Saturday, December 4, 2021

विज्ञान भवन दिल्ली में "रामकथा विश्व संदर्भ महाकोश" का लोकार्पण एवं संगोष्ठी

चाणक्य वार्ता पाक्षिक पत्रिका तथा साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था के संयुक्त तत्वावधान में विज्ञान भवन में 'रामकथा में सुशासन ' विषय पर भव्य एवं विराट अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।इस अवसर पर 'राम कथा के विश्व सन्दर्भ महाकोश 'के प्रथम खंड का सुंदर लोकार्पण भी किया गया।इस महाकोश के 55 खंडों की रचना होनी है।इस कार्यक्रम में प्रथम खंड का लोकार्पण किया गया।लोकार्पण  केंद्रीय मंत्री डॉ .अश्विनी कुमार चौबे ,जी ,एस .रेड्डी ,सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर , वरिष्ठ भाजपा नेता श्याम जाजू ,विजय कुमार गोयल ,स्वामी परिपूर्णनन्द जी,चाणक्य वार्ता के संरक्षक वरिष्ठ सहित्यकार एवं स्वयंसेवी लक्ष्मीनारायण भाला ,चाणक्य वार्ता के  प्रखर संपादक अमित जैन ,पद्मश्री डॉ .श्याम सिंह शशि के करकमलों से सम्पन्न हुआ।

इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में 115 देशों के रामभक्त विद्वान प्रतिनधि सम्मिलित हुए।इस कार्यक्रम का अतीव सुंदर ,भावपूर्ण एवं प्रभावी मंच संयोजन एवं संचालन किया दिल्ली विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर माला मिश्र ने,जिसकी प्रशंसा करते हुए विजय गोयल जी ने कहा माला जी आपकी भाषा  शैली अद्भुत है तो साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि प्रो .माला आप बहुत सुंदर संचालन करती हैं।साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने केंद्रीय विषय पर चर्चा करते हुए ओजस्वी स्वरों में कहा भगवान राम  का चरित्र धर्म का पर्याय हैऔर उनके आदर्शों पर चलते हुए हमें भारत से  विधर्मी शक्तियों का पूर्णतः उन्मूलन करना है।स्वामी जी ने के राम के आदर्शों से श्रेष्ठ भारत का सपना साकार करना है ।विजय गोयल जी ने राम के चरित्र के सकारात्मक पहलुओं की सटीक चर्चा की।जी एस रेड्डी जी ने रामकथा के दृष्टान्तों को बड़ी गरिमापूर्ण शैली में रूपायित किया।श्याम जाजू ने वर्तमान संदर्भ में रामराज्य का औचित्य बताया।

लक्ष्मी नारायण भाला जी ने संविधान में उत्कीर्ण चित्रों में अभिव्यक्त राम सीता की  पुष्पक विमान में  विराजमान युगल छवि को मानव कर्तव्यों से  सन्दर्भित किया।अमित जैन ने भारतीय साहित्य परम्परा का यशोगान किया।विदुषी संचालक प्रो . माला मिश्र ने भारतीय साहित्य  और लोक साहित्य से प्रसंगों को उदधृत करते हुए भारतीय जनमानस में व्याप्त कण कण व्यापी राम  के आदर्श एवं उदात्त जीवन चरित्र को बहुत सहजता से उकेरा और राम के समरसता पूर्ण ,लोकमंगलकारी ,मर्यादा पुरुषोत्तम रूप को ही सुशासन का मूलाधार बताया।वर्तमान में भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सिद्धांतों सबका साथ ,सबका विकास ,एक भारत श्रेष्ठ भारत ,संतुलित ,सशक्त और पारदर्शी  भारत के निर्माण के पीछे वस्तुतः भगवान श्री राम के संस्कारों की आधार शिला ही विराजमान है।इस प्रकार आद्यंत श्रीराम के चरित्र के मनोहारी गुणगान और  गोस्वामी तुलसीदास प्रणीत राम चरित मानस की सुंदर चौपाइयों और आदिकवि  वाल्मीकि रचित रामायण के श्लोकों के सुंदर  अभिराम गायन से समूचा सभागार ही  गुंजायमान हो उठा।विज्ञान भवन का हर कोना श्रीराम के जयघोष की अनुगूँज से झंकृत हो उठा।कार्यक्रम का समापन होते होते सारी सभा राममय प्रतीत होने लगी -सिया राममय सब जग जानी ,करहुँ प्रणाम जोरी जुग पानी।

