता आ चुका था |

" लीजिए चाय-नाश्ता करिए |"

शम्भुनाथ भूखे थे सुबह से, वो नाश्ता कर चाय पीने लगे | अधिकारी ने कहा - "आठ दिन बाद आपके जन्मदिन पर बड़ा कार्यक्रम रखा गया है | मुझे बहुत काम है | आप जरूर आइए, आपको निमंत्रण पत्र भी भेजा जा चुका है, चलिए आपको बाहर तक छोड़ दूँ |"

अधिकारी ने पूरी विनम्रता से कहा और बाहर तक छोड़ने आए | विभाग के कर्मचारियों को लगा के साहब के गाँव के कोई रिश्तेदार आए होंगे मदद माँगने |

थके हारे शम्भुनाथ जी सामने वाली चाय नाश्ते के होटल पर बैठ गए | होटल का मालिक पढ़ने का शौक़ीन था | शम्भुनाथ उसके प्रिय लेखक थे | शम्भुनाथ को देखते ही पहचान गया, बिठाया, चाय पीलाई और कहा - "हमारे अहोभाग्य जो इस गरीब के होटल पर पधारे |"

शम्भुनाथ ने उदास स्वर में कहा - "मैं खुद गरीब हूँ | जब सुना कि मेरे नाम से संस्था बनाई है सरकार ने तो चला आया काम माँगने | लेकिन काम नहीं मिला |"

"आप मुझसे कहिए, आपको कितने रुपए की जरुरत है ? "

होटल मालिक ने कहा

"भीख नहीं चाहिए | काम चाहिए | दोगे |"

"मेरी क्या औकात आपको काम दे सकूँ ?"

"तो फिर मैं चलता हूँ"

"एक मिनट रुकिए, क्या काम करना चाहेंगे आप ?"

"जो तुम्हारे पास हो |"

"आप हमारी गद्दी संभालिए मालिक बनकर बैठिए |"

"जीवन भर मजदूरी की है बेटा | काम कोई छोटा बड़ा नहीं होता | मेरे लायक काम हो तो बताओ |"

" मैं क्या बताऊँ ? आप जो करना चाहें  | खुद ही चुन लीजिए | वेतन जो चाहे खुद ही तय कर लीजिए | "

" नहीं बेटा जो सबको देते हो, वैसे ही मुझे देना | लेखक मैं किताबों में हूँ अभी तो काम की तलाश में निकला हुआ मजदूर हूँ | "

और होटल मालिक से कहकर शम्भुनाथ ने वेटर की नौकरी स्वीकार कर ली | होटल में ही रात में उनके सोने की व्यवस्था कर दी गई |

आज अकादमी में शम्भुनाथ का जन्मदिवस मनाया जा रहा था | होटल मालिक को आने वाले अतिथियों के चाय नाश्ते का ठेका मिला था | होटल मालिक मन ही मन सोचकर दुखी हो रहा था कि जिसके नाम सरकार लाखों रुपए  खर्च कर रही है, उसे ही अनदेखा कर रही है | जिसकी मूर्ति पर माला पहनाई जा रही है | जिसके सम्मान में बड़ी बड़ी बाते होने वाली हैं | वही वेटर का काम करेगा अपने समारोह में |होटल मालिक ने कहा - "आप अकादमी के कार्यक्रम में वेटर बनकर मत जाइए |" शम्भुनाथ नहीं माने उन्होंने कहा "मैं काम कर रहा हूँ कोई भीख नहीं मांग रहा हूँ, कोई चोरी नहीं कर रहा हूँ, फिर शर्म कैसी ? सरकार मेरे नाम से इतना बड़ा कार्यक्रम कर रही है ये ही बहुत है मेरे लिए |

और शम्भुनाथ ने चाय नाश्ता बांटना शुरू कर दिया | जब मुख्य अतिथि शम्भुनाथ जी के जीवन पर प्रकाश डाल रहे थे, तभी शम्भुनाथ जी चाय और समोसे कि प्लेट लिए हुए अकादमी के हिंदी भवन में दाखिल हुए | जब उनकी रचनाओं पर अध्यक्ष महोदय बड़ी बड़ी बातें कर रहे थे | तब शम्भुनाथ ने नाश्ता बांटना शुरू किया | और जब शम्भुनाथ के नाम के आगे जी लगाकर उनकी मूर्ति पर पुष्पामाला चढ़ाई गई | उस समय शम्भुनाथ के हाथ काँपें | जब शम्भुनाथ की प्रशंसा से दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों ने तालियां बजाई उसी समय उनके काँपते हाथों से किसी अतिथि पर चाय गिर गई और उन्हें भद्दी गाली देते हुए धक्का दे दिया गया | शम्भुनाथ जी गिर पड़े |

शम्भुनाथ जी नहीं गिरे थे | गिरा  था सरकारी तंत्र, प्रशासनिक महकमा, और वे तमाम सम्मानित लोग जो अध्यक्ष, मुख्य अतिथि, सम्मानित अतिथि बनकर आए थे | मंत्री जी ने पूछा - "क्या शम्भुनाथ जी नहीं आए ?  क्या उनकी तबियत ख़राब है ? होटल मालिक ने चीखकर कहना चाहा कि आये थे लेकिन धक्का दे दिया गया उन्हें | वेटर का काम कर रहे हैं यहाँ लेकिन होटल मालिक कह न सका | शम्भुनाथ को लेकर उसे अस्पताल जाना था | उनके सर से खून बह रहा था |

कार्यक्रम जारी था, मंत्री जी ने कहा - "शम्भुनाथ जी पहले साहित्यकार होंगे जिनके जीवित में ही उनकी फोटो पर मालयार्पण किया जा रहा है | ये नियम के विरुद्ध है, लेकिन यह व्यक्ति की नहीं व्यक्तित्व की पूजा है | उम्मीद करता हूँ कि अगली बार वो स्वयं पधारकर हमें सेवा सत्कार का मौका देंगे, मैं उनके सम्मान में संचार मंत्री को डाक टिकट जारी करने का प्रस्ताव भेजता हूँ |

और दर्शक दीर्घा में फिर एक बार तालियों की गूंज सुनाई दी |

Featured Post

सूर्य या चंद्र की खगोलीय घटना होने की संभावना

सुमित कुमार श्रीवास्तव  ( वैज्ञानिक अधिकारी) भारत वर्ष में उपच्छायी चंद्र ग्रहण दिनांक 5 मई 2023 को रात्रि में 8.45 से 1.02 बजे तक दिखाई दे...