Sunday, November 14, 2021

बरेली बदायूं राजमार्ग घोटाले की जांच करेगा विजिलेंस विभाग

करीब तीन अरब से हुए राज्य राजमार्ग 33 बरेली बदायूं फोरलेन के निर्माण में घोटाले की शिकायत की जांच काफी समय से चल रही है। शासन ने कई बार इसको लेकर जांच कराई लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। अब शासन ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच विजिलेंस को सौंप दी है। इससे घोटाले की परतें उधड़ने की उम्मीद दिखाई देने लगी है।

मई 2018 में एक शिकायत के बाद पीएमओ ने इस सड़क के निर्माण में हुए गोलमाल की जांच का आदेश दिया लेकिन पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने जांच में भी लीपापोती कर दी। आरोप यह भी था कि फोरलेन प्रोजेक्ट का एस्टीमेट 244 करोड़ रुपये का होने के बावजूद पीएनसी को 280 करोड़ का भुगतान कर दिया गया और पुरानी सड़क को उखाड़कर निकले पत्थर को सड़क में इस्तेमाल कर लिया और भुगतान नये का लिया गया। शासन में शिकायत के बावजूद जांच न होने के बाद यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। हाईकोर्ट ने जांच का आदेश दिया तो एक बार फिर यह प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की गई लेकिन इसके बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है।

बताते हैं कि इसमें शामिल लोगों ने सत्ता में अपनी पहुंच का पूरा इस्तेमाल किया और इस पूरे मामले को दबा दिया। हालांकि शासन ने इस मामले को एक बार फिर से गंभीरता से लिया है। राज्य सतर्कता आयोग के सचिव ओम प्रकाश वर्मा ने उत्तरप्रदेश सतर्कता अधिष्ठान के निदेशक को इस संबंध में लिखा पढ़ी करते हुए गौरव गुप्ता नाम के शिकायतकर्ता की दी गई जानकारियों को हवाला दिया गया है। निदेशक ने इस मामले की जांच कर आयोग को भी इस संबंध में रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। इससे इस कथित घोटाले में शामिल लोगों के बीच हड़कंप मच गया है।

जांच में देरी से तमाम इंजीनियरों का हो चुका ट्रांसफर

स्टेट हाईवे 33 पर 2016-17 में 280 करोड़ की लागत से बरेली-बदायूं फोरलेन का निर्माण कराया गया था। पीडब्ल्यूडी ने इसका ठेका पीएनसी इन्फ्राटेक नाम की कंपनी को दिया था। इस हाईवे के बनने के कुछ ही समय बाद रोड खराब होने लगी थी। इस रोड को बनाने वाले पीडब्ल्यूडी के तमाम इंजीनियरों का भी अब स्थानांतरण हो चुका है। वर्तमान में तैनात अधिकारी इस संबंध में कुछ भी जानकारी न होने की बात कहते हुए पल्ला झाड़ रहे हैं।

व्हिसिल ब्लोवर गौरव कुमार गुप्ता सीएजी की रिपोर्ट, तत्कालीन मुख्य अभियंता के आरोपपत्रों और टीएसी-लोक निर्माण विभाग की जांच आख्या से स्पष्ट है कि उच्च न्यायालय और मुख्यमंत्री के आदेश पर हुयी जांच में घोटालेबाजों को बचाया गया है |

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