Sunday, May 29, 2022

लखनऊ - शेड्स ऑफ ड्रीम के बैनर तले युवाओं ने किया धमाल

शेड्स ऑफ ड्रीम उत्तर प्रदेश कि राजधानी लखनऊ में सक्रिय वो संस्था है, जो खासकर हुनरमंद युवाओं को एक मंच दे रही है बल्कि प्रोत्साहित भी कर रही है |

मोहम्मद फैज़ल और मनीषा जोशी द्वारा 2 वर्ष पूर्व शुरू की गई यह संस्था अब तक प्रदेश में कई छोटे-बड़े कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित करा चुकी है , जिसमें कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों में अब तक 20 से अधिक कार्यक्रम हुए हैं जिनके माध्यम से तमाम युवाओं को एक मंच का हुआ |

सह-संस्थापक मनीषा जोशी ने विशेष बात चीत में बताया कि यह संस्था ' ओपन माइक '  की थीम पर ही अपने कार्यक्रम अब तक करती आई है |

जिन कार्यक्रमों में भाग लेने वाले छुपारुस्तम कलाकार युवाओं के हुनर को डिजिटल रूप से प्रकाशित करने का काम भी संस्था करती है, तथा प्रोत्साहन के लिए कई प्रकार के उपहार भी दिए जाते हैं , युवाओं की पेशकश की बारीक कमियों को दर्शक वर्ग के माध्यम से समीक्षात्मक रूप से भी बतलाया जाता है |

संडे स्पेशल कार्यक्रम का आयोजन कपूरथला स्थित अखिलेश्वर टावर के 'घर बार कैफे' में किया गया

जहाँ कविता, किस्सागोई, हास्य व्यंग और गायन के माध्यम से प्रतिभागियों ने समा बांध दिया |

जहाँ कविता में अंकुर पाठक, प्रवीण सिंह, हिमांशु श्रीवास्तव , शिप्रा शेट्टी, अमीना खान, प्रशांत अवस्थी, आशुतोष व शुभम  तथा अन्य साथियों ने भाग लिया वहीं गायन के माध्यम से सतीश, प्रांजल मिश्रा, शाहरुक व शान ने सबको लुभाया जिसके बाद अनुराग और प्रखर जैसे युवा हुनरमंदो ने खूब हंसाया भी...

आगामी उद्देश्यों के सवाल पर मनीषा जोशी ने बताया कि भविष्य में शेड्स ऑफ ड्रीम, इवेंट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में भी कदम रखेगी |

Monday, May 23, 2022

लाल सेना कमांडर की पुण्यतिथि: गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, आज़ादी के रणबांकुरे को सलाम करने उमड़े लोग

इटावा: ज़िले के बसरेहर ब्लॉक अंतर्गत छोटे से लोहिया गांव में हलचल बनी रही। आज़ादी के लिए बड़ा जज़्बा दिखाते हुए अंग्रेज़ों से लड़ने के लिए लाल सेना बनाने वाले कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया की पुण्यतिथि थी | कमांडर को याद करने के लिए बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ | लोगों ने इसमें खूब बढ़कर हिस्सा लिया। वहीं, जिला प्रशासन भी पीछे नहीं रहा | जिलाधिकारी श्रुति सिंह के आदेश से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश सिंह द्वारा सलामी गार्ड भेजे गए|

सुबह आठ बजे आजादी के हीरक वर्ष में कमांडर को उनके समाधि स्थल पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। पूरे दिन चले कार्यक्रम में मुख्य अतिथि, वक्ता और कार्यक्रम में पहुंचे लोग कमांडर को याद कर भावुक हो गए. और नई पीढ़ी को संघर्ष कर सीखने का संदेश दिया। 


कमांडर के जीवन से जुड़ी फोटो प्रदर्शनी आयोजित

कमांडर को न सिर्फ श्रद्धांजलि दी गई, बल्कि क्रांतिकारियों और कमांडर के जीवन से जुड़ी फोटो प्रदर्शनी भी आयोजित हुई. लाल सेना के योद्धा रहे अंगद सिंह के पुत्र दिनेश सिंह कुशवाह, जहीरूद्धीन के पौत्र मोहम्मद शकील, कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया के पौत्र सिद्धार्थ भदौरिया ने फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। स्मारक शिलापट्ट के नजदीक बांस पर सूतली के सहारे लगाई गई तस्वीरें सबको अपनी तरफ आकर्षित खींच रही थी। कमांडर के जीवन संघर्ष पर केंद्रित पचास तस्वीरों का चयन कर यहां प्रदर्शित किया गया था।


