Friday, November 19, 2021

व्याख्यान के साथ हुआ प्रो. आर पी सिंह के अंग्रेजी काव्य संग्रह "प्रोजेक्ट पेनल्टीमेट" (Project Penultimate) का विमोचन

दिनांक 17 नवंबर 2021 को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के डिपार्टमेंट ऑफ़ हायर स्टडीज इन इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज द्वारा आयोजित व्याख्यान में लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ के अंग्रेजी के प्रोफेसर आर पी सिंह ने इफेक्टिव कम्युनिकेशन विषय पर व्याख्यान दिया । उन्होंने  प्रभावशाली संचार में प्रसंग और श्रोता के सम्यक आकलन पर चर्चा की ।

इस कार्यक्रम में सामाजिक , आर्थिक एवं राजनैतिक  झंझावातों  में उलझे मानव शरीर और आत्मा , सुख और दुःख , चुनौतियां एवं समाधान का वैश्विक आमेलन दर्शाते  प्रो आर पी सिंह के काव्य संग्रह "प्रोजेक्ट पेनल्टीमेट" का विमोचन भी हुआ । अंग्रेजी काव्य संग्रह "प्रोजेक्टपेनल्टीमेट" जहाँ एक ओर शोकगीतों की एक झलक प्रस्तुत करता है , वहीं जीवन , मृत्यु , यथार्थ , आत्मा , परमात्मा जैसे विषयों पर  विवेचन भी  प्रस्तुत करता है ।

स्कूल ऑफ़ लैंग्वेजेज के डीन प्रोफ संजय कुमार स्वर्णकार की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में डिपार्टमेंट ऑफ़ हायर स्टडीज इन इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज एवं डिपार्टमेंट ऑफ़ एजुकेशन के विद्यार्थी एवं शिक्षकगण  उपस्थित रहे| डिपार्टमेंट ऑफ़ एजुकेशन के विभागाध्यक्ष डॉ मुनेश कुमार की विशिष्ट उपस्थिति रही ,और उन्होंने पुस्तक पर चर्चा में भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी विभाग की शिक्षिका डॉ ऋचा वर्मा ने किया ।

Sunday, November 14, 2021

पूर्व पत्रकार और वर्तमान सहायक अभियोजन अधिकारी अंकित कुमार सिंह ने जीता चुनाव

कल लखनऊ के रवींद्रालय सभागार में आयोजित राज्य अभियोजन अधिकारी सेवा संघ चुनाव 2021 में  कोषाध्यक्ष पद पर जौनपुर जिले में कार्यरत सहायक अभियोजन अधिकारी अंकित कुमार सिंह 118 मतो से विजयी हुए। उनको कुल 313 वोट और दूसरे प्रत्याशी आगरा के सहायक अभियोजन अधिकारी महेंद्र प्रताप केसरी को 195 वोट मिले।



अंकित कुमार सिंह भारतीय जनसंचार संस्थान के रेडियो टीवी जर्नलिज्म विभाग के पूर्व छात्र रहे है, और इन्होंने एबीपी न्यूज़ में प्लेसमेंट होने के बाद कई महीनों तक नौकरी भी किया है।

सीबीसीआइडी,लखनऊ में कार्यरत वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी वेद प्रकाश त्रिपाठी अध्यक्ष, कानपुर के सहायक अभियोजन अधिकारी शैलेश  अग्निहोत्री महासचिव, लखनऊ की सहायक अभियोजन अधिकारी सोलंकी यादव सचिव पद के लिए चुने गए है।

कल वहाँ पेंड़ था


लेखक - गौरव बाजपेई


आज जहां घर है,

कल वहां पेड़ था!

आज जहां सड़क है,

कल वहां पेंड़ था!


आज जहां खेत है,

कल वहां पेंड़ था!

आज जहां प्लॉट है,

कल वहां पेंड़ था !


आज यहां जो कुछ भी,

उसके पीछे जंगल था!

आज यहां जीवन भी,

उसके पीछे पेड़ था!


पेंड़ नही बाधा है,

पेंड़ से तो प्राण है!

पेंड़ से ही आशा है,

उसके बिन सब निष्प्राण हैं।


पेंड़ एक सैनिक

जो लड़ता प्रदूषण से

पेंड़ एक डॉक्टर,

जो रोगी न बनने दे


पेंड़ एक कृषक,

जो भोजन दे सबको ही,

पेंड़ एक माली,

जो वंदन को पुष्प दे


पेंड़ तो है माता सा,

आँचल से छांव दे,

पेंड़ तो है पिता सा,

जीवन को मुकाम दे!


पेंड़ तो है मित्र सा,

जो देता और देता रहे,

पेंड़ तो है ईश्वर,

जो जीवन का आधार दे!


पेंड़ सा पवित्र कौन?

