शैलेंद्र श्रीवास्तव |
स्वदेशी मंच भारत पत्रिका के डिजिटल अंक में आज प्रसिद्ध अभिनेता व गहरे लेखक शैलेंद्र श्रीवास्तव जी के जन्मदिन पर स्वयं उनके द्वारा रचित बलिया की महक बिखेरती हुई, स्वागत योग्य जबरदस्त रचना |
स्वदेशी मंच भारत परिवार आपको दीर्घायु होने के साथ ही जन्मदिन की तमाम बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित करने के साथ ही आगामी उद्देश्यों की प्राप्ति की कामना करता है |
फागुन मास फ़रवरी इक्कीस,
कृष्ण-पक्ष में जन्में हम।
प्रेम, रंग उत्सव के मास में,
प्रेम-स्वरूप ही जन्में हम॥
ऋतु वसन्त की मादकता में,
बिना मधु उन्माद में हम।
बलिया के रहने वाले हैं,
बलियाटिक कहलाते हम॥
आभारी हैं मात - पिता के,
जिनकी कृपा से जन्मे हम।
कालिन्दी के लाड़ले हैं और,
लल्लन जी के लाल हैं हम॥
गंगा के तट पर जन्में हैं,
भृगु-क्षेत्र में पलें हैं हम।
महाराष्ट्र अब कर्म-क्षेत्र है,
मुम्बई में रहते हैं हम॥
नित्य नवीन चरित्र निभाते,
कर्म से अभिनेता हैं हम।
कवि भी हैं लेखक भी हैं हम,
जीवन को दर्शाते हम॥
रहे फ़क़ीरी में भी मस्ती,
मस्ती के मतवाले हम।
राजा हम उत्तर-प्रदेश के,
मैं ना स्वयं को कहते हम॥
ऋणी रहेंगे उन गुरुओं के,
शिक्षा जिनसे पाए हम।
जीवन में हम जहाँ भी पहुँचे,
आभारी बहुतों के हम॥
कष्टों से संघर्ष किया है,
सहज ना कुछ भी पाए हम।
समस्याओं के मध्य पलें हैं,
आँधी से टकराए हम॥
यही प्रार्थना कर्म-वाणी से,
कष्ट किसी को ना दें हम।
जन्मदिवस पर यही प्रतिज्ञा,
सतत प्रगति कर पाएँ हम॥
श्रम से कभी ना आँख चुराएँ,
विपदा से लड़ पाएँ हम।
स्वप्न यही है प्रेम स्नेह से,
जीवन सदा बिताएँ हम॥
प्रेम सुगन्ध में जीवन बीते,
प्रेम सदा दे पाएँ हम।
प्रेम शक्ति है प्रेम है पूजा,
गीत प्रेम के गाएँ हम॥प्रतिक्षण तेरा ध्यान लगाएँ,
ध्यान में तुझको पाएँ हम।
तुम्हीं आदि हो तुम्हीं अन्त हो,
प्रेम तुम्हारा पाएँ हम॥
शिव की कृपा सदा ही बरसे,
शिवधाम को जाएँ हम।
शिवत्व प्राप्त हो यही कामना,
शिवमय ही हो जाएँ हम॥
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