स्पीच कॉम्पटीशिन भी हुआ, ये रहे विजेता

‘कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया के सपनों का भारत’ विषय पर कनिष्ठ वर्ग में कक्षा-1 से 5 तक, मध्यम वर्ग कक्षा 6 से 12 तक, वरिष्ठ वर्ग समस्त अविद्यालयी बच्चे एवं नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी की। प्रातः 10 बजे से शुरू हुआ स्पीच कॉम्पटीशन दोपहर दो बजे तक चला। स्पीच कॉम्पटीशन में कनिष्ठ वर्ग में केंद्रीय विद्यालय की अनन्या, मध्य वर्ग में पान कुवर इंटर नेशनल स्कूल की आयुषी सिंह और वरिष्ठ वर्ग में केकेडीसी के सूर्यांश ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।


'खूबसूरत चंबल' पर पेंटिंग कॉम्पटीशन 

खूबसूरत चंबल थीम पर पेंटिंग कॉम्पटीशन हुआ। इसमें चंबल घाटी के विविध पहलुओं को पेंटिंग कर कागज पर उकेरा गया था। कनिष्ठ वर्ग में बहादुरपुर प्राइमरी स्कूल के देवांश ने प्रथम, मध्यम वर्ग में नारायणा कालेज की नैंसी, वरिष्ठ वर्ग शिवाजी शिक्षा निकेतन के शिव शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।


मुरैना विधायक ने बांटे पुरस्कार

पुरस्कार वितरणः स्पीच कॉम्पटीशिन और पेंटिंग कॉम्पटीशन के लिए तीन सदस्यीय ज्यूरी नामित की गई थी, जिसमें शिक्षक राम जनम सिंह, मनोरमा चौहान, राहुल तोमर रहे। मुरैना विधायक रविन्द्र तोमर के हाथों सभी वर्गों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र भी दिया गया।


स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित

जिला आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग की तरफ से डॉ. मनोज दीक्षित के निर्देशन में डॉ. लोकेश कुमार सिंह को नोडल अधिकारी बनाकर डॉ. कल्पना राठौर एंव डॉ. कमल कुमार कुशवाहा के सहयोग से प्रातः 9 बजे से स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। कुल 270 मरीजों का परीक्षण कर निशुल्क दवाएं दी गईं। आसपास के दर्जनों गांवों की जुटी जनता को फार्मासिस्ट एके सिंह, भृत्य देवेन्द्र कुमार एवं प्रेमवीर सिंह के द्वारा दवा वितरण में सहयोग प्रदान किया गया।



चर्चा समारोह में शामिल हुए क्रांतिकारियों के वंशज

‘स्वतंत्रता संग्राम के रणबाँकुरे’ विषय पर चर्चा सत्र का आगाज क्रांतिकारी राजा निरंजन सिंह चौहान के वंशज मोहन सिंह चौहान, गुप्त क्रांतिकारी दल मातृवेदी के कमांडर-इन-चीफ गेंदालाल दीक्षित के वंशज डॉ. मधुसूदन दीक्षित, शहीद भगत सिंह के चार पार्टी केंद्रों के चीफ रहे क्रांतिवीर डॉ. गया प्रसाद के पुत्र क्रांति कुमार कटियार, चंबल घाटी के भगत सिंह नाम से सुविख्यात शहीद डॉ. महेश सिंह चौहान के अनुज देवेंद्र सिंह चौहान, राम नारायण आजाद रिवोल्यूनशरी ग्रुप के अगुवा शहीद पं. राम नारायण आजाद के पौत्र बाबी दुबे, कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया की पुत्री कुसुमदास और बहु सुषमा भदौरिया ने साझे तौर पर दीप प्रज्जवलन कर किया।


