Monday, July 5, 2021

चित्रगुप्त और ओशो की ये बात-चीत बदल देगी आपका नज़रिया

अभी चित्रगुप्त जी से बात हुई...। 

हमने पूछा- "महाराज, जो हिंदू, रात-दिन मुसलमानों के ख़िलाफ़ लगे हुए हैं, धर्म का काम कर रहे हैं,  उनको मोक्ष तो मिलेगा न?"

चित्रगुप्त जी ने हमें घूर कर देखा, फिर बोले-"तुम इसे धर्म का काम काम समझते हो? अरे, उनको आवागमन के चक्र से कभी मुक्ति नहीं मिलेगी। दोबारा धरती पर भेजा जायेगा। और सुनो,  ऐसे लोगों की अलग से लिस्ट बन रही है। इन सभी का अगला जन्म किसी मुस्लिम घर में होगा। स्वर्गसभा में नया विधान पास हो चुका है।" 

"अरे..क्या कह रहे हैं आप...ऐसा क्यों होगा महाराज?"- हमने हैरान होकर पूछा

"ऐसा इसलिए कि घृणा में डूबे ये लोग अपने बच्चों के मन में जो नफ़रत भर रहे हैं, उसके शिकार बनकर, उस पीड़ा को ख़ुद महसूस करें। कुछ तो अपने नाती-पोतों के हाथ ही लिंच होंगे!"- चित्रगुप्त बोले।

"यानी जो सुबह-सुबह ज़हर की शाखा लगाते हैं, सबको लिंच होना पड़ेगा! वह भी अपनी संततियों के हाथ!..लेकिन महाराज नफ़रत तो मुसलमान भी फैलाते हैं और उनके यहाँ तो पुनर्जन्म भी नहीं होता...उन्हें क्या सज़ा होगी?

"उन्हें भी मिलेगी, क़यामत के रोज़ उन्हें भरपूर सज़ा मिलेगी। अल्ला मियाँ ने नरक का सबसे बड़ा कड़ाहा तैयार रखने को कहा है। उसी में मिट्टी के तेल से तले जायेंगे ऐसे लोग"- चित्रगुप्त बोले।

"क्या मज़ाक़ कर रहे हैं महाराज! आपका अल्ला मियाँ से क्या नाता? वे आपसे कुछ क्यों कहेंगे? उनका दफ़्तर तो अलग होगा न?"- हमारी हैरानी की सीमा न थी।

"तुम हमें धरती वालों की तरह बेवक़ूफ़ समझे हो? यहाँ सब एक हैं। अल्ला मियाँ को जब हिंदुओं को दर्शन देना होता है तो  माला-मुकुट पहन लेते हैं और मुसलमानों के लिए अदृश्य रहते हैं, निराकार! ....जो जैसा चाहता है, उसे वैसे ही मिलते हैं...पर मिलते उसे ही हैं जिसके हृदय में सबके लिए प्रेम होता है! ख़ैर, जल्दी में हूँ। यमराज के साथ राउंड पर जाना है।"- कहकर चित्रगुप्त चले गये। 

यमराज के भैंसे की आवाज़ क़रीब आ रही थी। देखा तो नथुने फड़क रहे थे। लगा कि अपनी सींग हमारे सीने में धँसाने को बेक़रार है, जहाँ नफ़रत पलती है, हवस मचलती है।

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मैं हिंदू हूँ -ओशो ने कहा!

जब से मैंने होश संभाला है लगातार सुनता आ रहा हूँ कि

बनिया कंजूस होता है!

नाई चतुर होता है!

ब्राह्मण धर्म के नाम पर सबको बेवकूफ बनाता है!

यादव की बुद्धि कमजोर होती है!

राजपूत अत्याचारी होते हैं!

दलित गंदे होते हैं!

जाट और गुर्ज्जर बेवजह लड़ने वाले होते हैं!

मारवाड़ी लालची होते हैं!

 और ना जाने ऐसी कितनी असत्य परम ज्ञान की बातें सभी हिन्दुओं को आहिस्ते - आहिस्ते सिखाई गयी!

नतीजा! हीन भावना!!

 एक दूसरे की जाति पर शक और द्वेष धीरे- धीरे आपस में टकराव होना शुरू हुआ और अंतिम परिणाम हुआ कि मजबूत, कर्मयोगी और सहिष्णु हिन्दू समाज आपस में ही लड़कर कमजोर होने लगा !

उनको उनका लक्ष्य प्राप्त हुआ ! हजारों साल से आप साथ थे! आपसे लड़ना मुश्किल था!

अब आपको मिटाना आसान है!🎯

✅ आपको पूछना चाहिए था कि अत्याचारी राजपूतों ने सभी जातियों की रक्षा के लिए हमेशा अपना खून क्यों बहाया?🙄

✅ आपको पूछना था कि अगर दलित को ब्राह्मण इतना ही गन्दा समझते थे तो बाल्मीकि रामायण जो एक दलित ने लिखा उसकी सभी पूजा क्यों करते हैं?🤔

✅ माता सीता क्यों महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहती?🤔

✅ आपने नहीं पूछा कि आपको सोने का चिड़ियाँ बनाने में मारवाड़ियों और बनियों का क्या योगदान था?☝️

✅ सभी मंदिर स्कूल हॉस्पिटल बनाने वाले लोक कल्याण का काम करने वाले बनिया होते हैं! सभी को रोजगार देने वाले बनिया होते हैं! सबसे ज्यादा आयकर देने वाले बनिया होते हैं!😳

✅ जिस डोम को आपने नीच मान लिया, उसी के हाथ से दी गई अग्नि से आपको मुक्ति क्यों मिलती है?👌

✅ जाट और गुर्जर अगर मेहनती लड़ाके नहीं होते तो आपके लिए अन्न का उत्पादन कौन करता, सेना में भर्ती कौन होता?

जैसे ही कोई किसी जाति की, कोई मामूली सी भी, बुरी बात करे, उसे टोकिये और ऐतराज़ कीजिये!🙄

याद रहे!

✅ आप और हम सिर्फ हिन्दू हैं। हिन्दू वो जो हिन्दूस्तान में रहते आये हैं।

✅ हमने कभी किसी अन्य धर्म का अपमान नहीं किया तो फिर अपने हिन्दू भाइयों को कैसे अपमानित करते हो और क्यों?

अब न अपमानित करेंगे और न होने देंगे! एक रहें सशक्त रहें!💯

मिलजुल कर मजबूत भारत का निर्माण करें! 

✅ मैं ब्राम्हण हूँ

जब मै पढ़ता हूँ और पढ़ाता हूँ!

✅ मैं क्षत्रिय हूँ

जब मैं अपने परिवार की रक्षा करता हूँ!

✅ मैं वैश्य हूँ

जब मैं अपने घर का प्रबंधन करता हूँ!

✅ मैं शूद्र हूँ

जब मैं अपना घर साफ रखता हूँ!

ये सब मेरे भीतर है इन सबके संयोजन से मैं बना हूँ!

✅ क्या मेरे अस्तित्व से किसी एक क्षण भी इन्हें अलग कर सकते हैं?

✅ क्या किसी भी जाति के हिन्दू के भीतर से ब्राहमण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र को अलग कर सकते हैं?

वस्त्तुतः सच यह है कि हम सुबह से रात तक इन चारों वर्णों के बीच बदलते रहते हैं!

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