अध्ययन एवं अनुसंधान पीठ भारत और क्वाजुलु विश्वविद्यालय ,दक्षिण अफ्रीका के संयुक्त तत्वावधान में गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी पुण्य स्मृति में एक अंतरराष्ट्रीय तरंग संगोष्ठी का आयोजन किया गया।जिसका विषय था -' गांधी की समकालीनअनिवार्यता।'इस संगोष्ठी के मुख्य समन्वयक थे आचार्य चन्द्र।इस कार्यक्रम में डॉ .लोकेश महाराज, दक्षिण अफ्रीका ने अध्यक्षता की।मोतिहारी के महात्मा गांधी विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष प्रो .राजीव कुमार इसमें मुख्य अतिथि थे। प्रमुख आमंत्रित वक्ताओं में दिल्ली विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर माला मिश्र , प्रख्यात आलोचक डॉ. संदीप अवस्थी तथा महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के अध्येता प्रोफेसर अवधेश कुमार शुक्ल उपस्थित थे।
प्रोफेसर माला मिश्र ने कहा गांधी तृणमूल स्तर के भारत की मिट्टी से जुड़े सामाजिक उन्मूलन कर्ता थे जिनकी आवश्यकता हर युग को रहेगी।प्रो .राजीव कुमार ने कहा गांधी के विचार हमेशा जन जन में जीवंत रहेंगे। डॉ .संदीप अवस्थी ने माना कि गांधी भारतीय संस्कृति के उन्नायक हैं।डॉ .राकेश कुमार दुबे ने कहा गांधी को कथनी से नहीं करनी से ही साक्षात किया जा सकता है।यही समकालीन अनिवार्यता है।अध्यक्ष डॉ.लोकेश महाराज ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के इतिहास में भी गांधी का योगदान अप्रतिम है।सत्याग्रह का मूल मंत्र गांधी ने यहां से ही दिया था ।मुख्य समन्वयक आचार्य चंद्र ने कहा - गांधी समूची मानवीयता के रक्षक एवं अंतिम जन के समर्थक थे और उनकी वैचारिकी ही उनका संदेश है।
इस प्रकार गंभीर मंथन के साथ इस विचारोत्तेजक तरंग संगोष्ठी का प्रभावी समापन हुआ।
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