गाथा और बलिदान कथा सुनकर निकले आंसू

चर्चा सत्र के मुख्य बक्ता चंबल घाटी के भगत सिंह नाम से सुविख्यात शहीद डॉ. महेश सिंह चौहान के अनुज इतिहासकार देवेंद्र सिंह चौहान ने स्वतंत्रता संग्राम में पचनद घाटी के महानायकों के योगदान को रेखांकित करते हुए इसे आकाश गंगा की संज्ञा दी। बताया कि पचनदी घाटी की तासीर रही है कि वह कभी भी अन्याय बर्दाश्त नहीं कर सकती। स्वतंत्रता संग्राम के रणबाँकुरे चर्चा सत्र को संबोधित करते हुए 1857 के महानायक शहीद गंगू बाबा मेहतर के जीवनीकार देव कबीर ने कहा कि बगैर समृद्ध इतिहास के अच्छे भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती। मोहन सिंह चौहान ने अपने लड़ाका पुरखे राजा निरंजन सिंह चौहान का गौरवशाली इतिहास सबके सामने रखा। गुप्त क्रांतिकारी दल मातृवेदी के कमांडर-इन-चीफ गेंदालाल दीक्षित के वंशज डॉ. मधुसूदन दीक्षित ने कहा कि बड़े पैमाने पर क्रांतिकारियों के जीवन चरित्र को प्रकाशित कर नई पीढ़ी में उनके विचारों का संचार बेहद जरूरी है। शहीद भगत सिंह के चार पार्टी केंद्रों के चीफ रहे क्रांतिवीर डॉ. गया प्रसाद के पुत्र इं. क्रांति कुमार कटियार ने आजादी आंदोलन के दौरान अपनी पिता से जुड़े मार्मिक प्रसंगों को बताया, जिसे सुनकर आंसू निकल आए। राम नारायण आजाद रिवोल्यूनशरी ग्रुप के अगुवा शहीद पं. राम नारायण आजाद के पौत्र बाबी दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रिटिश खुफिया रिपोर्ट बताती है कि उस दौर में राम नारायण आजाद रिवोल्यूनशरी ग्रुप से फिरंगी सरकार के कारिंदे कितने खौफजदा थे।

स्वतंत्रता संग्राम के रणबाँकुरे चर्चा सत्र को सुरेशचंद्र जाटव, गुरू महाबल सिंह चौहान, वरिष्ठ पत्रकार गणेश ज्ञानार्थी, खादिम अब्बास, शेखर यादव, पूर्व अपर महाधिवक्ता राज बहादुर सिंह यादव, विधायक रविंद्र सिंह तोमर, डॉ. धर्मेंद्र, शिशुपाल शरद, राजवीर सिंह आदि ने भी संबोधित किया। सत्र की अध्यक्षता कुसुमदास और संचालन कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया स्मृति समारोह के संयोजक शाह आलम राना ने किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद भारत सरकार के उपक्रम नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा हाल में प्रकाशित उनकी आत्मकथा तथा उनके जीवन संघर्ष पर प्रकाशित पुस्तकों का वितरण भी उनके परिजनों द्वारा किया गया।

Saturday, May 21, 2022

कौन थे लाल सेना का गठन करने वाले कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया

25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया गया था। यह तारीख इतिहास में काले अक्षर के माफिक दर्ज है। आपातकाल में चंबल घाटी से जुड़े उत्तर प्रदेश के इटावा से गिरफतार हुए समाजवादी कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया पर चर्चा करना आज भी लोग बड़े ही गर्व की बात मानते हैं। आपातकाल में गिरफ्तार हुए कंमाडर को 1977 में यहां की जनता ने सांसद बनाकर आपातकाल की यातना का ईनाम दिया था। अर्जुन सिंह भदौरिया की एक खासियत थी कि चाहे अग्रेजी हुकूमत रही हो या फिर भारतीय कमांडर कभी झुके नहीं। लोकतांत्रिक भारत में भी वह तीन बार सांसद बने ओर उनकी पत्नी भी राज्यसभा का चुनाव जीतीं। यह बात अलग है कि 2004 में जब उन्होंने आंखें बंद की तब तक समाजवाद और समाजवादियो ने नई रंगत हासिल कर ली थी।

खड़ा किया समाजवादी आंदोलन

समाजवादियों के गढ़ इटावा में कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया का नाम एक वक्त में बड़े जोरशोर से सुनाई दिया करता था। असल में कमांडर नाम का यह शख्स ही समाजवादी आंदोलन का पहला और बड़ा अनुयायी बना। चंबल के बीहड़ों में समाजवादी आंदोलन इसी शख्स की बदौलत फला फूला रहा। आजादी से पहले समाजवादियों ने यहां पर लाल सेना बनाई थी। जिसका काम जबरन सरकारी कामकाज बाधित करना था। कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया नौजवानों के इस दल के नेता के रूप में उभरे। लोहिया,जयप्रकाश नारायण और आचार्य कृपलानी जैसे दिग्गजों ने उनके कर्तव्य को देख कर के उन्हें कमांडर कहना शुरू कर दिया। यह विश्लेषण उनके नाम से ताजिंदगी चिपका रहा। 10 मई 1910 को बसरेहर के लोहिया गांव में जन्मे अर्जुन सिंह भदौेरिया ने 1942 में अंग्रेजी शासन के खिलाफ बिगुल फूंक दिया। 1942 में उन्होंने सशस्त्र लाल सेना का गठन किया और बिना किसी खून खराबे के अंग्रेजों को नाको चने चबवा दिये। इसी के बाद उन्हें कमांडर कहा जाने लगा।

