शैलेंद्र श्रीवास्तव |
प्रसिद्ध अभिनेता व लेखक, मुंबई
अमृत महोत्सव वर्ष ,
नव संकल्प होना चाहिए।
विश्व में सबसे प्रबल,
भारत ही होना चाहिए॥
निस्वार्थ सेवाभाव से,
नेतृत्व होना चाहिए।
हो वंश-वाद से मुक्त,
वो गणतंत्र होना चाहिए॥
तुष्टिकरण का राष्ट्र से,
अब अन्त होना चाहिए।
जैसी हो जिसकी योग्यता,
पद प्राप्त होना चाहिए॥
स्वार्थ लालच पाप का,
अब अन्त होना चाहिए।
हो समर्पित राष्ट्र को,
जीवन वो होना चाहिए॥
स्वदेश निर्मित वस्तु पर,
हमें गर्व होना चाहिए।
कुटीर ग्राम उद्योग का,
विस्तार होना चाहिए॥
स्वच्छ हो गंगा का जल,
अमृत सा होना चाहिए।
हो आत्मनिर्भर राष्ट्र,
पूर्ण समृद्ध होना चाहिए॥
प्राचीन धर्म स्थलों का,
पुनरोद्धार होना चाहिए।
भारत पुनः हो विश्वगुरु,
ये प्रयास होना चाहिए॥
प्रगति की सम्भावना,
अनन्त होना चाहिए।
संस्कृति सनातन धर्म पर,
अभिमान होना चाहिए॥
पाठ्यक्रम शिक्षा में भी,
बदलाव होना चाहिए।
आधुनिक शिक्षा मिले,
गुरुकुल भी होना चाहिए॥
निज देश भाषा ज्ञान का,
बखान होना चाहिए।
जो देश की रक्षा करे,
विज्ञान होना चाहिए॥
वीर- वीरांगनाओं का,
गुणगान होना चाहिए।
बेटियाँ अभिमान हैं,
ये सोच होना चाहिए॥
स्वर्णिम सत्य इतिहास का,
पुनर्लेखन होना चाहिए।
राष्ट्र जिनका है ऋणी,
सम्मान होना चाहिए॥
खेल कूदों में भी नित,
उत्थान होना चाहिए।
शीर्ष पर पहुँचे ये भारत,
कीर्तिमान होना चाहिए॥
योग राजयोग जीवन सँवारे,
चित्त की ये वृत्ति होना चाहिए।
वीर जो करें सीमा सुरक्षित,
देश में सम्मान होना चाहिए॥
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक सभी का,
पूज्य स्थान होना चाहिए।
शस्त्र से हो सेना सुसज्जित,
देख शत्रु काँप जाना चाहिए॥
ड्रैगन यदि दुस्साहस करे तो,
गलवान सा शौर्य होना चाहिए। पराक्रम जब सेना दिखाए,
प्रश्न कोई ना होना चाहिए॥
छुपें हों आतंकी जहाँ भी,
तत्काल वध होना चाहिए।
राष्ट्रवाद राष्ट्र परम्परा हो,
नव्य संस्कार होना चाहिए॥
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