महिलायें ही एक संस्कृति की परंपरा की वाहक होती हैं, उन्हें यदि ये सब विवशता वश, करना छोड़ना पड़े तो परंपराये भी छूटने लगेगी, ये कहना था कानपुर से डॉ कामायनी शर्मा का जिन्होने अखिल भारतीय उत्तराखंड युवा प्रतिनिधि मंच एवं राष्ट्रीय सर्वभाषी ब्राह्मण संगठन के संयुक्त तत्वाधान में एक वेबीनार में प्रतिभाग किया शीर्षक था "रहे मेरी माँग सिंदूरी"
विदूषी महिलाएँ और उनकी वार्ताएं बहुत सब मनभावन था, देहरादून से पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल जी का संवाद और गायन उत्कृष्ट रहा, नेपाल से जुड़ी श्रीमती बिमुन्स पौडेल जी का संवाद अनोखा था।
प्रस्तुत है एक रिपोर्ट संस्था की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तनु खुल्बे जी द्वारा बनाई गई।
मांग मेरी रहे सिन्दूरी, अटल सौभाग्य देने वाला सुहागिनों का व्रत है वट सावित्री अमावस्या
पतिव्रता नारी की शक्ति, अटल विश्वास, दृढ़ संकल्प व संस्कार से युक्त ज्येष्ठ मास की अमावस्या को पड़ने वाले वट सावित्री व्रत पर अखिल भारतीय उत्तराखंड युवा प्रतिनिधि मंच एवं राष्ट्रीय सर्वभाषी ब्राह्मण संगठन द्वारा मांग मेरी रहे सिंदूरी वेबीनार का कुशल आयोजन किया गया। जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आई सुहागिनों ने वट अमावस्या व्रत की महत्ता, पौराणिक कथा व पूजा विधि तथा पर्यावरण संरक्षण से परीचित कराया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पद्मश्री डा. माधुरी बड़थ्वाल जी, देहरादून से रही और वट सावित्री व्रत पर अपने विचार व्यक्त किए तथा उत्तराखंड का बहुत ही सारगर्भित गीत अपने सुरीले कंठ से सुना कर सबके मन को भाव विभोर कर दिया। अध्यक्ष हरीश उपाध्याय जी ने शंख ध्वनि से व उपाध्यक्षा तनु खुल्बे जी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का सुंदर आगाज़ किया, जहां एक ओर शिवानी अवस्थी जी ने नागपुर से अपनी सुमधुर वाणी में गणेश वंदना गा कर वेबीनार का शुभारंभ किया तो वहीं श्रीमती धारणा अवस्थी जी ने बड़ी ही कुशलता व सधे हुए शब्दों के साथ कार्यक्रम का सुंदर संचालन किया।कार्यक्रम के अंत में संस्था की राष्ट्रीय उपाध्यक्षा तनु खुल्बे जी ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी सम्मानीय जनों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए यह विश्वास दिलाया कि गत वर्षो की भांति आगे भी इसी तरह पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति, परंपराओं को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम संस्था द्वारा आयोजित करते रहेंगे।
कार्यक्रम के खूबसूरत शुभारंभ के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्कर्ष चैनल के संस्थापक, संपादक हरीश उपाध्याय जी ने संस्था की ओर से कार्यक्रम में सम्मिलित होने पर सबको धन्यवाद देते हुए सबका स्वागत करते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
नमिता सुयाल ने हल्द्वानी ,उत्तराखंड से वट सावित्री व्रत के पौराणिक व ज्योतिषीय पहलू को उजागर किया।
भावना बर्थवाल, दिल्ली ने उत्तराखंड में वट सावित्री व्रत पूजा विधान, खान- पान बताते हुए वहा की सुहागन महिलाओं द्वारा हर शुभ कार्य में ओढ़ा जानें वाला पिछोड़ा परिधान की महत्ता की जानकारी दे सबका ध्यानाकर्षित किया।
डा.आभा सिंह भैसोड़ा, हल्द्वानी ने स्वरचित पंक्तियों ' विष्णु संग लक्ष्मी की पूजा, संग पूजे बरगद को दूजा.. द्वारा बताया कि वट वृक्ष औषधीय गुणों से भरपूर हैं, जीवनदायिनी, पर्यावरण की रक्षा करने वाला वृक्ष है इसमें त्रिदेव का वास होता है इन्हीं कारणों से यह ऋषियों द्वारा पूजा जाता है।
पूनम मिश्रा'पूर्णिमा' नागपुर ने सत्यवान सावित्री की अति रोमांचकपूर्ण ढंग से कथा सुना सबका मन मोह लिया।
श्रीमती राधा बिष्ट, लखनऊ ने वट सावित्री व्रत को अटल सौभाग्य देने वाला व अडिग विश्वास का प्रतीक बताया, साथ ही युवा पीढ़ी को आधुनिकता की दौड़ में संस्कार विहीन ना होने का संदेश दिया।
डा. कामायनी शर्मा, कानपुर ने अति सौंदर्यपूर्ण भाषा शैली के साथ विवाह के बाद अपने पहले वट सावित्री व्रत की पूजा का संस्मरण बता सबको रोमांचित किया।
डा. कविता परिहार, नागपुर ने संस्था के पदाधिकारियों को धन्यवाद दिया व वट वृक्ष को ऑक्सीजन का भंडार बताते हुए जड़ से लेकर फल तक के स्वास्थ्य की दृष्टि से होने वाले फायदे बताए। विद्या चौहान, हरियाणा ने 'तेरा पूजन करें सुहागन हे वट वृक्ष महान, तेरी शरण में जो भी आए दो उनको वरदान, हे वट वृक्ष महान' स्वरचित कविता गीत गाकर सबका मन मोह लिया तो नागपुर से आयी रेखा तिवारी ने भी 'आई कर सोलह श्रृंगार, मैं तो बड़ को पूजू आज मंगल घड़ियों में' स्वरचित गीत गाकर कार्यक्रम में समा बांध दिया।
नेपाल से श्रीमती बिमुन्स पौडेल जी ने भी वट सावित्री पर अपनी कविता 'ज्येष्ठ कृष्ण की चतुर्दशी यह बहुत ही पावन होती, एक सुहागन दर्द मिटाने वृक्ष छाऊ तल रोती' सुना सबके हृदय को छू लिया एवं वट सावित्री की उपासना व्रत नेपाल में कैसे मनाया जाता है इस पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में संस्था की राष्ट्रीय उपाध्यक्षा तनु खुल्बे जी ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी सम्मानीय जनों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में उर्मिला जी , भगवती पंत, लक्ष्मी जोशी, प्रेमा पांडे, मधु पंत, पैंजी जी, कुसुम जोशी जी, अरुणा उपाध्याय, अशीष उपाध्याय जी आदि भी उपस्थित रहें।