1957, 1962 और 1977 में इटावा से लोकसभा के लिए चुने गए कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया का संसद में भी उनके बोलने का अंदाज बिल्कुल अलग ही रहा। 1959 में रक्षा बजट पर सरकार के खिलाफ बोलने पर उन्हें संसद से बाहर उठाकर फेंक दिया गया। लोहिया ने उस वक्त उनका समर्थन किया। पूरे जीवनकाल में लोगों की आवाज उठाने के कारण वह 52 बार जेल भेजे गए। इसमें आपातकाल का दौर भी शामिल था। आपातकाल में उनकी पत्नी तत्कालीन राज्यसभा सदस्य श्रीमती सरला भदौरिया और उनके पुत्र सुधींद्र भदौरिया अलग-अलग जेलो में रहे। उन्होंने पुलिस के खिलाफ इटावा के बकेवर कस्बे में 1970 के दशक में आंदोलन चलाया था। लोग उसे आज बकेवर कांड के नाम से जानते हैं। इटावा में शैक्षिक पिछड़ेपन की समस्या आवागमन के लिए पुलों का आभाव जैसी समस्याओं को कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया प्रमुखता से उठाते रहे।

हमेशा उठाये जनहित से जुड़े मुद्दे

जनहित के बडे और अहम मुददे उठाने में कमांडर का कोई सानी नहीं रहा। 27 फरवरी 2016 को अर्से से उपेक्षित चंबल घाटी में यात्री रेलगाड़ी की शुरूआत होते ही उस सपने को पर लग गये जो साल 1958 में इटावा के सांसद कंमाडर अर्जुन सिंह भदौरिया ने देखा था। 1957 में पहली बार सांसद बनने के बाद कमांडर ने सदियों से उपेक्षा की शिकार चंबल घाटी में विकास का पहिया चलाने का खाका खींचा और रेल संचालन का खाका खींचते हुए 1958 में तत्कालीन रेल मंत्री बाबू जगजीवन राम और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के सामने एक लंबा चौड़ा मांग पत्र इलाकाई रखा था। जिस पर उनको रेल संचालन का भरोसा भी दिया गया था। कंमाडर 1957 के बाद 1962 और 1977 में भी इटावा के सांसद निर्वाचित हुए, लेकिन चंबल घाटी में उनकी रेल संचालन की योजना किसी भी स्तर पर शुरू नहीं हो सकी, लेकिन कंमाडर के चंबल रेल संचालन की योजना को 1986 सिंधिया परिवार के चश्मोचिराग माधव राव सिंधिया ने पूरा करने का बीड़ी उठाया और देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ मिलकर तत्कालिक तौर पर अमल शुरू कराया।


लाल सेना का किया गठन

आजादी के आंदोलन के दौरान कंमाडर के नाम से लोकप्रिय रहे अर्जुन सिंह भदौरिया ने 1942 की क्रांति के नायक की छवि स्थापित कर लाल सेना गठित की थी। कमांडर के बेटे सुधींद्र भदौरिया का कहना है कि उनके पिता ने चंबल में आजादी के आंदोलन के दौरान जो तकलीफें देखी थीं, उनको दूर करने की दिशा में सांसद बनने के बाद कई अहम निर्णय लेते हुए उनको दूर करने की दिशा में काम किया। उन्होंने बताया कि जब उनके पिता इटावा के सासंद हुआ करते थे, तब इटावा का दायरा फिरोजाबाद से लेकर बिल्हौर तक हुआ करता था। उनको आज भी याद है कि चंबल नदी पर पुल का निर्माण नहीं था तब सभी को पीपे के पुल से ही जाना पड़ता था। इस समस्या को भी उन्होंने हमेशा प्रमुखता से ही उठाया था।



साभार :- पत्रिका

स्मृति विशेष : कल कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया को याद करेगा लोहिया गाँव, इटावा |

