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Dr. Mala Mishra |
अध्ययन एवं अनुसंधान पीठ तथा केंद्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल अयोजन हुआ। इस संगोष्ठी की मुख्य समन्वयक व संयोजिका दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो.माला मिश्र थीं।इस आयोजन का केंद्रीय विषय था - 'राष्ट्र निर्माण में हिंदी की भूमिका '।इसके मुख्य अतिथि बिहार लोक सेवा आयोग के सदस्य प्रो . अरुण भगत ने कहा हिंदी के विकास में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने निभाई है।इनके 90 % से अधिक गीत हिंदी में ही लिखे जाते हैं जिनके माध्यम से हिंदी बहुत अधिक प्रचारित और समृद्ध हुई है।बीज वक्ता केंद्रीय हिंदी संस्थान की निदेशिका प्रो .बीना शर्मा ने हिंदी के साहित्यकारों की ओजस्वी कविताओं के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की पृष्ठभूमि पर चर्चा की।मुख्य वक्ता प्रो.वंदना पांडेय ने कहा हिंदी हमारे भावों और विचारों की सहज अभिव्यक्ति की भाषा है।इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में कुलपति प्रो .भगवती प्रकाश शर्मा उपस्थित थे और इस कार्यक्रम के अध्यक्ष केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष श्री अनिल शर्मा जोशी थे।सभी विद्वानों ने हिंदी के अधिकतम प्रयोग को राष्ट्र हित में आवश्यक बताया। संयोजिका प्रोफेसर माला मिश्र ने कहा कि हिंदी भारतवर्ष की परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की भाषा है।हिंदी माध्यम मात्र नहीं समूची भारतीय जीवन शैली की सशक्त वाहिका है।साहित्य ही नहीं,पत्रकारिता के माध्यम से भी सफल रूप में स्वाधीनता आंदोलन का नेतृत्व करते हुए समस्त देशवासियों का आह्वान एवं प्रबोधन करते हुए हिंदी के सेवियों ने राष्ट्र के गौरव का शंखनाद किया है और यही भारत की भारती की सार्थकता है।उन्होंने स्वरचित इन काव्य पंक्तियों के माध्यम से संगोष्ठी- यज्ञ को अंतिम आहुति प्रदान की ।-
"हिंदी का सम्मान करो यह भारतवर्ष की अपनी हिंदी है ,
मत इसका अपमान करो,
यह जन जन की प्यारी हिंदी है।
हिंदी का सब गुणगान करो,
यह जनमन की न्यारी हिंदी है
हिंदी का स्वीकार करो ,
यह राष्ट्रभक्तों के माथे की बिंदी है। "
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