कभी जो अपराधी नही!

पेंड़ सा तपस्वी कौन?

जीवन भर तपता रहे!


पेंड़ नीलकंठ सा,

जो हलाहल पीता रहे,

पेंड़ तो है अमृत कलश,

अमृत मानव को देता रहे!


पेंड़ एक संसार,

वहां प्राणी पंक्षी पलें,

पेंड़ से ही है बहार,

बसन्त में फूल खिले!


पेड़ जो कर सकता 

कोई नहीं कर सकता

पेड़ जितना दे सकता 

कोई नहीं दे सकता!


अनमोल है पेंड़ देव

बस लकड़ी का मोल लगे

साँस सबकी साधे रहे, 

फिर भी सबको बाधा लगे!


पेंडो से प्रारम्भ है,

पेड़ों से साँस शुरू,

पेंडो सा है यार कौन?

अंत मे जो साथ जले!

पेड़ों सा है यार कौन

अंत मे जो साथ जले!


#पेंड़भीसड़क_भी

#बरगदबाबा

जय पी.डब्ल्यू.डी

 यदि श्रीराम के पास , लंका पर पुल निर्माण करते वक्त, नल नील न होते और PWD जैसी किसी संस्था से उन्हें मदद लेनी पड़ती और फिर PWD और सागर के मध्य जो वार्ता होती तो मंजर क्या होता आपके सम्मुख प्रस्तुत है |



--गौरव बाजपेई  9889931932

हे सागर तुम मार्ग दो हमको,

लंका तक सेना जाना है,

तुम लहरों को पीछे ले लो,

सीता माता को वापस लाना है

सागर मौन रहा जब कुछ पल,

तो PWD टेंशन में आया,

प्रभु राम नाम था पीछे उसके,

तो उसका JCB गुर्राया!


बहू अवध के राजा की,

रघुवर की वह ब्याहता हैं,

कार्य विकट है सरकारी,

टेंशन न, पेंशन लो तुम सारी!


सरकारी कार्य का महत्व बताकर,

अपनी वर्णमाला में उलझाया,

फिर सागर को कोने में लाकर ,

बाधा का अंजाम बताया!!


हाथ जोड़ बेबस सागर ने,

सबको अपना शीश नवाया,

फिर बेबस सागर ने PWD को

असहजता की वजह बताया!


मैं जो पीछे हटा हे PWD,

सब प्राणी मारे जाएंगे,

मेरी मर्यादा है रक्षण करना,

ये बेबस कहाँ को जाएंगे?


यह सुन PWD भन्नाया,

छोटा अभियंता मुस्काया,

पीछे बुलडोजर गुर्राया,

चिंटू ठेकदार मुरझाया!


ये घोंघा, मछली की बात न कर हमसे,

ये कह योजना का मैप दिखाया!

कुछ नही हो सकता अब सुन,

अलाइनमेंट का राग सुनाया!


ये मछली मेंढक के चक्कर मे,

क्या काम रोक दिया जॉयेगा?

रघुवर के नाम पर तो

कुछ भी कर डाला जॉयेगा!

रघुवर के नाम पर तो,

कुछ भी कर डाला जॉयेगा!!


ये देखो ये एक परमीशन,

ये देखो वो परमीशन,

ये देखो एक बड़ा पुथन्ना,

हमको अब न किसी का सुनना।


सब ok है रे सागर,

अब कुछ न देखा जॉयेगा,

सागर का सीना चीर के ही,

अब लंका जाया जॉयेगा


जल्द से देदे अब परमीशन,

इस कार्य की तुम सागर,

नही तो रघुवर के सम्मुख,

तुम्हे रावण मित्र बताया जॉयेगा!


सागर मान सका न उनकी,

तब PWD ने धनुष चलाया,

तब जो सूख गया वह सागर,

कलियुग तक पनप न पाया!


सागर बन बैठा किवदंती,

ऐसा सागर होता था,

अब सागर मध्य मार्ग बचा है,

जिस पर रघुवर बैठे रोता था!!

अब सागर मध्य मार्ग बचा है,

जिस पर सबका रघुवर रोता था!!


शुक्र है कि यह सब एक कविता,

तभी सागर जीवन मुस्काता है,

कहीं अगर यह सत्य हो जाता,

तो सागर सच मे खो जाता!!-2


जरा ठहर सोंचो हे PWD,

तुम कलियुग में क्या करते हो,

जो धरती माता, है पहले से पीड़ित,

तुम उसको पीड़ित करते हो!?

जो नाश आज कर दोगे तुम,

वो वापस फिर कब आएगा,?

जो खो रहे हैं आज हम,

वहां मरुस्थल रह जॉयेगा!

कार्य तुम्हारा, तुम ही करोगे,

बस थोड़ा सा, चिंतन कर लो,

सागर को बिना सुखाए,

तुम आज नल नील ही बन लो!