इटावा: आजादी का अमृत महोत्सव वर्ष में स्वतंत्रता संग्राम के महानायक लाल सेना के कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया की पुण्यतिथि दिवस पर बसरेहर ब्लाक के अंतर्गत लोहिया गांव में स्मृति समारोह का आयोजन 22 मई को किया जा रहा है। इसमें कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया के विचारों से युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए स्पीच और आर्ट कॉम्पटीशन का आयोजन सुबह दस बजे से किया गया है। प्रातः से कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया स्मृति स्वास्थ्य शिविर और कमांडर के जीवन के विविध पहलुओं को समेटे फोटो प्रदर्शनी लगाई जाएगी।



स्पीच कॉम्पटीशन का विषय 'कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया के सपनों का भारत' रखा गया है. वहीं पेंटिंग कॉम्पटीशन का विषय लाल सेना का हृदय स्थल रहे 'चंबल घाटी की खूबसूरती' को केंद्रित किया गया है। दोनों ही प्रतियोगिता में जूनियर वर्ग कक्षा-1 से 5 तक, सीनियर वर्ग कक्षा-6 से 12 तक, वरिष्ठ वर्ग समस्त विद्यालयी बच्चे एवं नागरिक हिस्सा ले सकेंगे। समारोह आयोजन समिति की तरफ से सभी वर्गों हेतु प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार एवं सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। इस अवसर पर पंचनद घाटी के चर्चित लोक गायक सिद्दीक अली अपनी प्रस्तुतियां देंगें।

कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया स्मृति समारोह के संयोजक क्रांतिकारी लेखक शाह आलम राना  ने बताया की लोहिया गांव में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया स्मृति समारोह में तीन बजे से स्वतंत्रता संग्राम के रणबाँकुरे विषय पर चर्चा सत्र का आयोजन किया गया है। जिसमें क्रांतिकारी राजा निरंजन सिंह चौहान के वंशज विजय प्रताप सिंह, गुप्त क्रांतिकारी दल मातृवेदी के कमांडर-इन-चीफ गेंदालाल दीक्षित के वंशज डॉ. मधुसूदन दीक्षित, अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के पार्टी केंद्रों के चीफ रहे क्रांतिवीर डॉ. गया प्रसाद के पुत्र क्रांति कुमार कटियार, चंबल घाटी के भगत सिंह नाम से सुविख्यात शहीद डॉ. महेश सिंह चौहान के अनुज देवेंद्र सिंह चौहान, राम नारायण आजाद रिवोल्यूनशरी ग्रुप के अगुवा शहीद पं. राम नारायण आजाद के पौत्र बाबी दुबे, 1857 के महानायक शहीद गंगू बाबा मेहतर के जीवनीकार देव कबीर, मैनपुरी षड्यंत्र केस के क्रांतियोद्धा दम्मीलाल पांडेय के पौत्र अजय पांडेय आदि संबोधित करेंगें।

Tuesday, May 3, 2022

सन्तोष सिंह चौहान ने 51 वी बार किया रक्तदान


आज संकल्प सेवा समिति के अध्यक्ष सन्तोष सिंह चौहान के पास एक भूतपूर्व सैनिक फोन आया कि उनके 12 वर्ष के बेटे वंश का प्लेटलेट्स मात्र 8000 बचा है, उनके बच्चे का ब्लड ग्रुप ऐ पोस्टिव है, उन्हें अपने बच्चे के लिए सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की तुरंत आवश्यकता है, चूंकि सन्तोष सिंह चौहान का ब्लड ग्रुप भी ए पोस्टिव है, वो तुरंत ही तैयार हो गए और रिजेंसी हॉस्पिटल पहुंचकर बच्चे के लिए सिंगल डोनर प्लेटलेट्स डोनेट किया, सन्तोष सिंह ने बताया कि आज उन्होंने 51 वी बार रक्तदान किया |

संकल्प सेवा समिति के अध्यक्ष सन्तोष सिंह चौहान ने शीघ्र ही बच्चे के स्वस्थ होने की प्रार्थना किया

Featured Post

सूर्य या चंद्र की खगोलीय घटना होने की संभावना

सुमित कुमार श्रीवास्तव  ( वैज्ञानिक अधिकारी) भारत वर्ष में उपच्छायी चंद्र ग्रहण दिनांक 5 मई 2023 को रात्रि में 8.45 से 1.02 बजे तक दिखाई दे...