Wednesday, December 1, 2021

अयोध्या में हुआ 15वां फ़िल्म फेस्टिवल : सरोकारी सिनेमा छोड़ रहा समाज पर गहरी छाप

अयोध्या: अशफ़ाक़-बिस्मिल सभागार में 15वें अयोध्या फ़िल्म फेस्टिवल का शानदार आयोजन हुआ। अयोध्या एक और फ़िल्म फेस्टिवल का ऐतिहासिक रूप से गवाह बना। विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों से इसका रंगारंग शुभारंभ किया गया। पद्मश्री मोहम्मद शरीफ ने दीप प्रज्ज्वलन कर आयोजन का औपचारिक उद्घाटन किया। समारोह में इसके बाद फिल्मों के प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हुआ जो देर शाम तक जारी रहा।

अपने संबोधन में पदमश्री मोहम्मद शरीफ ने अपने संघर्षमयी जीवन पर 2009 में बनी फिल्म दस्तावेजी फिल्म के संस्मरणों को साझा किया। 'अवाम का सिनेमा' द्वारा बनाई गई इस फिल्म को देखकर दर्शकों के आंसू छलक आये। 

वरिष्ठ फिल्म अभिनेता शक्ति कुमार मिश्रा ने कहा कि 'अवाम का सिनेमा' जैसे आयोजन छोटे शहरों में सरोकारी सिनेमा के बारे में बेहतर समझ पैदा कर रहें हैं जो अपनी बदौलत बदलाव के बड़े कैनवस का निर्माण कर रहे हैं। 

विक्टरी गर्ल्स डांस एकेडमी की देशभक्ति नृत्य प्रस्तुति और अवधी लोक कला समिति की रंगारंग प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। देशभक्ति से ओत प्रोत प्रस्तुति से सभागार तालियों से गूंज उठा। इसके साथ ही सेंट मेरी स्कूल के छात्राओं की रंगोली प्रस्तुति, ब्लैक बेल्ट दिलदार सिंह के टीम की कराटे, एडीएस का माडल शो, जिंगल बेल की छात्राओं का सामूहिक नृत्य आदि प्रस्तुतियों का सिलसिला जारी रहा।

15वां आयोजन : अयोध्या फ़िल्म फेस्टिवल का यह 15वां आयोजन रहा। इससे पूर्व देश भर के विभिन्न स्थलों में यमुना-चंबल के बीहड़ों से लेकर कारगिल तक सिनेमा का यह शुरू हुआ सफर एक बार फिर अयोध्या आ पहुंचा था। आयोजन के जरिये देश विदेश की दर्जनों फिल्में दर्शकों तक पहुंच रही हैं। समारोह के अब अगले दो दिनों तक सरोकारी फिल्मों के प्रदर्शन का सिलसिला जारी रहा। जिसे अज़रबैजान निवासी चर्चित फिल्म पुरस्कार विजेता लेखक, निर्माता, निर्देशक जलालुद्दीन गसीमोव। अल्बानिया निवासी फ़िल्म निर्देशक, लेखक, व्याख्याता वलमीर टेरटिनि। अभिनेत्री, मॉडल मान्या पाठक और चेयरमैन, फेस्टिवल ज्यूरी एवं निर्देशक प्रोफेसर डॉ. मोहन दास ने चयन किया था।

इन फिल्मों का हुआ प्रदर्शन:

आयोजन में दिखाई गईं विभिन्न श्रेणी में पुरस्कृत की गई फिल्मों को पुरस्कार समारोह के दौरान फिल्मकारों को सम्मानित किया गया।

चौरी चौरा जनविद्रोह शताब्दी वर्ष के दौरान हाल में बनी  फीचर फिल्म ‘1922 प्रतिकार चौरा चौरा’ का कुछ अंश समारोह में विशेष रूप से दिखाया गया। जिसमें चौरीचौरा के गुमनाम नायको के संघर्ष पर्दे पर जीवंत हो उठे और उपस्थित दर्शकों के रोगंटे खड़े हो गए। 1922 प्रतिकार चौरी फिल्म के

