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अम्बेश तिवारी |
अजब, अनूठा, अलबेला सा कानपुर है मेरी जान!
कानपुर में बसा हुआ है एक छोटा सा हिंदुस्तान !
मुँह में पान, दिलों में मस्ती, यहाँ के लोगों की पहचान,
कानपुर में बसा हुआ है एक छोटा सा हिंदुस्तान !!
झाँसी की रानी का बचपन इस मिट्टी ने सींचा था,
इसी धरा पर भगतसिंह ने क्रांति पाठ भी सीखा था !!
विद्यार्थी जी के प्रताप से, देशभक्ति का बिगुल बजा,
वीर चन्द्रशेखर ने यहीं पर, नया क्रांति इतिहास रचा !
नमन हमारी पुण्य-भूमि, यह कानपुर मेरा अभिमान!!
कानपुर में बसा हुआ है एक छोटा सा हिंदुस्तान !!!
सीता माँ की तपोभूमि जो, तपेश्वरी है, पावन धाम,
पनकी वाले बाबा की जय, बन जाते सब बिगड़े काम !
गँगा मईया के घाटों पर, अविरल रस धारा बहती,
हर हर महादेव बम भोले, स्वरलहरी गुंजित रहती !!
यहाँ शिवालय के जयकारों, से होती हर सुबह प्रणाम !!
कानपुर में बसा हुआ है एक छोटा सा हिंदुस्तान !!
उद्योगों का केंद्र बना यह, और ज्ञान का है उपवन,
रोजगार मिलता लोगों को, शिक्षा से बदले जीवन !!
कला और विज्ञान ने मिलकर, अमन शान्ति पैगाम दिया !!
यहाँ की प्रतिभाओं ने दुनिया, भर में ऊँचा नाम किया !
आई आई टी और जीएसवीएम, दोनों अपने देश की शान !
कानपुर में बसा हुआ है, एक छोटा सा हिंदुस्तान !!
जे के मंदिर, ग्रीन पार्क हो, या हो फूल बाग की छाँव
मोती झील की सुन्दरता में, टिकते नहीं धरा पर पाँव !
कभी न रुकते, कभी न झुकते, चलते रहते दिन और रात!
कनपुरिया मस्ती में जीते, चाहे कैसे हों हालात !!
दिल में हो तूफान भले पर चेहरे पर रहती मुस्कान !
कानपुर में बसा हुआ है एक छोटा सा हिंदुस्तान !!
अजब, अनूठा, अलबेला सा कानपुर है मेरी जान!
कानपुर में बसा हुआ है एक छोटा सा हिंदुस्तान !
मुँह में पान, दिलों में मस्ती, यहाँ के लोगों की पहचान,
कानपुर में बसा हुआ है एक छोटा सा हिंदुस्तान !
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