पिछले सप्ताह 25 फरवरी को कानपुर शहर की सौम्या सखूजा ने सीएस एग्जीक्यूटिव परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 12वीं रैंक में अपनी जगह बना कर शानदार उपलब्धि हासिल की , इस खबर से न सिर्फ सौम्या बल्कि उनके परिवार और उनके शिक्षकों और मित्रों में जैसे खुशी की लहर दौड़ पड़ी |
कानपुर के प्रतिष्ठित विद्यालय सर पदमपत सिंघानिया एजुकेशन सेंटर से अपनी 12वीं तक की शिक्षा पूरी करने वाली सौम्या ने 12वीं में भी 98.4 अंक पाकर शहर में टॉप किया था, विद्यालय ने सौम्या के सम्मान में पचास हज़ार की स्कॉलरशिप देने के साथ ही फेयरवेल के समय उन्हें मिस पदमपत के खिताब से भी नवाजा था |
इसके बाद भी सौम्या की रफ्तार नहीं रुकी, उसने सीएस फाऊंडेशन की परीक्षा में भी ऑल इंडिया चौथी रैंक हासिल कर शहर का नाम रोशन किया था |
तब भी वो कानपुर शहर की टॉपर थी आज भी वो कानपुर शहर की टॉपर है |
सौम्या सखूजा ने विशेष बातचीत में हमें बताया कि सीएस फाऊंडेशन से सीएस एग्जीक्यूटिव परीक्षा तक का सफर बेहद महत्वपूर्ण था, इस समय काल में सबसे ज्यादा जो मैंने सीखा वह था 'टाइम मैनेजमेंट' कि 8 विषयों को इस तरह से कितना समय देना है और किस प्रकार उन्हें रिवाइज करना है |
कानपुर के बिजनेसमैन विशाल सखूजा और एकता सखूजा की बेटी सौम्या सखूजा का मानना है कि " पढ़ाई से ध्यान भटकाने वाली बातों पर ध्यान ना दे कर बिना किसी दबाव के व्यवस्थित तरह से पढ़ाई करनी चाहिए |
सौम्या कहती है कि कॉपी भरने से कुछ नहीं होता राइटिंग स्पीड अच्छी होने के साथ ही सवाल का जवाब एकदम स्पष्ट होना चाहिए अच्छी कोटेशन व लाइन को हाईलाइट करना बेहद जरूरी है | "
सौम्या के भाई मोहक सखूजा जोकि इंडिगो एयरलाइंस में कंपनी सचिव हैं, सौम्या बताती हैं कि तैयारी के दौरान भाई से पूरा मार्गदर्शन प्राप्त हुआ और एक अहम सहयोग भी मिला, सौम्या बताती हैं कि भाई को देखते हुए ही कहीं ना कहीं उन्हें भी कंपनी सचिव बनने की प्रेरणा प्राप्त हुई थी|
सौम्या नहीं बीएम इंस्टीट्यूट के गोविंद सर को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए ऑनलाइन तैयारी के विषय में अपने विचार रखते हुए कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई के अपने फायदे और नुकसान दोनों हैं | ऑनलाइन पढ़ाई ऑफलाइन के मुकाबले थोड़ा मुश्किल तो होती है लेकिन उतनी ही सहज भी...
सौम्या पढ़ाई के बीच में अपने कलात्मक हुनर को भी पसंद करती थी, जोकि ग्राफिक डिजाइनिंग और केक डेकोरेशन से संबंधित है | सौम्या का कहना बैकअप योजना के तहत उन्होंने ग्राफिक डिजाइनिंग के पेशे के सारे दरवाजे खोल रखे थे, जिसके लिए वह समय-समय पर तमाम प्रोफेशनल कोर्स के साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की वेबिनार में शामिल होने के साथ ही फ्रीलांस रूप से कुछ कंपनियों को अपनी सेवा दिया करती थी |