निर्देशक अभिक भानु ने छात्र राजनीति पर केंद्रित ‘लाल डिग्गी’ नाम से फिल्म बनाने का ऐलान करते हुए अयोध्या के कलाकारो को फीचर फिल्म में काम देने का वादा मंच से किया।

संयुक्त निदेशक डी के सिंह, प्रिंसिपल आईटीआई  के. के लाल, ओम प्रकाश सिंह, डॉ साम्राट अशोक मौर्य, अमित सिंह, विभाकर पांडे, आशीष अग्रवाल, अंतरिक्ष श्रीवास्तव, अंकित कुमार, सूरज यादव, जनार्दन पाण्डेय 'बब्लू', शुभम गुप्ता, भारती रिंह आदि सहयोग रहा।

आयोजन में शामिल रहीं हस्तियां : प्रोफेसर डॉक्टर मोहनदास फिल्म निर्देशक, चर्चित फिल्म अभिनेता शक्ति कुमार मिश्रा, फिल्म लेखक-निर्देशक अभिक भानु, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज लेखिका आर्यावर्ती सरोज 'आर्या', फिल्म लेखक-निर्देशक डॉ. आलोक सोनी, रूद्राक्ष मैन डॉ. रिपुदमन सिंह, नेशनल प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सौरभ आर्य, फिल्म निर्देशक टाइगर यादव, फिल्म अभिनेता-पत्रकार उपेंद्र पांडेय, फिल्म अभिनेता आर के यादव, लैटिन अमेरिका एक्सपर्ट हरेन्द्र राणा, वर्ल्ड किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप इटली विजेता कुणाल कुमार, फिल्म अभिनेता कमल यादव, फिल्म निर्माता शशिनाथ दुबे, फिल्म निर्माता जसवंत कुमार, आई ई आर एफ अबू धाबी के निदेशक विवेक तिवारी आदि।

फीचर फिल्में

4 सम, आर बा, अघोरा, दिवस्वपना, गुठली मुगामुनी, स्टैंड अप, मानवी, सफाईबाज़- द स्क्वैनजर माने (द होम), थकावी, बलिफूल: वेलकम टू बस्तर' फ़िल्म प्रदर्शित की गई।

दस्तावेजी फिल्में

अक़्वाबा द अवेकनिंग, मॉंक्स ऑन मिशन, उरोमासटिक्स मालिएन्सिस, व्हाट्स योर स्टोरी प्रदर्शित हुई। 

म्यूजिक वीडियो

ए मूरिश गर्ल विथ हर रैटल स्टिक, अंधिमनथंबिल, या खुदा, कैरोसिल: शी डांस, आई बो टू थी ओ मदर, इंडिया कॉलिंग, जगादोधरना, द स्काईज- कम्युनिकेशन पोएम्स बाई टू एम्परर पोएट्स, रोध, वादा है, प्रदर्शित हुई

लघु फिल्में (शॉर्ट्स)

ए डेट विथ मदर, एबंडनमेंट, बहार, फ़क़्त 144, चड्ढी बडीज़, कलर्स:सैफ़रॉन, डाइनिंग टेबल, मांस, डजिब्रिल फॉरेस्ट, एक अच्छी नौकरी, एसो सुसोंगवाद एसो, हिंदी अखबार, जस्ट अनदर डे, काला टीका, मनहूस, लेने के देने, मैटी बॉय, नचिकेता, इट्स यू, नमक, नथिंग हैपण्ड, द थ्रेशोल्ड, दिस डे दैट ईयर, टाइमलेस, टोकन न. 100, पॉल 10, ज़ीरो किलोमीटर' दिखाई गई।

एनीमेशन फिल्म्स - अनन्तशायनाम, अर्थम-अनर्थम, कहानियां, मिक्सी, मंकी इंटर्स लंका, द चेयर को दिखाया गया। 

वेब सीरीज - सोफा, बेचारे बैचलर्स, सीधा रास्ता टेढ़ी चाल, का दर्शकों ने लुत्फ लिया।

फ़िल्म समारोह में दो दिनों तक फिल्मों का प्रदर्शन जारी रहा। समापन समारोह तक सिनेमा और साहित्य जगत के लोगों का आयोजन से जुड़ाव बना रहा। स्थानीय स्तर पर फिल्मों के निर्माण को बढ़ावा देने में यकीनन यह आयोजन सफल साबित हुआ। - शाह आलम, आयोजक, अवाम का सिनेमा।

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