सागर को बिना सुखाए,

तुम इस धरती के पुत्र ही बन लो!

कार्य शुरू होने के स्थान पर लगे बोर्ड पर लिखित सन्देश-

कार्य का नाम- भारत से लंका तक डामर रोड का निर्माण

कार्यदाई संस्था का नाम- चिंटू इंफ्राटेक

कार्य की लागत- 50000 मन स्वर्ण आभूषण

कार्य खत्म करने की सीमा- द्वापर युग आने से पहले 

त्रेतायुग में , लंका पर चढ़ाई के दौरान ये रामायण का सौभाग्य था कि उनके पास नल नील नामक दो इंजीनियर थे।

न वो पढ़े लिखे थे!

न सिविल से बी टेक थे,

न डिप्लोमा धारी इंजीनियर!

फिर भी अतिदुष्कर सेतु बांधने का एक बहुत बड़ा और अति दुष्कर कार्य, उस काल मे जब पग पग पर प्राणी विद्यमान था, तब बिना एक भी प्राणी को नुकसान पहुंचाए कर डाला था।


बरेली बदायूं राजमार्ग घोटाले की जांच करेगा विजिलेंस विभाग

करीब तीन अरब से हुए राज्य राजमार्ग 33 बरेली बदायूं फोरलेन के निर्माण में घोटाले की शिकायत की जांच काफी समय से चल रही है। शासन ने कई बार इसको लेकर जांच कराई लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। अब शासन ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच विजिलेंस को सौंप दी है। इससे घोटाले की परतें उधड़ने की उम्मीद दिखाई देने लगी है।

मई 2018 में एक शिकायत के बाद पीएमओ ने इस सड़क के निर्माण में हुए गोलमाल की जांच का आदेश दिया लेकिन पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने जांच में भी लीपापोती कर दी। आरोप यह भी था कि फोरलेन प्रोजेक्ट का एस्टीमेट 244 करोड़ रुपये का होने के बावजूद पीएनसी को 280 करोड़ का भुगतान कर दिया गया और पुरानी सड़क को उखाड़कर निकले पत्थर को सड़क में इस्तेमाल कर लिया और भुगतान नये का लिया गया। शासन में शिकायत के बावजूद जांच न होने के बाद यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। हाईकोर्ट ने जांच का आदेश दिया तो एक बार फिर यह प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की गई लेकिन इसके बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है।

बताते हैं कि इसमें शामिल लोगों ने सत्ता में अपनी पहुंच का पूरा इस्तेमाल किया और इस पूरे मामले को दबा दिया। हालांकि शासन ने इस मामले को एक बार फिर से गंभीरता से लिया है। राज्य सतर्कता आयोग के सचिव ओम प्रकाश वर्मा ने उत्तरप्रदेश सतर्कता अधिष्ठान के निदेशक को इस संबंध में लिखा पढ़ी करते हुए गौरव गुप्ता नाम के शिकायतकर्ता की दी गई जानकारियों को हवाला दिया गया है। निदेशक ने इस मामले की जांच कर आयोग को भी इस संबंध में रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। इससे इस कथित घोटाले में शामिल लोगों के बीच हड़कंप मच गया है।

जांच में देरी से तमाम इंजीनियरों का हो चुका ट्रांसफर

स्टेट हाईवे 33 पर 2016-17 में 280 करोड़ की लागत से बरेली-बदायूं फोरलेन का निर्माण कराया गया था। पीडब्ल्यूडी ने इसका ठेका पीएनसी इन्फ्राटेक नाम की कंपनी को दिया था। इस हाईवे के बनने के कुछ ही समय बाद रोड खराब होने लगी थी। इस रोड को बनाने वाले पीडब्ल्यूडी के तमाम इंजीनियरों का भी अब स्थानांतरण हो चुका है। वर्तमान में तैनात अधिकारी इस संबंध में कुछ भी जानकारी न होने की बात कहते हुए पल्ला झाड़ रहे हैं।

व्हिसिल ब्लोवर गौरव कुमार गुप्ता सीएजी की रिपोर्ट, तत्कालीन मुख्य अभियंता के आरोपपत्रों और टीएसी-लोक निर्माण विभाग की जांच आख्या से स्पष्ट है कि उच्च न्यायालय और मुख्यमंत्री के आदेश पर हुयी जांच में घोटालेबाजों को बचाया गया है |

Featured Post

सूर्य या चंद्र की खगोलीय घटना होने की संभावना

सुमित कुमार श्रीवास्तव  ( वैज्ञानिक अधिकारी) भारत वर्ष में उपच्छायी चंद्र ग्रहण दिनांक 5 मई 2023 को रात्रि में 8.45 से 1.02 बजे तक दिखाई दे...