ईश्वर की अनुकम्पा के बिना जीवन में कुछ भी होना असंभव है। ईश्वर- कृपा से ही सब संभव है। जीवन चलायमान भी ईश्वर कृपा से ही संभव है।भगवत- भक्ति हेतु पूर्ण समर्पण आवश्यक है। किसी भी स्थिति- परिस्थिति में सच्चे हृदय से ही परमात्मा को स्मरण किया जाए, तो वे हमारे सम्मुख उपस्थित होकर हमारी विपदाओं को क्षण भर में ही समाप्त कर देते हैं। अपने अनुभवानुसार आज मैं एक ‘सच्ची घटना’ जो मेरे तथा मेरे परिवार के साथ घटी आप सभी के साथ साझा करना चाहती हूँ। कुछ समय पूर्व हम परिवार सहित नौ देवियों के दर्शन के उपरान्त दिल्ली लौट रहे थे कि मार्ग में रात करीब दो बजे पहाड़ों के बीच सुनसान सड़क पर हमारी कार रैलिंग पर चढ़कर बंद हो गई। बहुत प्रयास के बाद भी कार चल नहीं रही थी। आस- पास कुछ न था । केवल चांद की रोशनी ही थी। मैंने सच्चे दिल से साई बाबाजी को पुकारा, तभी चमत्कार-सा हुआ। सामने से एक बूढ़े व्यक्ति अकेले रेडा लेकर आते दिखाई दिए। हमारे पास आकर उन्होंने हमसे वहाँ रुकने का कारण पूछा ,कारण जानकर उन्होंने रेडे पर से रस्सा उठाया तथा गाड़ी को रस्सी से बाँधकर ऐसे खींचा, मानो कोई खिलौना खींच रहे हों। फिर गाड़ी को खींचकर वे कुछ किलोमीटर दूर स्थित एक दुकान (जहाँ गाड़ियाँ ठीक होती थीं) पर ले गए। मैंने शीघ्र ही कार से पानी निकालकर उन्हें पीने के लिए दिया । पानी पीकर वे बहुत खुश थे । मैने कुछ पैसे देने चाहे, तो उन्होंने अस्वीकर कर दिए।अभी मैं कुछ कदम गाड़ी ठीक करने वाली दुकान से चली ही थी, मेरा अन्तर्मन बार- बार कह रहा था कि हो न हो ये मददगार साईं बाबाजी ही हैं, मैंने पीछे मुड़कर देखा, तो वहाँ कोई न था, न रेड़ा, न ही कोई व्यक्ति । दूर- दूर तक सुनसान सड़क थी । गाड़ी ठीक करवाकर हम दिल्ली लौट आए । पूर्ण – विश्वास है मुझे, तथा मेरे परिवार को, कि वे साईबाबा जी ही थे क्योंकि इतनी शीघ्र वे आँखों से ओझल हो गए थे। सामान्य व्यक्ति होता तो कुछ दूर तो दिखाई देता । हमारे जीवन पर साई बाबा जी की इतनी कृपा है कि गिनाना असंभव है।‘ हमारा जीवन ही साईं बाबाजी हैं।‘ यह कहना, अतिश्योक्ति न होगी ।‘ ॐ साई राम ‘ ‘सबका भला हो’ यही हमारी कामना है ।
श्रीमती वीना कपूर
(अध्यापन कार्यरत)।
(एक शिक्षिका)
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