चाणक्य वार्ता पाक्षिक पत्रिका तथा साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था के संयुक्त तत्वावधान में विज्ञान भवन में 'रामकथा में सुशासन ' विषय पर भव्य एवं विराट अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।इस अवसर पर 'राम कथा के विश्व सन्दर्भ महाकोश 'के प्रथम खंड का सुंदर लोकार्पण भी किया गया।इस महाकोश के 55 खंडों की रचना होनी है।इस कार्यक्रम में प्रथम खंड का लोकार्पण किया गया।लोकार्पण केंद्रीय मंत्री डॉ .अश्विनी कुमार चौबे ,जी ,एस .रेड्डी ,सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर , वरिष्ठ भाजपा नेता श्याम जाजू ,विजय कुमार गोयल ,स्वामी परिपूर्णनन्द जी,चाणक्य वार्ता के संरक्षक वरिष्ठ सहित्यकार एवं स्वयंसेवी लक्ष्मीनारायण भाला ,चाणक्य वार्ता के प्रखर संपादक अमित जैन ,पद्मश्री डॉ .श्याम सिंह शशि के करकमलों से सम्पन्न हुआ।
इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में 115 देशों के रामभक्त विद्वान प्रतिनधि सम्मिलित हुए।इस कार्यक्रम का अतीव सुंदर ,भावपूर्ण एवं प्रभावी मंच संयोजन एवं संचालन किया दिल्ली विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर माला मिश्र ने,जिसकी प्रशंसा करते हुए विजय गोयल जी ने कहा माला जी आपकी भाषा शैली अद्भुत है तो साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि प्रो .माला आप बहुत सुंदर संचालन करती हैं।साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने केंद्रीय विषय पर चर्चा करते हुए ओजस्वी स्वरों में कहा भगवान राम का चरित्र धर्म का पर्याय हैऔर उनके आदर्शों पर चलते हुए हमें भारत से विधर्मी शक्तियों का पूर्णतः उन्मूलन करना है।स्वामी जी ने के राम के आदर्शों से श्रेष्ठ भारत का सपना साकार करना है ।विजय गोयल जी ने राम के चरित्र के सकारात्मक पहलुओं की सटीक चर्चा की।जी एस रेड्डी जी ने रामकथा के दृष्टान्तों को बड़ी गरिमापूर्ण शैली में रूपायित किया।श्याम जाजू ने वर्तमान संदर्भ में रामराज्य का औचित्य बताया।
लक्ष्मी नारायण भाला जी ने संविधान में उत्कीर्ण चित्रों में अभिव्यक्त राम सीता की पुष्पक विमान में विराजमान युगल छवि को मानव कर्तव्यों से सन्दर्भित किया।अमित जैन ने भारतीय साहित्य परम्परा का यशोगान किया।विदुषी संचालक प्रो . माला मिश्र ने भारतीय साहित्य और लोक साहित्य से प्रसंगों को उदधृत करते हुए भारतीय जनमानस में व्याप्त कण कण व्यापी राम के आदर्श एवं उदात्त जीवन चरित्र को बहुत सहजता से उकेरा और राम के समरसता पूर्ण ,लोकमंगलकारी ,मर्यादा पुरुषोत्तम रूप को ही सुशासन का मूलाधार बताया।वर्तमान में भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सिद्धांतों सबका साथ ,सबका विकास ,एक भारत श्रेष्ठ भारत ,संतुलित ,सशक्त और पारदर्शी भारत के निर्माण के पीछे वस्तुतः भगवान श्री राम के संस्कारों की आधार शिला ही विराजमान है।इस प्रकार आद्यंत श्रीराम के चरित्र के मनोहारी गुणगान और गोस्वामी तुलसीदास प्रणीत राम चरित मानस की सुंदर चौपाइयों और आदिकवि वाल्मीकि रचित रामायण के श्लोकों के सुंदर अभिराम गायन से समूचा सभागार ही गुंजायमान हो उठा।विज्ञान भवन का हर कोना श्रीराम के जयघोष की अनुगूँज से झंकृत हो उठा।कार्यक्रम का समापन होते होते सारी सभा राममय प्रतीत होने लगी -सिया राममय सब जग जानी ,करहुँ प्रणाम जोरी जुग पानी।